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संकटग्रस्त इंडियन पैंगोलिन को बचाएगा वन महकमा
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Pangolin
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हल्द्वानी। इंडियन पैंगोलिन (सल्लू सांप या चींटीखोर) को बचाने के लिए वन विभाग ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। विभाग ने पैंगोलिन के संरक्षण के शोध कराया है। शोध के आधार पर इनको बचाने के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई है।
तराई-भाबर के जंगलों में पैंगोलिन मिलते हैं। अंधविश्वास के कारण पैंगोलिन का शिकार किया जाता है। पैंगोलिन की खाल की चीन में दवाईयां बनाते हैं। इसके खाल से जैकेट, अंगूठी बनाकर भी लोग पहनते हैं। कुछ लोग नपुंसकता की दवा मानकर भी इसे खाते हैं। इसी कारण पैंगोलिन के वजूद पर संकट आ गया है। वन विभाग ने इसे संकटग्रस्त वन्यजीव माना है। पैंगोलिन का मुख्य भोजन पेड़, पौधों के दुश्मन दीपक और चीटियां हैं। इन दोनों को खाकर ही वह वनों के संरक्षण में मदद करता है।
संकटग्रस्त इंडियन पैंगोलिन को बचाएगा वन महकमा
उत्तराखंड जैवविविधता बोर्ड ने संरक्षण के लिए कराया शोध, सुरक्षा के लिए वन विभाग को जारी की गई एडवाइजरी
इंडियन पैंगोलिन की संरचना
पैंगोलिन करीब 10 से 16 किलो वजन वाला स्तनधारी प्राणी होता है। इसकी लंबाई 64 से लेकर 122 सेमी होती है। यह एकमात्र ऐसा स्तनधारी है, जिसका शरीर शल्क से ढका होता है। इसका शल्क कैराटिन नामक पदार्थ से बना होता है। इसी पदार्थ से मानव के नाखून, बाल बने होते हैं। पैंगोलिन के शल्क, मांस में औषधीय गुण होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। पैंगोलिन हरिद्वार से लेकर खटीमा तक के जंगलों में मिलता है।
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उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड ने कराया शोध
उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड ने इंडियन पैंगोलिन के अस्तित्व पर गहराते संकट को लेकर शोध कराया है। पैंगोलिन के बचाव के शोधकर्ता भास्कर भंडारी ने कई सुझाव दिए हैं। पैंगोलिन के शिकारियों पर सख्ती, शिकार करने वालों को कानून के तहत सजा दिलाने, शिकारियों की लगातार निगरानी, वनाग्नि से बचाने, इनके वास स्थलों को विकसित करने की जरूरत बताई है।
इंडियन पैंगोलिन को शिकार से बचाने के लिए शोध किया गया है। मुख्यालय की ओर से इसके संरक्षण के लिए सुझाव दिए गए हैं। सभी अधिकारियों को इस पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त, कुमाऊं
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तराई-भाबर के जंगलों में पैंगोलिन मिलते हैं। अंधविश्वास के कारण पैंगोलिन का शिकार किया जाता है। पैंगोलिन की खाल की चीन में दवाईयां बनाते हैं। इसके खाल से जैकेट, अंगूठी बनाकर भी लोग पहनते हैं। कुछ लोग नपुंसकता की दवा मानकर भी इसे खाते हैं। इसी कारण पैंगोलिन के वजूद पर संकट आ गया है। वन विभाग ने इसे संकटग्रस्त वन्यजीव माना है। पैंगोलिन का मुख्य भोजन पेड़, पौधों के दुश्मन दीपक और चीटियां हैं। इन दोनों को खाकर ही वह वनों के संरक्षण में मदद करता है।
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संकटग्रस्त इंडियन पैंगोलिन को बचाएगा वन महकमा
उत्तराखंड जैवविविधता बोर्ड ने संरक्षण के लिए कराया शोध, सुरक्षा के लिए वन विभाग को जारी की गई एडवाइजरी
इंडियन पैंगोलिन की संरचना
पैंगोलिन करीब 10 से 16 किलो वजन वाला स्तनधारी प्राणी होता है। इसकी लंबाई 64 से लेकर 122 सेमी होती है। यह एकमात्र ऐसा स्तनधारी है, जिसका शरीर शल्क से ढका होता है। इसका शल्क कैराटिन नामक पदार्थ से बना होता है। इसी पदार्थ से मानव के नाखून, बाल बने होते हैं। पैंगोलिन के शल्क, मांस में औषधीय गुण होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। पैंगोलिन हरिद्वार से लेकर खटीमा तक के जंगलों में मिलता है।
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उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड ने कराया शोध
उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड ने इंडियन पैंगोलिन के अस्तित्व पर गहराते संकट को लेकर शोध कराया है। पैंगोलिन के बचाव के शोधकर्ता भास्कर भंडारी ने कई सुझाव दिए हैं। पैंगोलिन के शिकारियों पर सख्ती, शिकार करने वालों को कानून के तहत सजा दिलाने, शिकारियों की लगातार निगरानी, वनाग्नि से बचाने, इनके वास स्थलों को विकसित करने की जरूरत बताई है।
इंडियन पैंगोलिन को शिकार से बचाने के लिए शोध किया गया है। मुख्यालय की ओर से इसके संरक्षण के लिए सुझाव दिए गए हैं। सभी अधिकारियों को इस पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त, कुमाऊं