फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   संकटग्रस्त इंडियन पैंगोलिन को बचाएगा वन महकमा

संकटग्रस्त इंडियन पैंगोलिन को बचाएगा वन महकमा

Sun, 24 Mar 2019 02:19 AM IST
madan singh Madan Singh
Updated Sun, 24 Mar 2019 02:19 AM IST
विज्ञापन
संकटग्रस्त इंडियन पैंगोलिन को बचाएगा वन महकमा
Pangolin
हल्द्वानी। इंडियन पैंगोलिन (सल्लू सांप या चींटीखोर) को बचाने के लिए वन विभाग ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। विभाग ने पैंगोलिन के संरक्षण के शोध कराया है। शोध के आधार पर इनको बचाने के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई है।
विज्ञापन

तराई-भाबर के जंगलों में पैंगोलिन मिलते हैं। अंधविश्वास के कारण पैंगोलिन का शिकार किया जाता है। पैंगोलिन की खाल की चीन में दवाईयां बनाते हैं। इसके खाल से जैकेट, अंगूठी बनाकर भी लोग पहनते हैं। कुछ लोग नपुंसकता की दवा मानकर भी इसे खाते हैं। इसी कारण पैंगोलिन के वजूद पर संकट आ गया है। वन विभाग ने इसे संकटग्रस्त वन्यजीव माना है। पैंगोलिन का मुख्य भोजन पेड़, पौधों के दुश्मन दीपक और चीटियां हैं। इन दोनों को खाकर ही वह वनों के संरक्षण में मदद करता है।
विज्ञापन



संकटग्रस्त इंडियन पैंगोलिन को बचाएगा वन महकमा
उत्तराखंड जैवविविधता बोर्ड ने संरक्षण के लिए कराया शोध, सुरक्षा के लिए वन विभाग को जारी की गई एडवाइजरी


इंडियन पैंगोलिन की संरचना
पैंगोलिन करीब 10 से 16 किलो वजन वाला स्तनधारी प्राणी होता है। इसकी लंबाई 64 से लेकर 122 सेमी होती है। यह एकमात्र ऐसा स्तनधारी है, जिसका शरीर शल्क से ढका होता है। इसका शल्क कैराटिन नामक पदार्थ से बना होता है। इसी पदार्थ से मानव के नाखून, बाल बने होते हैं। पैंगोलिन के शल्क, मांस में औषधीय गुण होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। पैंगोलिन हरिद्वार से लेकर खटीमा तक के जंगलों में मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड ने कराया शोध
उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड ने इंडियन पैंगोलिन के अस्तित्व पर गहराते संकट को लेकर शोध कराया है। पैंगोलिन के बचाव के शोधकर्ता भास्कर भंडारी ने कई सुझाव दिए हैं। पैंगोलिन के शिकारियों पर सख्ती, शिकार करने वालों को कानून के तहत सजा दिलाने, शिकारियों की लगातार निगरानी, वनाग्नि से बचाने, इनके वास स्थलों को विकसित करने की जरूरत बताई है।


इंडियन पैंगोलिन को शिकार से बचाने के लिए शोध किया गया है। मुख्यालय की ओर से इसके संरक्षण के लिए सुझाव दिए गए हैं। सभी अधिकारियों को इस पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त, कुमाऊं
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed