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पूर्व सैनिक करेंगे वन्य जीवों की सुरक्षा
ब्यूरो/अमर उजाला काोटद्वार
Updated Sun, 15 Jan 2017 10:43 PM IST
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वन्यजीव
- फोटो : अमर उजाला
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कोटद्वार। कोल्हूचौड़ प्रकरण के बाद अब लैंसडौन वन विभाग अपने 43327.60 हेक्टेयर में फैले जंगल के प्रति सतर्क हो गया है। विभाग ने वनों पर आम आदमी के जाने पर पाबंदी लगाने के साथ ही सर्दियों में कोहरे की आड़ में वन तस्करों के इरादों पर नकेल कसने के लिए अपने कर्मचारियों के साथ पूर्व सैनिकों को भी तैनात किया है।
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31 दिसंबर को उद्योगपति समीर थापर द्वारा वन कानूनों की अनदेखी कर जंगल में हथियार ले जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई और डीएफओ मयंक शेखर झा के निलंबन के बाद अब वन विभाग हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है। सर्दियों में कोहरे के कारण जंगल में तस्करों के घुसने से वन्यजीवों और वन्य संपदा को नुकसान पहुंचाने का खतरा रहता है। इसके तहत सुरक्षा के लिए खास उपाय किए जा रहे हैं। स्वयं डीएफओ हर रेंज के जंगलों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं।
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वन्य जीवों की सुरक्षा करेंगे 14 पूर्व सैनिक
लैंसडौन वन प्रभाग ने कैंपा योजना के तहत उपनल के माध्यम से 14 पूर्व सैनिकों को वन्यजीवों की रक्षा में लगाया है। सर्दियों में वनों की चौकसी के लिए इनकी तैनाती जनवरी से मार्च तक लगाई गई है। आला अधिकारियों की मानें तो पूर्व सैनिकों को हाथी और टाइगर बाहुल्य क्षेत्रों में उनकी सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा।
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वनों में जाने पर लगी पाबंदी
वन प्रभाग ने बिना इजाजत जंगलों में जाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए जंगल के किनारे सूचना पट लगाए हैं। इसके तहत जंगल में बिना इजाजत जाने पर वन कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। एसडीओ कोटद्वार गिरीश चंद्र बेलवाल ने बताया कि लोग जंगल में घुसकर वहां पिकनिक मनाते हैं, वहां गंदगी फैलाते हैं, कई बार धूम्रपान करने की वजह से वनों में आग भी लग जाती है। अब जंगलों में घुसने पर पाबंदी लगाई गई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
जंगल में वन्य जीवों और वन संपदा की रक्षा के लिए कर्मचारियों को सचेत रहने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए वे स्वयं विभिन्न रेंजों के जंगल का भ्रमण कर रहे हैं। औचक निरीक्षण भी किए जा रहे हैं। जंगल की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
- अंजनी कुमार त्रिपाठी, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग
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