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पंचेश्वर बांध की जद में आने वाले हाइवे को लेकर संशय में एनएच
Updated Sun, 03 Sep 2017 02:27 AM IST
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हल्द्वानी। भारत और नेपाल की संयुक्त योजना के तहत प्रस्तावित पंचेश्वर बांध की जद में राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क भी आएगी। एनएच को बताए गए बांध के उच्चतम लेवल के अनुसार 14 किलोमीटर हाइवे पानी में डूबेगा। विभागीय अधिकारी विस्तृत जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि इसे लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
भारत नेपाल सीमा पर महाकाली नदी में 56 सालों से चल रही बांध बनने की कवायद को अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है। बांध बनने से चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा के 134 गांव जलमग्न हो जाएंगे। नेपाल से एनओसी मिलने के साथ ही भारत सरकार ने बांध की डीपीआर भी सार्वजनिक कर दी है। बांध के विरोध की भी आवाजें मुखर हो रही हैं। पंचेश्वर बांध को लेकर जनसुनवाई का सिलसिला चल रहा है। बांध के डूब क्षेत्र की जद में पिथौरागढ़ के घाट क्षेत्र हाइवे और उसमें बने पुल भी आ रहे हैं। हालांकि हाइवे का कितना हिस्सा आएगा, इसे लेकर असमंजस बरकरार है। डूब क्षेत्र में हाइवे आने से एनएच को वैकल्पिक मार्ग और पुलों का निर्माण करना पड़ेगा और यह काम बांध निर्माण से पहले ही शुरू करना होगा, जिससे यातायात पर बांध निर्माण से कोई रुकावट न पड़े। हाइवे के अलावा अन्य विभागों की सड़कें भी डूब क्षेत्र में आएंगी। एनएच के अधीक्षण अभियंता सीएम पांडेय ने बताया कि बांध का जो उच्चतम लेवल की उन्हें सूचना दी गई है, उसके हिसाब से तो घाट क्षेत्र का 14 किलोमीटर हाइवे डूब क्षेत्र में आएगा। ऐसा होने पर डायवर्जन लंबा करना पड़ेगा। बांध के लेवल की अभी विस्तृत सूचना नहीं मिल सकी है। जब डूब क्षेत्र की तस्वीर साफ होगी, तब विभाग डायवर्जन के लिए योजना तैयार करेगा।
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भारत नेपाल सीमा पर महाकाली नदी में 56 सालों से चल रही बांध बनने की कवायद को अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है। बांध बनने से चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा के 134 गांव जलमग्न हो जाएंगे। नेपाल से एनओसी मिलने के साथ ही भारत सरकार ने बांध की डीपीआर भी सार्वजनिक कर दी है। बांध के विरोध की भी आवाजें मुखर हो रही हैं। पंचेश्वर बांध को लेकर जनसुनवाई का सिलसिला चल रहा है। बांध के डूब क्षेत्र की जद में पिथौरागढ़ के घाट क्षेत्र हाइवे और उसमें बने पुल भी आ रहे हैं। हालांकि हाइवे का कितना हिस्सा आएगा, इसे लेकर असमंजस बरकरार है। डूब क्षेत्र में हाइवे आने से एनएच को वैकल्पिक मार्ग और पुलों का निर्माण करना पड़ेगा और यह काम बांध निर्माण से पहले ही शुरू करना होगा, जिससे यातायात पर बांध निर्माण से कोई रुकावट न पड़े। हाइवे के अलावा अन्य विभागों की सड़कें भी डूब क्षेत्र में आएंगी। एनएच के अधीक्षण अभियंता सीएम पांडेय ने बताया कि बांध का जो उच्चतम लेवल की उन्हें सूचना दी गई है, उसके हिसाब से तो घाट क्षेत्र का 14 किलोमीटर हाइवे डूब क्षेत्र में आएगा। ऐसा होने पर डायवर्जन लंबा करना पड़ेगा। बांध के लेवल की अभी विस्तृत सूचना नहीं मिल सकी है। जब डूब क्षेत्र की तस्वीर साफ होगी, तब विभाग डायवर्जन के लिए योजना तैयार करेगा।
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