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लालढांग मार्ग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे मजबूत पक्ष: सुबोध उनियाल
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वन मंत्री सुबोध उनियाल ने विधानसभा अध्यक्ष व क्षेत्रीय विधायक ऋतु खंडूड़ी के साथ लालढांग-चिलरखाल मार्ग व कण्वाश्रम रेस्क्यू सेंटर का संयुक्त निरीक्षण कर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। वन मंत्री ने कण्वाश्रम में जीएमवीएन के गेस्ट हाउस में वन अधिकारियों के साथ बैठक की और दोनों विषयों पर गंभीरता से मंथन किया। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि लालढांग मार्ग के बारे में सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पक्ष रखा जाएगा।
बैठक में वन मंत्री सुबोध उनियाल को वन अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की ओर से लालढांग मार्ग निर्माण पर रोक लगाई गई है। इस मसले पर 12 जुलाई को सुनवाई होनी है। मंत्री ने कहा कि मामले में राज्य की ओर से प्रभावी पैरवी की जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने वन विभाग की ओर से आ रही अड़चनों को दूर करने का रास्ता निकलने को कहा। कहा कि लालढांग चिलरखाल मार्ग का बनना कोटद्वार वासियों के लिए बेहद जरूरी है। अभी स्थानीय जनता को देहरादून जाने के लिए यूपी से होकर जाना पड़ता है। विधानसभा अध्यक्ष ने कण्वाश्रम रेस्क्यू सेंटर को पूरा बनाने और उसको भव्य रूप देने को कहा। उन्होंने कोटद्वार में जंगल सफारी खोलने की बात कही ताकि स्थानीय लोगो को रोजगार मिल सके। बैठक में प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड अनूप मालिक, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिन्हा, मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल नरेश कुमार, निदेशक राजाजी पार्क साकेत बडोला, निदेशक कॉर्बेट धीरज पांडे, वन संरक्षक शिवालिक राजीव धीमान, डीएफओ लैंसडौन दिनकर तिवाड़ी, डीएफओ कालागढ़ आशुतोष सिंह, एडीएम इलागिरी व एसडीएम कोटद्वार प्रमोद कुमार मौजूद रहे।
कोई भी सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष को नहीं रोक सकती : सुबोध
पत्रकार वार्ता में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बाघ और गुलदार अगर गांवों में धमक रहे हैं तो इसका कारण लोग स्वयं हैं। लोग अपना बचा हुआ खाना घर के बाहर फेंक रहे हैं। बाघ और गुलदार को इस खाने की लत लग जाती है और वह बार-बार गांव की ओर आते हैं। कोई भी सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष को नहीं रोक सकती। इसके लिए लोगों को खुद ही जागरूक होकर जंगली जानवरों से बचना होगा। लोगों को गांव में उगी झाड़ियों को काटना होगा, बचा हुआ खाना बाहर नहीं फेंकना होगा, गांव के आसपास कूड़े का ढेर न बनाएं व गांव में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी करनी होगी। कहा कि वन्यजीव संघर्ष और नुकसान के मुआवजे के लिए नौ करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। शीघ्र डीएफओ कार्यालय के माध्यम से लोगों को मुआवजा दिया जाएगा।
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बैठक में वन मंत्री सुबोध उनियाल को वन अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की ओर से लालढांग मार्ग निर्माण पर रोक लगाई गई है। इस मसले पर 12 जुलाई को सुनवाई होनी है। मंत्री ने कहा कि मामले में राज्य की ओर से प्रभावी पैरवी की जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने वन विभाग की ओर से आ रही अड़चनों को दूर करने का रास्ता निकलने को कहा। कहा कि लालढांग चिलरखाल मार्ग का बनना कोटद्वार वासियों के लिए बेहद जरूरी है। अभी स्थानीय जनता को देहरादून जाने के लिए यूपी से होकर जाना पड़ता है। विधानसभा अध्यक्ष ने कण्वाश्रम रेस्क्यू सेंटर को पूरा बनाने और उसको भव्य रूप देने को कहा। उन्होंने कोटद्वार में जंगल सफारी खोलने की बात कही ताकि स्थानीय लोगो को रोजगार मिल सके। बैठक में प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड अनूप मालिक, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिन्हा, मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल नरेश कुमार, निदेशक राजाजी पार्क साकेत बडोला, निदेशक कॉर्बेट धीरज पांडे, वन संरक्षक शिवालिक राजीव धीमान, डीएफओ लैंसडौन दिनकर तिवाड़ी, डीएफओ कालागढ़ आशुतोष सिंह, एडीएम इलागिरी व एसडीएम कोटद्वार प्रमोद कुमार मौजूद रहे।
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कोई भी सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष को नहीं रोक सकती : सुबोध
पत्रकार वार्ता में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बाघ और गुलदार अगर गांवों में धमक रहे हैं तो इसका कारण लोग स्वयं हैं। लोग अपना बचा हुआ खाना घर के बाहर फेंक रहे हैं। बाघ और गुलदार को इस खाने की लत लग जाती है और वह बार-बार गांव की ओर आते हैं। कोई भी सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष को नहीं रोक सकती। इसके लिए लोगों को खुद ही जागरूक होकर जंगली जानवरों से बचना होगा। लोगों को गांव में उगी झाड़ियों को काटना होगा, बचा हुआ खाना बाहर नहीं फेंकना होगा, गांव के आसपास कूड़े का ढेर न बनाएं व गांव में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी करनी होगी। कहा कि वन्यजीव संघर्ष और नुकसान के मुआवजे के लिए नौ करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। शीघ्र डीएफओ कार्यालय के माध्यम से लोगों को मुआवजा दिया जाएगा।
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