{"_id":"59b6f9ba4f1c1bee7f8b6093","slug":"131505163706-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चावल मामले में पारदर्शिता फिर सवालों के घेरे में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चावल मामले में पारदर्शिता फिर सवालों के घेरे में
Updated Tue, 12 Sep 2017 02:35 AM IST
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हल्द्वानी। कमलुवागांजा गोदाम की वीडियो रिकार्डिंग अब सवालों के घेरे में है। पारदर्शिता के लिहाज से बेहद जरूरी वीडियो रिकार्डिंग को लेकर जांच टीम के अधिकारी और गोदाम इंचार्ज के अलग-अलग बोल हैं।
सोमवार को कमलुवागांजा में अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता में इतना सुधार आया कि तीन घंटे में ही छह गाड़ियों से 1550 कट्टे चावल उतार लिया गया और उसकी जांच भी कर ली गई। सामान्य रूप से इस काम में 12 घंटे का समय लगना तय माना जाता है।
कमलुवागांजा गोदाम में चावल को लेकर विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इतने विवाद के बाद भी कमलुवागांजा में उतरने आए चावल की वीडियो रिकार्डिंग को लेकर अधिकारियों के बोल अलग-अलग हैं। जांच टीम के अधिकारी यूएस डांगी ने बताया कि गोदाम में छह गाड़ी चावल आया इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी की गई।
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गोदाम इंचार्ज और वरिष्ठ विपणन अधिकारी चंद्रशेखर आर्या ने बताया कि छह गाड़ी चावल आया। इसकी वीडियो रिकार्डिंग नहीं की गई है। इन दोनों अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयानों के कारण मानकों के हिसाब से होने वाली वीडियो रिकार्डिंग भी संदेह के घेरे में है। यह तब है जबकि पारदर्शिता के हिसाब से वीडियो रिकार्डिंग का होना जरूरी है।
सवाल एक और बात को लेकर भी है। बताया गया कि यहां सोमवार को छह गाड़ी चावल आया। छह गाड़ियों का मतलब 1550 कट्टे या 775 क्विंटल चावल आया। यहां के कार्मिकों की कार्यक्षमता में इतना सुधार आया कि इन छह गाड़ियों का चावल न सिर्फ तीन घंटे में उतार लिया गया, बल्कि सैँपल लेकर उसकी जांच भी कर ली गई।
इसकी तुलना मंडी स्टेट पूल गोदाम से की जाए तो सवाल और गहरा जाता है। मंडी में चार गाड़ियों से 1200 कट्टे चावल आया। चावल जांच में पास हो गया। जांच के बाद इसे गोदाम में उतार लिया गया। मंडी स्टेट पूल के गोदाम में चार गाड़ियों की जांच में सुबह से शाम तक की गई।
जांच टीम के अधिकारी यहां सुबह से तीन बजे तक रहे। तीन बजे बाद अधिकारी कमलुवागांजा गोदाम को गए। जाहिर है कि तीन बजे से लेकर छह बजे तक के तीन घंटे के समय में यहां चावलों के कट्टे गाड़ियों से उतारे गए, इसके बाद सैंपल लिए गए और फिर सैंपलों की जांच की गई। जांच में सैंपल सही मिलने के बाद उन्हें गोदाम में व्यवस्थित किया गया। सामान्य रूप से छह गाड़ियों के लिए इस काम में करीब 12 घंटे का समय लगता है।
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सोमवार को कमलुवागांजा में अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता में इतना सुधार आया कि तीन घंटे में ही छह गाड़ियों से 1550 कट्टे चावल उतार लिया गया और उसकी जांच भी कर ली गई। सामान्य रूप से इस काम में 12 घंटे का समय लगना तय माना जाता है।
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कमलुवागांजा गोदाम में चावल को लेकर विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इतने विवाद के बाद भी कमलुवागांजा में उतरने आए चावल की वीडियो रिकार्डिंग को लेकर अधिकारियों के बोल अलग-अलग हैं। जांच टीम के अधिकारी यूएस डांगी ने बताया कि गोदाम में छह गाड़ी चावल आया इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी की गई।
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गोदाम इंचार्ज और वरिष्ठ विपणन अधिकारी चंद्रशेखर आर्या ने बताया कि छह गाड़ी चावल आया। इसकी वीडियो रिकार्डिंग नहीं की गई है। इन दोनों अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयानों के कारण मानकों के हिसाब से होने वाली वीडियो रिकार्डिंग भी संदेह के घेरे में है। यह तब है जबकि पारदर्शिता के हिसाब से वीडियो रिकार्डिंग का होना जरूरी है।
सवाल एक और बात को लेकर भी है। बताया गया कि यहां सोमवार को छह गाड़ी चावल आया। छह गाड़ियों का मतलब 1550 कट्टे या 775 क्विंटल चावल आया। यहां के कार्मिकों की कार्यक्षमता में इतना सुधार आया कि इन छह गाड़ियों का चावल न सिर्फ तीन घंटे में उतार लिया गया, बल्कि सैँपल लेकर उसकी जांच भी कर ली गई।
इसकी तुलना मंडी स्टेट पूल गोदाम से की जाए तो सवाल और गहरा जाता है। मंडी में चार गाड़ियों से 1200 कट्टे चावल आया। चावल जांच में पास हो गया। जांच के बाद इसे गोदाम में उतार लिया गया। मंडी स्टेट पूल के गोदाम में चार गाड़ियों की जांच में सुबह से शाम तक की गई।
जांच टीम के अधिकारी यहां सुबह से तीन बजे तक रहे। तीन बजे बाद अधिकारी कमलुवागांजा गोदाम को गए। जाहिर है कि तीन बजे से लेकर छह बजे तक के तीन घंटे के समय में यहां चावलों के कट्टे गाड़ियों से उतारे गए, इसके बाद सैंपल लिए गए और फिर सैंपलों की जांच की गई। जांच में सैंपल सही मिलने के बाद उन्हें गोदाम में व्यवस्थित किया गया। सामान्य रूप से छह गाड़ियों के लिए इस काम में करीब 12 घंटे का समय लगता है।