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15 साल बाद जागे, फिर सो गए
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Wed, 08 Jun 2016 11:08 PM IST
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प्रदेश के बजट के फेर में पहाड़ की खेती को बचाने की मुहिम एक बार फिर से अटक गई है। पिथौरागढ़, चंपावत जैसे सीमांत जिलों के लिए बेहद जरूरी मानी गई चकबंदी के अध्यादेश को प्रदेश सरकार विधानसभा सत्र के स्थगित न होने के कारण जारी नहीं करवा पा रही है। दूसरी ओर, चकबंदी को लेकर चलाया जाने वाला जागरूकता अभियान भी ठप हो गया है। ऐसे में चकबंदी की मुहिम प्रदेश में अब अगले कुछ सालों के लिए पीछे खिसक गई है।
राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश के पर्वतीय जिलों में चकबंदी की मांग की जाती रही है। इस बार विधानसभा सत्र में सरकार ने चकबंदी विधेयक को सदन के पटल पर रखा भी था पर 18 मार्च को कांग्रेस के नौ विधायकों की बगावत के कारण यह मामला अटक गया। इसके बाद दोबारा बनी हरीश रावत की सरकार ने चकबंदी अधिनियम को कैबिनेट से मंजूरी तो दी पर अब इसमें विधानसभा सत्र जारी रहने का पेच फंस गया है। संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश के मुताबिक विधानसभा सत्र अभी समाप्त नहीं किया गया है।
विधानसभा सत्र जारी रहने के दौरान राज्यपाल की ओर से अध्यादेश भी जारी नहीं किया जा सकता है। चकबंदी को लागू करने के पीछे कारण यह बताया जा रहा था कि इससे पहाड़ की खेती को बचाया जा सकेगा। चकबंदी ड्राफ्ट कमेटी के अध्यक्ष रहे केदार सिंह रावत के मुताबिक चकबंदी पर ड्राफ्ट कमेटी को करीब 55 गांवों से सहमति मिली थी, इसमें से 25 गांव कुमाऊं मंडल से थे। समिति ने दोनों मंडलों में सम्मेलन आयोजित करने का फैसला भी किया था पर इससे पहले ही समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया। अब जागरूकता अभियान भी ठंडे बस्ते में हैं।
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राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश के पर्वतीय जिलों में चकबंदी की मांग की जाती रही है। इस बार विधानसभा सत्र में सरकार ने चकबंदी विधेयक को सदन के पटल पर रखा भी था पर 18 मार्च को कांग्रेस के नौ विधायकों की बगावत के कारण यह मामला अटक गया। इसके बाद दोबारा बनी हरीश रावत की सरकार ने चकबंदी अधिनियम को कैबिनेट से मंजूरी तो दी पर अब इसमें विधानसभा सत्र जारी रहने का पेच फंस गया है। संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश के मुताबिक विधानसभा सत्र अभी समाप्त नहीं किया गया है।
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विधानसभा सत्र जारी रहने के दौरान राज्यपाल की ओर से अध्यादेश भी जारी नहीं किया जा सकता है। चकबंदी को लागू करने के पीछे कारण यह बताया जा रहा था कि इससे पहाड़ की खेती को बचाया जा सकेगा। चकबंदी ड्राफ्ट कमेटी के अध्यक्ष रहे केदार सिंह रावत के मुताबिक चकबंदी पर ड्राफ्ट कमेटी को करीब 55 गांवों से सहमति मिली थी, इसमें से 25 गांव कुमाऊं मंडल से थे। समिति ने दोनों मंडलों में सम्मेलन आयोजित करने का फैसला भी किया था पर इससे पहले ही समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया। अब जागरूकता अभियान भी ठंडे बस्ते में हैं।
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