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पुस्तक मेले के अंतिम दिन भीगीं किताबें
Updated Mon, 02 Jul 2018 01:43 AM IST
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पुस्तक मेले में जलभराव
- फोटो : अमर उजाला
हल्द्वानी। बारिश और जलभराव के बाद भी पुस्तक प्रेमियों का उत्साह कम नहीं हुआ। नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के पुस्तक मेले के आखिरी दिन काफी अव्यवस्था थी, उसके बाद भी बड़ी संख्या में किताबों के शौकीन पहुंचे। पहली बार लगे मेेले में पुस्तक प्रेमियों के उत्साह से आयोजक गदगद है। धुमाकोट हादसे के मद्देनजर समापन कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।
रामलीला मैदान में 23 जून से एनबीटी का पुस्तक मेला शुरू हुआ। इसे लेकर पहले दिन से ही लोगों उत्साह था। पहली बार लग रहे पुस्तक मेले में 41 प्रकाशक हजारों किताबों को लेकर पहुंचे। सामाजिक, आर्थिक, इतिहास लेकर बच्चों की कार्टून तक की किताबें मेले में मौजूद थी, जिसे लोगों ने हाथ हाथ लिया। मोबाइल, इंटरनेट से लेकर टीवी तक सिमट रहे बच्चों को लेकर अभिभावक मेले के जरिए किताबों की दुनिया से रूबरू कराया। एनबीटी के रविंद्र कुमार के अनुसार पहली बार हल्द्वानी में पुस्तक मेला लगा है, इसमें लोगों का उत्साह देखने लायक है। शनिवार की रात और फिर रविवार को बारिश के कारण पुस्तक मेला स्थल पर कुछ दिक्कत आई थी, इसके बाद भी लोगों ने मुश्किलों की चिंता किये बगैर पहुंचे हैं। धुमाकोट हादसे और जलभराव को देखते समापन समारोह को स्थगित कर दिया गया। नौ दिन के इस पुस्तक मेले में कई प्रकाशक हल्द्वानी के पुस्तक प्रेमियों के मुरीद नजर आए तो कुछ के हाथ मायूसी लगी। कुछ प्रकाशकों की शिकायत थी कि अपेक्षित फायदा नहीं मिल पाया। आखिरी दिन बारिश के कारण हुए नुकसान ने भी उनके इस दर्द को बढ़ा दिया।
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रामलीला मैदान में 23 जून से एनबीटी का पुस्तक मेला शुरू हुआ। इसे लेकर पहले दिन से ही लोगों उत्साह था। पहली बार लग रहे पुस्तक मेले में 41 प्रकाशक हजारों किताबों को लेकर पहुंचे। सामाजिक, आर्थिक, इतिहास लेकर बच्चों की कार्टून तक की किताबें मेले में मौजूद थी, जिसे लोगों ने हाथ हाथ लिया। मोबाइल, इंटरनेट से लेकर टीवी तक सिमट रहे बच्चों को लेकर अभिभावक मेले के जरिए किताबों की दुनिया से रूबरू कराया। एनबीटी के रविंद्र कुमार के अनुसार पहली बार हल्द्वानी में पुस्तक मेला लगा है, इसमें लोगों का उत्साह देखने लायक है। शनिवार की रात और फिर रविवार को बारिश के कारण पुस्तक मेला स्थल पर कुछ दिक्कत आई थी, इसके बाद भी लोगों ने मुश्किलों की चिंता किये बगैर पहुंचे हैं। धुमाकोट हादसे और जलभराव को देखते समापन समारोह को स्थगित कर दिया गया। नौ दिन के इस पुस्तक मेले में कई प्रकाशक हल्द्वानी के पुस्तक प्रेमियों के मुरीद नजर आए तो कुछ के हाथ मायूसी लगी। कुछ प्रकाशकों की शिकायत थी कि अपेक्षित फायदा नहीं मिल पाया। आखिरी दिन बारिश के कारण हुए नुकसान ने भी उनके इस दर्द को बढ़ा दिया।
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