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अब और करीब से चीन सीमा पर निगरानी होगी
गोपेश्वर/प्रमोद सेमवाल
Updated Wed, 19 Dec 2012 01:00 AM IST
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भारतीय सेना चीन की सीमा के बिलकुल करीब डटने वाली है। सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील चमोली जिले में जोशीमठ से मलारी तक सेना की एक ब्रिगेड तैनात की जाएगी। इसके लिए फौज व्यापक तैयारियां कर रही है। यहां से चीन की आसमानी सीमा करीब पांच किलोमीटर दूर है। हालांकि रणनीतिक रूप से बेहद अहम कदम के बारे में यहां तैनात सेना के अफसर कुछ बोलने से बच रहे हैं।
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जोशीमठ क्षेत्र में ही उर्गम, औली, बड़गांव और डाक क्षेत्र में सेना के लिए भूमि चयन का कार्य शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक सभी स्थानों को मिलाकर सेना ने पांच हजार नाली भूमि का चयन किया है जिसका खाका तैयार कर केंद्र सरकार को सौंप दिया गया है।
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उर्गम क्षेत्र में सेना की एक ब्रिगेड शिफ्ट करने की योजना है। यहां के नंदी कुंड से चीन सीमा मात्र पांच किमी की हवाई दूरी पर स्थित है जबकि करीब 18 किमी की पैदल दूरी तय कर सीमा पर पहुंचा जा सकता है। इसके लिए 14 सौ हेक्टेयर भूमि का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण हो गया है। इन दिनों सेना की सहूलियत का ध्यान रखते हुए काटने के लिए करीब 30 हजार पेड़ों पर निशान लगाए जा रहे हैं जिसका कुछ स्थानीय लोग विरोध भी कर रहे हैं।
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मालूम हो कि 20 अक्तूबर 1962 को भारत-चीन के बीच शुरू हुआ युद्ध करीब एक माह चला था। इसी दौरान जोशीमठ में ब्रिगेड और मलारी में सेना चौकियां स्थापित की गईं थीं। वर्ष 2000 में भारत-चीन के बीच हुए समझौते में बार्डर एरिया में सेना को सीमा से 50 किमी पीछे रखने पर सहमति बनी थी। समझौते की अवधि इसी साल अक्तूबर में खत्म हो गई।
पहले पुलिस चौकी थी उर्गम में
वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान संदिग्धों पर नजर रखने के लिए उर्गम में पुलिस चौकी स्थापित की गई। यहां आने-जाने वालों की गहन जांच-पड़ताल के बाद ही उन्हें गंतव्य तक जाने की अनुमति दी जाती थी लेकिन किसी मामले को लेकर ग्रामीणों के साथ पुलिस का विवाद हो गया था जिससे यहां चौकी हटानी पड़ी थी।
सेना जोशीमठ क्षेत्र में भूमि तलाश रही है। उर्गम क्षेत्र में पेड़ों के कटान का मामला मेरे संज्ञान में है। लेकिन किसी ग्रामीण ने आपत्ति दर्ज नहीं की है।
- एसए मुरुगेशन, डीएम, चमोली।