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Kotdwar News: लड्वासैंण में वृद्ध को मारने वाला बाघ कंडलसेरा गांव में हुआ ट्रैंकुलाइज
Tue, 04 Jul 2023 05:32 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 04 Jul 2023 05:32 PM IST
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वन विभाग की टीम ने पिंजरे में डालकर कार्बेट पार्क भेजा
करीब डेढ़ साल की है मादा बाघा
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। रिखणीखाल ब्लाॅक के डल्ला गांव के लड्वासैंण में वृद्ध को मारने वाले दूसरे बाघ को वन विभाग ने कंडलसेरा गांव में ट्रैंकुलाइज कर पिंजरे में कैद कर लिया है। वन विभाग की टीम बाघ को पिंजरे में डालकर कार्बेट नेशनल पार्क के रेस्क्यू सेंटर में ले गई है। यह मादा बाघ है जिसकी उम्र करीब डेढ़ साल है।
ग्राम पंचायत मेलधार के प्रधान खुशेंद्र सिंह ने बताया कि विगत सप्ताह से बाघ की गतिविधि गाड़ियूंपुल और इसके आसपास के गांवों में बनी हुई थी। तब से वन विभाग की ट्रैंकुलाइज टीम ने गाड़ियूंपुल में डेरा डाला हुआ था। रविवार शाम को जुई गांव में दिखने के बाद सोमवार सुबह बाघ कंडलसेरा गांव में दिखाई दी। सूचना पर ट्रैंकुलाइज टीम कंडलसेरा गांव पहुंची। दोपहर 2:30 बजे बाघ ने एक गाय को मार डाला और उसे घसीटते हुए झाड़ियों में ले गया। तभी से ट्रैंकुलाइज टीम बाघ की गतिविधि पर नजर बनाए हुए थी। बाघ के वहा से जाने के बाद वनकर्मी मृत गाय को झाड़ियों से निकालकर धोतिया मंदिर के पास एक खेत में ले लाए। शाम सात बजे बाघ जैसे ही गाय को खाने के लिए दोबारा लौटा तो टीम ने बाघ पर निशाना साधा और उसे ट्रैंकुलाइज कर लिया। टीम में नैनीताल चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. हिमांशु पांगती और डॉ. आरएस उनियाल शामिल रहे। इससे पहले विगत 26 अप्रैल को इसी टीम ने जुई गांव में पहले वाले बाघ को ट्रैंकुलाइज किया था। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने कहा कि कंडलसेरा गांव में दिखे बाघ को ट्रैंकुलाइज कर लिया गया है। इसी बाघ ने लड्वासैंण में वृद्ध को मारा था। बाघ को कार्बेट नेशनल पार्क के रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया है।
13 अप्रैल से दहशत के बीच जी रहे ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
पिछले ढाई माह से बाघ की दहशत के बीच रह रहे रिखणीखाल ब्लाॅक के ग्राम पंचायत मेलधार, जुई और द्वारी के करीब 12 गांवों के ग्रामीणों ने बाघ के ट्रैंकुलाइज होने के बाद राहत की सांस ली। ग्राम पंचायत मेलधार के प्रधान खुशेंद्र सिंह ने बताया कि गत 13 अप्रैल को लड्वासैंण में बाघ की ओर से वृद्ध बीरेंद्र सिंह (75) को मारने के बाद से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई थी। कई गांवों में लोगों ने बाघ की दहशत के कारण खेतीबाड़ी करना तक छोड़ दिया था और लोग बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे थे। कई दिनों तक बाघ दिखाई नहीं दिया लेकिन बीते दो सप्ताह से यह क्षेत्र में सक्रिय था। अब दोनों बाघ ट्रैंकुलाइज कर लिए गए हैं।
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करीब डेढ़ साल की है मादा बाघा
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। रिखणीखाल ब्लाॅक के डल्ला गांव के लड्वासैंण में वृद्ध को मारने वाले दूसरे बाघ को वन विभाग ने कंडलसेरा गांव में ट्रैंकुलाइज कर पिंजरे में कैद कर लिया है। वन विभाग की टीम बाघ को पिंजरे में डालकर कार्बेट नेशनल पार्क के रेस्क्यू सेंटर में ले गई है। यह मादा बाघ है जिसकी उम्र करीब डेढ़ साल है।
ग्राम पंचायत मेलधार के प्रधान खुशेंद्र सिंह ने बताया कि विगत सप्ताह से बाघ की गतिविधि गाड़ियूंपुल और इसके आसपास के गांवों में बनी हुई थी। तब से वन विभाग की ट्रैंकुलाइज टीम ने गाड़ियूंपुल में डेरा डाला हुआ था। रविवार शाम को जुई गांव में दिखने के बाद सोमवार सुबह बाघ कंडलसेरा गांव में दिखाई दी। सूचना पर ट्रैंकुलाइज टीम कंडलसेरा गांव पहुंची। दोपहर 2:30 बजे बाघ ने एक गाय को मार डाला और उसे घसीटते हुए झाड़ियों में ले गया। तभी से ट्रैंकुलाइज टीम बाघ की गतिविधि पर नजर बनाए हुए थी। बाघ के वहा से जाने के बाद वनकर्मी मृत गाय को झाड़ियों से निकालकर धोतिया मंदिर के पास एक खेत में ले लाए। शाम सात बजे बाघ जैसे ही गाय को खाने के लिए दोबारा लौटा तो टीम ने बाघ पर निशाना साधा और उसे ट्रैंकुलाइज कर लिया। टीम में नैनीताल चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. हिमांशु पांगती और डॉ. आरएस उनियाल शामिल रहे। इससे पहले विगत 26 अप्रैल को इसी टीम ने जुई गांव में पहले वाले बाघ को ट्रैंकुलाइज किया था। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने कहा कि कंडलसेरा गांव में दिखे बाघ को ट्रैंकुलाइज कर लिया गया है। इसी बाघ ने लड्वासैंण में वृद्ध को मारा था। बाघ को कार्बेट नेशनल पार्क के रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया है।
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13 अप्रैल से दहशत के बीच जी रहे ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
पिछले ढाई माह से बाघ की दहशत के बीच रह रहे रिखणीखाल ब्लाॅक के ग्राम पंचायत मेलधार, जुई और द्वारी के करीब 12 गांवों के ग्रामीणों ने बाघ के ट्रैंकुलाइज होने के बाद राहत की सांस ली। ग्राम पंचायत मेलधार के प्रधान खुशेंद्र सिंह ने बताया कि गत 13 अप्रैल को लड्वासैंण में बाघ की ओर से वृद्ध बीरेंद्र सिंह (75) को मारने के बाद से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई थी। कई गांवों में लोगों ने बाघ की दहशत के कारण खेतीबाड़ी करना तक छोड़ दिया था और लोग बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे थे। कई दिनों तक बाघ दिखाई नहीं दिया लेकिन बीते दो सप्ताह से यह क्षेत्र में सक्रिय था। अब दोनों बाघ ट्रैंकुलाइज कर लिए गए हैं।
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