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साढ़े 52 तोला चांदी खरीदने की हैसियत है तो जकात फर्ज
Updated Sat, 02 Jun 2018 02:39 AM IST
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ramjan
- फोटो : ramjan
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हल्द्वानी। जकात इस्लाम के पांच बुनियादी उसूलों में एक है, जो लोग साढ़े 52 तोला चांदी खरीदने की हैसियत रखते हैं उन पर जकात फर्ज है। उन्हें अपनी संपत्ति में से ढाई फीसदी हिस्सा गरीबों को दान करना होगा। ताकि उनकी जरूरतें भी पूरी हो सकें।
मस्जिद बंजारान में तकरीर-ए-जुमा में पेश इमाम मौलाना अब्दुल बासित ने लोगों को खिताब करते हुए जकात के मसायल पर रोशनी डाली। कहा साढ़े 52 तोला चांदी खरीदने की हैसियत रखने वाले लोग उन जरूरतमंदों को जकात दें, जो इतनी हैसियत नहीं रखते हैं। जकात के निसाब में रुपया, पैसा, सोना, चांदी, माले-तिजारत आदि को सम्मिलित किया जाएगा। कुरान पाक में बार-बार नमाज पढ़ने और जकात अदा करने की ताकीद की गई है। जकात अदा करने से माल पाक हो जाता है और उसमें बरकत होती है। परवरदिगार उस माल की हिफाजत करता है। जकात साल में कभी भी दी जा सकती है। जकात पर सबसे पहले रिश्तेदार फिर पड़ोसी और उसके बाद आसपास के गरीबों का हक होता है।
- साल में ढाई फीसदी गरीबों को दान देना जरूरी
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मस्जिद बंजारान में तकरीर-ए-जुमा में पेश इमाम मौलाना अब्दुल बासित ने लोगों को खिताब करते हुए जकात के मसायल पर रोशनी डाली। कहा साढ़े 52 तोला चांदी खरीदने की हैसियत रखने वाले लोग उन जरूरतमंदों को जकात दें, जो इतनी हैसियत नहीं रखते हैं। जकात के निसाब में रुपया, पैसा, सोना, चांदी, माले-तिजारत आदि को सम्मिलित किया जाएगा। कुरान पाक में बार-बार नमाज पढ़ने और जकात अदा करने की ताकीद की गई है। जकात अदा करने से माल पाक हो जाता है और उसमें बरकत होती है। परवरदिगार उस माल की हिफाजत करता है। जकात साल में कभी भी दी जा सकती है। जकात पर सबसे पहले रिश्तेदार फिर पड़ोसी और उसके बाद आसपास के गरीबों का हक होता है।
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- साल में ढाई फीसदी गरीबों को दान देना जरूरी