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कैंची मेले की तैयारियां पूरी, मेला आज

Haldwani Bureau Updated Fri, 15 Jun 2018 02:14 AM IST
बालाजी मंदिर में सजा फूल बंगला
बालाजी मंदिर में सजा फूल बंगला - फोटो : अमर उजाला
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भवाली (नैनीताल)। बाबा नीब करौरी महाराज की पुण्यतिथि 15 जून को हर साल की तरह इस बार भी देश-विदेश से लाखों भक्त कैंची धाम मंदिर पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से चाक-चौबंद पूरे कर लिए हैं। बृहस्पतिवार को पुलिस ने मंदिर परिसर की समिति के सुरक्षा को लेकर जायजा लिया। मंदिर समिति के प्रबंधक विनोद जोशी ने बताया कि मालपुवे बनकर तैयार हो चुके हैं।
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ये रहेगी पुलिस प्रशासन की व्यवस्था
पुलिस प्रशासन ने अल्मोड़ा-भवाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार को भारी वाहनों पर रोक लगाई है। मंदिर परिसर के सामने मुख्य कंट्रोल रूम बनाया गया है। पुलिस के एसएपी, सीओ, कोतवाल, एसआई, कांस्टेबलों के साथ पीएसी के जवान भवाली से कैंची धाम तक सुरक्षा व्यवस्था में जुटे रहेंगे। पुलिस की टीम सादी वर्दी में घूमकर संदिग्ध, चोर-उचक्कों पर नजर रखेगी। स्वास्थ्य विभाग, फायर ब्रिगेड, जल संस्थान के टैंकर मौजूद रहेंगे। भवाली डिपो से कैंची धाम तक शटल सेवा चलाकर यात्रियों को सुविधा प्रदान की जाएगी। साथ ही अतिरिक्त बसें भी भेजी जाएंगी।


- मेले की तैयारियां पूरी हो चुकी है। पुलिस की पूरी टीम सुरक्षा की दृष्टि से तैनात है। मेले को सफल बनाने में लोग अपना सहयोग प्रदान करें। -जन्मेजय खंडूरी, एसएसपी

अमेरिका की यूवैट को बाबा ने दिया था रामरानी का नाम
भवाली (नैनीताल)। ‘बाबा नीब करौरी महाराज ने मेरी जिंदगी बदल दी। बाबा का आशीर्वाद आज भी मेरे साथ है। वे हर जगह विद्यमान हैं। सपने में आकर बाबा ने मुझे कैंची धाम बुलाया। बाबा ने ही मुझे ‘रामरानी’ नाम दिया’। यह कहना है अमेरिका की ‘यूवैट रोटार’ का, जो पिछले 50 वर्षों से बाबा की भक्त हैं।
31 जनवरी 1952 में जन्मीं यूवैट रोटार ने बताया कि 10 दिसंबर 1970 के दौरान वो नेपाल में ट्रैकिंग के लिए गईं थी। उन्हें योग ध्यान का काफी शौक था। इसी दौरान उन्होंने एक सपना देखा जिसमें बाबा नीम करौली महाराज कंबल लपेटे किसी पत्थर के ऊपर बैठे हैं और उसे बुला रहे हैं। वह उस सपने का अर्थ नहीं समझ पाईं। इसके बाद वह मुंबई स्थित विपासना बुद्धिस्ट मेडिटेशन तकनीकी में ध्यान करने के लिए कुछ समय के लिए गईं। कुछ समय बाद वह अमेरिका लौट गईं। अमेरिका के न्यू मैक्सिको में उनकी मुलाकात हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. रिचर्ड एसपर्ट से हुई। उन्होंने योग ध्यान पर लिखी ‘बी हेयर नाव’ किताब लिखी थी। उन्होंने यह किताब भेंट की, जिसमें एक पृष्ठ पर बाबा का चित्र छपा था। बाबा का चित्र देख यूवैट को अपने सपने की याद आई।
1972 में वह कैंची धाम पहुंचीं और बाबा से मुलाकात की। बाबा ने उनको रामरानी का नाम दिया था। उन्होंने महाराज से कैंची धाम में रहने की इच्छा जताई लेकिन महाराज ने उन्हें अमेरिका जाने की सलाह दी। कहा कि उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ टैंपलस ओस्टिन जाना चाहिए। वहां जाकर यूवैट ने ‘पॉलटिक्स आफ इंडिया हिस्ट्री एवं स्टोग्राफी’ में मास्टर किया। यूवैट ने बताया कि तब से वह कैंची धाम आ रही हैं। एक बार यूवैट के पास जब रुपये खत्म हो गए थे तो बाबा ने पर्स देखने को कहा। पर्स पैसों से भरा था।

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