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मत्स्य पालन की बोली को चुनौती देने वाली विशेष याचिका खारिज
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:58 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने ऊधमसिंह नगर जिले के धौरा और बैगुल जलाशयों में मत्स्य पालन की निविदा के मामले में दायर विशेष याचिका को खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ऊधमसिंह नगर जिले के धौरा व बैगुल जलाशयों में मत्स्य पालन की बोली (बिड) में पांच करोड़ सालाना टर्न ओवर की शर्त को विशेष याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई थी। पूर्व में 17 नवंबर को एकलपीठ ने आदेश पारित कर इस मामले में दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। मत्स्य विकास अभिकरण ने किच्छा के धौरा व सितारगंज के बैगुल बांध में मत्स्य पालन की निविदा में विशेष प्रावधान किए थे। निविदा में शामिल होने वाली कंपनियों का तीन साल का टर्नओवर पांच करोड़ से अधिक होने की शर्त रखी गई है। कंपनी को ईएसआई व पीएफ में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य किया गया है। लेखा सीए से प्रमाणित होने पर ही बोली में भागीदारी हो सकती थी। प्रताप ट्रेडिंग कंपनी व मत्स्य श्रमजीवी सहकारी समिति सहित पांच कंपनियों ने इन शर्तों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। प्रताप ट्रेडिंग कंपनी व मत्स्य श्रमजीवी समिति ने विशेष याचिका दायर की। सरकार की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने न्यायालय को बताया कि इस प्रकार की शर्त नहीं होने से कई कंपनियां आधे में काम छोड़कर चली गई थीं और इससे सरकार को राजस्व की हानि हुई। कारोबार को देखते हुए ही पांच करोड़ टर्न ओवर की शर्त रखी है। श्रम कानून के पालन करते हुए टेंडर में पीएफ और ईएसआई का प्रावधान रखा गया है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने स्पेशल अपील खारिज कर दिया।
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बुधवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ऊधमसिंह नगर जिले के धौरा व बैगुल जलाशयों में मत्स्य पालन की बोली (बिड) में पांच करोड़ सालाना टर्न ओवर की शर्त को विशेष याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई थी। पूर्व में 17 नवंबर को एकलपीठ ने आदेश पारित कर इस मामले में दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। मत्स्य विकास अभिकरण ने किच्छा के धौरा व सितारगंज के बैगुल बांध में मत्स्य पालन की निविदा में विशेष प्रावधान किए थे। निविदा में शामिल होने वाली कंपनियों का तीन साल का टर्नओवर पांच करोड़ से अधिक होने की शर्त रखी गई है। कंपनी को ईएसआई व पीएफ में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य किया गया है। लेखा सीए से प्रमाणित होने पर ही बोली में भागीदारी हो सकती थी। प्रताप ट्रेडिंग कंपनी व मत्स्य श्रमजीवी सहकारी समिति सहित पांच कंपनियों ने इन शर्तों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। प्रताप ट्रेडिंग कंपनी व मत्स्य श्रमजीवी समिति ने विशेष याचिका दायर की। सरकार की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने न्यायालय को बताया कि इस प्रकार की शर्त नहीं होने से कई कंपनियां आधे में काम छोड़कर चली गई थीं और इससे सरकार को राजस्व की हानि हुई। कारोबार को देखते हुए ही पांच करोड़ टर्न ओवर की शर्त रखी है। श्रम कानून के पालन करते हुए टेंडर में पीएफ और ईएसआई का प्रावधान रखा गया है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने स्पेशल अपील खारिज कर दिया।
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