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जल प्रलय के बाद अब सरकारी सुस्ती की आपदा

Fri, 29 Nov 2013 09:34 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 29 Nov 2013 09:34 AM IST
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labour did not get wages

आपदा के बाद केदारनाथ के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने वाले को आज तक मजदूरी नहीं मिली।

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यह हाल तब है जबकि मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने घोषणा की थी कि जोखिमभरा काम होने के कारण केदारनाथ वैकल्पिक मार्ग बनाने वालों को तीन गुना ज्यादा भुगतान होगा।
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एक पाई भी नहीं मिल पाई
इसके बाद नेपाली और अन्य मजदूरों ने ये काम किया भी, पर अब तक उन्हें एक पाई नहीं मिल पाई है। केदारनाथ का वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के लिए करीब 300 मजदूरों ने रोज काम किया था। हाल ये है कि केवल केदारनाथ में ही हुए काम की प्रशासन पर साढ़े चार करोड़ की देनदारी है।
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इसमें वैकल्पिक मार्ग खोलने वाले मजदूर भी शामिल हैं। उक्त धनराशि समेत केदारनाथ पीडब्लूडी डिवीजन की आठ करोड़ से ज्यादा की देनदारी शेष है। आपदा के वक्त शासन-प्रशासन के कहने पर जिन निजी कंपनियों या ठेकेदारों ने पुनर्निर्माण का काम किया, उन्हें भुगतान नहीं किया जा सका है।

बताया गया है कि जिलाधिकारियों को अब तक मुआवजे के अलावा कोई धनराशि नहीं मिली है। कहा जा रहा है कि इस लापरवाही के लिए शासन में बैठे कुछ बड़े नौकरशाह जिम्मेदार हैं। सूत्र बताते हैं कि मोटे भुगतान वाली फाइलों के मामले में भी खेल चल रहा है।

फिलहाल, आपदा के लगभग पांच माह बाद भी पुनर्निर्माण के कार्यों का भुगतान न किए जाने को लेकर नौकरशाही चुप है।

मुख्यमंत्री के गांव में पांच माह से नहीं बंटा राशन

बहुगुणा सरकार ने जोर-शोर से खाद्य सुरक्षा योजना पर अमल की उपलब्धि का ढोल पूरे प्रदेश में पीटा। सीएम के गांव में ही तस्वीर इसके उलट है। बुघाणी मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का पैतृक गांव है। इस गांव में पांच माह से राशन नहीं बंटा है।


इसके अलावा क्षेत्र के भैंसकोट, देवलगढ़, मुंडोली, कोल्ठा गांवों में भी सरकारी राशन नहीं मिल रहा। इन गांवों में बहुत से बीपीएल कार्डधारक रहते हैं। क्षेत्रवासी रमेश मंद्रवाल बताते हैं कि ग्रामीण मंहगे दामों पर बाजार से अनाज खरीदने के लिए मजबूर हैं।

लोगों में सरकार के प्रति लोगों में कितना गुस्सा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई लोग जल्द राशन मुहैया न कराने की सूरत में आंदोलन तक की चेतावनी दे रहे हैं। बुघाणी के विकास उनियाल बीपीएल कार्ड धारक हैं।

महंगे दाम पर राशन खरीदना पड़ रहा
बताते हैं कि बाजार से महंगे दाम पर राशन खरीदना पड़ रहा है। बुघाणी के ही रवि राणा बताते हैं सरकारी राशन नहीं मिलने से दिक्कत हो रही है।

वहीं टकोली निवासी दिनेश नौडियाल मजदूर हैं। बीपीएल कार्ड धारक हैं। पांच माह से सरकारी राशन नहीं मिलने से परिवार के सामने विकट स्थिति आ गई है।

प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी यही स्थिति है। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल भी कह चुके हैं कि अल्मोड़ा के धौलादेवी विकासखंड में तीन माह से राशन नहीं बंट रहा है। हाल यह है कि रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और बागेश्वर में तो खाद्य आपूर्ति अफसर ही नहीं हैं।

खाद्य आपूर्ति विभाग में अफसरों की कमी है। जल्द ही नए रिक्रूट मिलने वाले हैं, उनसे कुछ राहत मिलेगी।
- राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव खाद्य एवं आपूर्ति विभाग

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