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जमरानी बांध की बाधा दूर
Updated Wed, 25 Apr 2018 01:52 AM IST
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हल्द्वानी। जमरानी बांध स्थल का परीक्षण और डीपीआर की समीक्षा को लेकर यहां पहुंची केंद्रीय जलायोग की टीम ने परियोजना को हर स्तर पर उपयुक्त पाया है। केंद्रीय टीम के मुताबिक परियोजना बांध निर्माण के सभी मानकों को पूरा करती है। केंद्रीय टीम के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने बांध से संबंधित सभी पहलुओं का परीक्षण कर लिया है और परियोजना को बांध निर्माण के लिए उपयुक्त पाया है। अब केंद्रीय एडवाइजरी कमेटी को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। बांध को 99 फीसदी मंजूरी मिलना तय है।
जमरानी बांध स्थल, गौला बैराज, नहरों और शहर को पेयजल वितरित करने वाले ट्रीटमेंट प्लांट समेत विभिन्न स्थलों का निरीक्षण करने के बाद केंद्रीय जलायोग के मुख्य अभियंता सीकेएल दास ने कहा कि बांध निर्माण के लिए यहां बहुत अच्छा नेटवर्क बना है। भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल हैं। प्राकृतिक रूप से बांध स्थल उपयुक्त है। टीम ने यहां बांध की आवश्यकता और स्थानीय जरूरतों को समझा है। यहां बांध से जुड़ी सभी बातों को समझने के बाद पाया है कि यहां लगातार आबादी बढ़ रही है और उसके भविष्य के लिए बांध बनाया जाना आवश्यक है। बांध के बगैर यहां पेयजल का कोई विकल्प नहीं है। यह परियोजना बांध बनने के सभी मानक पूरा करती है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता (कुमाऊं) एलके शर्मा ने कहा कि टीम ने परियोजना को हर दृष्टि से उपयुक्त पाया है। अब बांध की मंजूरी मिलना तय है। बांध और अन्य स्थलों के निरीक्षण में उनके साथ केंद्रीय जलायोग के निदेशक पीयूष रंजन और एसएस बोनाल भी मौजूद थे।
अंतिम डीपीआर पर सहमत हुई केंद्रीय टीम
बांध निर्माण के सभी मानकों को पूरा करती है परियोजना
सिंचाई विभाग के यह अधिकारी भी रहे मौजूद
डीसी टम्टा एसई, एमएस पतियाल एसई, डीसी पांडे एसई, जावेद अनवर ईई, तरुण बंसल ईई, संजय कुमार एई, शाह नवाज एई, डीडी सती, आनंद नेगी एई, कैलाश बिष्ट कनिष्ठ अभियंता, प्रमोद कुमार कनिष्ठ अभियंता, सुमन बिष्ट कनिष्ठ अभियंता।
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2850 करोड़ रुपये की फाइनल डीपीआर उपयुक्त
हल्द्वानी। केंद्रीय जलायोग की केंद्रीय टीम ने 2850 करोड़ रुपये की अंतिम डीपीआर को सही पाया है। इसी डीपीआर और क्षेत्र के परीक्षण की रिपोर्ट सलाहकार समिति को सौंपी जाएगी।
केंद्रीय टीम ने निरीक्षण के दौरान इन बिंदुओं को देखा और समझा
- काठगोदाम बैराज का निरीक्षण
- बैराज से निकलने वाली गौलापार, गौलावार नहरों और उनका डिस्चार्ज
- गौला बैराज से पीने के लिए छोड़े जा रहे पानी की स्थिति
- बैराज में फ्लड इत्यादि को नियंत्रित करने की प्रक्रिया
- बैराज बनने से पहले कार्य कर रहे पुराने सिस्टम
- सिंचाई विभाग के शहर और बाहर के सभी कंट्रोल प्वाइंट
- बैराज से निकलने वाली मुख्य नहर और वितरण नहरें
- जमरानी बांध का कैचमेंट एरिया का निरीक्षण
जमरानी बांध की विशेषता
- 9 किमी लंबा, 130 मीटर चौड़ा और 485 मीटर ऊंचा बनेगा बांध
- 368 हेेक्टेयर वन क्षेत्र में फैला है
- 142. 72 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा बांध से
- 42 एमसीएम पानी शुद्ध पेयजल के लिए मिलेगा
- उत्तरप्रदेश को 61 एमसीएम, 38.6 एमसीएम पानी उत्तराखंड को सिंचाई के लिए मिलेगा
- 14 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन
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जमरानी बांध स्थल, गौला बैराज, नहरों और शहर को पेयजल वितरित करने वाले ट्रीटमेंट प्लांट समेत विभिन्न स्थलों का निरीक्षण करने के बाद केंद्रीय जलायोग के मुख्य अभियंता सीकेएल दास ने कहा कि बांध निर्माण के लिए यहां बहुत अच्छा नेटवर्क बना है। भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल हैं। प्राकृतिक रूप से बांध स्थल उपयुक्त है। टीम ने यहां बांध की आवश्यकता और स्थानीय जरूरतों को समझा है। यहां बांध से जुड़ी सभी बातों को समझने के बाद पाया है कि यहां लगातार आबादी बढ़ रही है और उसके भविष्य के लिए बांध बनाया जाना आवश्यक है। बांध के बगैर यहां पेयजल का कोई विकल्प नहीं है। यह परियोजना बांध बनने के सभी मानक पूरा करती है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता (कुमाऊं) एलके शर्मा ने कहा कि टीम ने परियोजना को हर दृष्टि से उपयुक्त पाया है। अब बांध की मंजूरी मिलना तय है। बांध और अन्य स्थलों के निरीक्षण में उनके साथ केंद्रीय जलायोग के निदेशक पीयूष रंजन और एसएस बोनाल भी मौजूद थे।
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अंतिम डीपीआर पर सहमत हुई केंद्रीय टीम
बांध निर्माण के सभी मानकों को पूरा करती है परियोजना
सिंचाई विभाग के यह अधिकारी भी रहे मौजूद
डीसी टम्टा एसई, एमएस पतियाल एसई, डीसी पांडे एसई, जावेद अनवर ईई, तरुण बंसल ईई, संजय कुमार एई, शाह नवाज एई, डीडी सती, आनंद नेगी एई, कैलाश बिष्ट कनिष्ठ अभियंता, प्रमोद कुमार कनिष्ठ अभियंता, सुमन बिष्ट कनिष्ठ अभियंता।
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2850 करोड़ रुपये की फाइनल डीपीआर उपयुक्त
हल्द्वानी। केंद्रीय जलायोग की केंद्रीय टीम ने 2850 करोड़ रुपये की अंतिम डीपीआर को सही पाया है। इसी डीपीआर और क्षेत्र के परीक्षण की रिपोर्ट सलाहकार समिति को सौंपी जाएगी।
केंद्रीय टीम ने निरीक्षण के दौरान इन बिंदुओं को देखा और समझा
- काठगोदाम बैराज का निरीक्षण
- बैराज से निकलने वाली गौलापार, गौलावार नहरों और उनका डिस्चार्ज
- गौला बैराज से पीने के लिए छोड़े जा रहे पानी की स्थिति
- बैराज में फ्लड इत्यादि को नियंत्रित करने की प्रक्रिया
- बैराज बनने से पहले कार्य कर रहे पुराने सिस्टम
- सिंचाई विभाग के शहर और बाहर के सभी कंट्रोल प्वाइंट
- बैराज से निकलने वाली मुख्य नहर और वितरण नहरें
- जमरानी बांध का कैचमेंट एरिया का निरीक्षण
जमरानी बांध की विशेषता
- 9 किमी लंबा, 130 मीटर चौड़ा और 485 मीटर ऊंचा बनेगा बांध
- 368 हेेक्टेयर वन क्षेत्र में फैला है
- 142. 72 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा बांध से
- 42 एमसीएम पानी शुद्ध पेयजल के लिए मिलेगा
- उत्तरप्रदेश को 61 एमसीएम, 38.6 एमसीएम पानी उत्तराखंड को सिंचाई के लिए मिलेगा
- 14 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन