{"_id":"5b6735404f1c1ba43e8b558d","slug":"141533490496-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है चिलियानौला-खनियां रोपवे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है चिलियानौला-खनियां रोपवे
Updated Sun, 05 Aug 2018 11:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी के नाम से मशहूर रानीखेत में पर्यटन सुविधाओं का अभाव आज तक दूर नहीं हो सका है। मनोरंजन के स्थलों के अभाव के चलते अधिकांश सैलानी यहां टिक नहीं पा रहे हैं। जिसके चलते पर्यटन व्यवसाय पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि छावनी परिषद की तरफ से रानीझील को विकसित करने सहित कुछ प्रयास किए गए हैं। पर्यटकों की आमद बढ़ाने के लिए स्थानीय लोगों ने खनियां गांव से चिलियानौला के बीच रोपवे स्थापित करने की मांग की थी, लगभग दो किमी की यह लघु रोपवे यात्रा सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
रानीखेत की शांत और सुंदर वादियों से गदगद अंग्रेज हुक्मरानों ने 1869 में यहां छावनी बसाई थी, धीरे धीरे यहां देश विदेश के सैलानी पहुंचने लगे और रानीखेत को पर्यटन नगरी का दर्जा मिल गया। प्रख्यात गोल्फ मैदान, चौबटिया का प्रख्यात सेब गार्डन, रानीझील, बिनसर महादेव मंदिर, हैड़ाखान मंदिर सहित तमाम स्थल पूर्व में भी पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन पर्यटकों के लिए मनोरंजन स्थल विकसित नहीं हो सके। जिसके चलते सैलानियों का रुझान धीरे-धीरे कम होने लगा।
कुछ वर्ष पूर्व सरकार ने रोपवे कारपोरेशन के माध्यम से रोपवे बनाने की घोषणा की थी। तत्कालीन कुमाऊं मंडल विकास निगम के निदेशक सदस्य डीएन बड़ोला सहित तमाम लोगों ने खनियां-चिलियानौला नाम से एक रोपवे रानीखेत में भी स्थापित करने की मांग की थी और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा था। लेकिन यह मांग आज तक पूरी नहीं हुई। इधर, पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि खनियां-चिलियानौला नाम से रोपवे बनाने की मांग तो उठी थी, लेकिन शासन स्तर से इस संबंध में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रानीखेत की शांत और सुंदर वादियों से गदगद अंग्रेज हुक्मरानों ने 1869 में यहां छावनी बसाई थी, धीरे धीरे यहां देश विदेश के सैलानी पहुंचने लगे और रानीखेत को पर्यटन नगरी का दर्जा मिल गया। प्रख्यात गोल्फ मैदान, चौबटिया का प्रख्यात सेब गार्डन, रानीझील, बिनसर महादेव मंदिर, हैड़ाखान मंदिर सहित तमाम स्थल पूर्व में भी पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन पर्यटकों के लिए मनोरंजन स्थल विकसित नहीं हो सके। जिसके चलते सैलानियों का रुझान धीरे-धीरे कम होने लगा।
विज्ञापन
कुछ वर्ष पूर्व सरकार ने रोपवे कारपोरेशन के माध्यम से रोपवे बनाने की घोषणा की थी। तत्कालीन कुमाऊं मंडल विकास निगम के निदेशक सदस्य डीएन बड़ोला सहित तमाम लोगों ने खनियां-चिलियानौला नाम से एक रोपवे रानीखेत में भी स्थापित करने की मांग की थी और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा था। लेकिन यह मांग आज तक पूरी नहीं हुई। इधर, पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि खनियां-चिलियानौला नाम से रोपवे बनाने की मांग तो उठी थी, लेकिन शासन स्तर से इस संबंध में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
विज्ञापन