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टनो मलबे के साए में जी रहा है ब्यूरा खाम
Updated Sat, 29 Jul 2017 02:26 AM IST
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हल्द्वानी। आपदा से प्रभावित ब्यूरा खाम में अब मलबा लोगों के जी का जंजाल बन गया है। मलबे को फेंकने के लिए किसी जगह का इंतजाम नहीं हो पाने से लोगों को अब एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भारी बारिश के कारण यह मलबा लोगों के घरों को नुकसान पहुंचा सकता है।
11 जुलाई को भारी बारिश के कारण काठगोदाम में ब्यूरा खाम गांव भूस्खलन की चपेट में आया था। गांव के ऊपर पहाड़ी पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई जा रही सड़क का मलबा सड़क के किनारे ही छोड़ दिया गया था। बारिश के कारण यही मलबा गांव तक पहुंचा और कई परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। लोगों के घरों में टनो मलबा घुस गया था और किसी तरह से इन लोगों की जान बच पाई थी।
पहले तो प्रशासन लोगों की इस परेशानी को नजरअंदाज करता रहा। बाद में जिलाधिकारी ने क्षेत्र का दौरा किया तो आपदा प्रबंधन तंत्र हरकत में आया। लोगों को क्षतिपूर्ति दी गई और मलबा हटाने के लिए जेसीबी और अन्य भारी मशीनों का इंतजाम किया गया। भूस्खलन को रोकने के लिए शुक्रवार को यहां पर वायर क्रेट बनाने का काम जारी रहा।
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अब इस क्षेत्र के लिए भूस्खलन में आया मलबा लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। मलबे को डंप करने के लिए कोई जगह नहीं मिल पाई है। ऐसे में लोगों से निकाला गया मलबा भी लोगों के घरों के समीप ही डंप कर दिया गया। डंपिंग के लिए जगह और रास्ता न होने के कारण पहाड़ी से आया मलबा भी यहां से नहीं हट पा रहा है।
ग्राम प्रधान नवीन पांडे के मुताबिक मलबे को देखकर अब लोग सहमे हुए हैं। भारी बारिश हुई तो यह मलबा घरों को फिर से नुकसान पहुंचा सकता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों के मुताबिक दलदली मिट्टी होने के कारण ट्रैक्टर ट्रॉली से मिट्टी हटाना मुश्किल हो रहा है।
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11 जुलाई को भारी बारिश के कारण काठगोदाम में ब्यूरा खाम गांव भूस्खलन की चपेट में आया था। गांव के ऊपर पहाड़ी पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई जा रही सड़क का मलबा सड़क के किनारे ही छोड़ दिया गया था। बारिश के कारण यही मलबा गांव तक पहुंचा और कई परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। लोगों के घरों में टनो मलबा घुस गया था और किसी तरह से इन लोगों की जान बच पाई थी।
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पहले तो प्रशासन लोगों की इस परेशानी को नजरअंदाज करता रहा। बाद में जिलाधिकारी ने क्षेत्र का दौरा किया तो आपदा प्रबंधन तंत्र हरकत में आया। लोगों को क्षतिपूर्ति दी गई और मलबा हटाने के लिए जेसीबी और अन्य भारी मशीनों का इंतजाम किया गया। भूस्खलन को रोकने के लिए शुक्रवार को यहां पर वायर क्रेट बनाने का काम जारी रहा।
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अब इस क्षेत्र के लिए भूस्खलन में आया मलबा लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। मलबे को डंप करने के लिए कोई जगह नहीं मिल पाई है। ऐसे में लोगों से निकाला गया मलबा भी लोगों के घरों के समीप ही डंप कर दिया गया। डंपिंग के लिए जगह और रास्ता न होने के कारण पहाड़ी से आया मलबा भी यहां से नहीं हट पा रहा है।
ग्राम प्रधान नवीन पांडे के मुताबिक मलबे को देखकर अब लोग सहमे हुए हैं। भारी बारिश हुई तो यह मलबा घरों को फिर से नुकसान पहुंचा सकता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों के मुताबिक दलदली मिट्टी होने के कारण ट्रैक्टर ट्रॉली से मिट्टी हटाना मुश्किल हो रहा है।