कार्रवाई से बागियों में हलचल, सोशल मीडिया पर रख रहे अपना पक्ष
- विरोध कांग्रेस के खिलाफ न होकर मुख्यमंत्री के खिलाफ दर्शाने की कोशिश
- दल बदल पर बागी कांग्रेस खेमे में हलचल
- अमृता रावत और शैलारानी ने जारी किए खुले पत्र
- कुछ विधायक सोशल साइट पर रख रहे अपनी बात
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दल बदल कानून के तहत की जा रही कार्रवाई से कांग्रेस के बागी विधायकों में भी हलचल है। अज्ञातवास कर रहे कांग्रेस के बागी विधायक किसी न किसी तरह से अपना स्पष्टीकरण भी लोगों के बीच में पहुंचाने की कोशिश में हैं।
रामनगर विधायक अमृता रावत और केदारनाथ विधायक शैलारानी रावत की ओर से बाकायदा पत्र जारी किया गया है। अन्य कुछ विधायक हैं, जो सोशल मीडिया के जरिये अपने पक्ष को सामने रखने की कोशिश में जुटे हैं।
18 मार्च को सदन में कांग्रेस के नौ विधायकों ने कांग्रेस से बगावत की थी। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह सहित ये नौ विधायक भाजपा विधायकों के साथ राजभवन भी पहुंचे थे। इसके बाद दिल्ली कूच कर गए थे।
इस सियासी संकट की तोड़ के लिए कांग्रेस ने बागी विधायकों के खिलाफ दल बदल कानून के तहत नोटिस जारी किया है। कांग्रेस का यह पलटवार सफल होता है तो नौ विधायकों को अपनी सदस्यता से हाथ धोना पड़ सकता है।
बागियों में सबसे कमजोर कड़ी शैलारानी तो मजबूत अमृता
बागी विधायकों के खेमे को देखें तो अमृता रावत को सबसे मजबूत कड़ी और शैलारानी रावत को सबसे कमजोर कड़ी माना जा रहा है। अमृता रावत अपना मंत्री पद पहले ही गंवा चुकी हैं।
वह सतपाल महाराज के समीकरणों के चलते पहले से ही रडार पर थीं। लिहाजा अमृता के खुले पत्र को दल बदल कानून के तहत कार्यवाही से बचने के रूप में देखा जा रहा है। शैला के स्पष्टीकरण को भी दल बदल कानून के तहत सदस्यता बचाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
दो विधायकों ने जारी किया खुला पत्र
ऐसे में अब बागी विधायकों में भी हलचल है। दो विधायकों ने अब बाकायदा खुला पत्र जारी कर कहा है कि उनके क्षेत्रों में कोई काम नहीं हो रहे थे। मुख्यमंत्री हरीश रावत की उपेक्षा के चलते उनके क्षेत्र के लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा था।
ऐसे में क्षेत्र हित को देखते हुए उन्होंने सरकार के खिलाफ यह कदम उठाया है। अमृता रावत ने तो बाकायदा 15 मार्च को मुख्य सचिव को लिखे पत्र का हवाला दिया है। इस पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी शासनादेश जारी नहीं हो रहे हैं।
शैलारानी के पत्र में कहा गया है कि केदारनाथ क्षेत्र में कोई काम नहीं हो रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक की मांग को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। बागी विधायकों का सुर अब बगावत कांग्रेस के खिलाफ न होकर मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ हैं।