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जीआईसी जयहरीखाल के ताले तोड़ने के बाद भी नहीं हुआ मूल भवन में विद्यालय का संचालन शुरू
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जीआईसी के मुख्य भवन जी-ब्लाक के ताले टूटने के बाद भी बृहस्पतिवार को विद्यालय का संचालन यहां नहीं हो पाया। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि उच्चाधिकारियों के अनुमोदन के बाद ही भवन में संचालन शुरू होगा। कार्यदायी संस्था ने निर्माणाधीन भवन के ताले तोड़ने पर आपत्ति जताई है। संस्था ने विद्यालय प्रबंधन को पत्र सौंपकर निर्माण सामाग्री के चोरी होने की आशंका जताई है।
बुधवार को लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत के नेतृत्व में आंदोलनरत ग्रामीणों ने जीआईसी जयहरीखाल के मुख्य भवन जी-ब्लाक के ताले तोड़ दिए थे। विधायक दिलीप रावत ने प्रभारी प्रधानाचार्य चंद्रमोहन नेगी को मुख्य भवन में विद्यालय संचालित करने के निर्देश दिए थे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। प्रभारी प्रधानाचार्य चंद्रमोहन सिंह नेगी ने बताया कि उच्चाधिकारियों के अनुमोदन के बाद ही विद्यालय को मूल भवन में शिफ्ट किया जाएगा।
कार्यदायी संस्था एचएस कांट्रेक्ट नई दिल्ली के साइड इंजीनियर अनिल यादव ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल में विद्यालय को आवासीय विद्यालय बनाने की घोषणा हुई थी। हंस फाउंडेशन और सरकार के बीच एमओयू साइन हुआ था। कार्यदायी संस्था की ओर से करीब 80 फीसदी काम हो चुका है। लाइट टेस्टिंग, ड्रेनेज आदि कार्य कराए जाने अवशेष हैं। शासन से बजट आवंटित न होने के कारण पिछले डेढ़ साल से निर्माण कार्य रुका है। .
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जीआईसी को मूल भवन में शिफ्ट करने की मांग को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों का जयहरीखाल बाजार में चल रहा अनशन बृहस्पतिवार को 40वें दिन भी जारी रहा। इसमें समिति के अध्यक्ष राजीव धस्माना, पदम राज, रणजीत सिंह रौतेला, बसंत सुंद्रियाल, विकास बड़थ्वाल, प्रवीन कुकशाल, विनय कुकशाल, शिवचरण सिंह रावत और रूप चंद शामिल रहे।
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बुधवार को लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत के नेतृत्व में आंदोलनरत ग्रामीणों ने जीआईसी जयहरीखाल के मुख्य भवन जी-ब्लाक के ताले तोड़ दिए थे। विधायक दिलीप रावत ने प्रभारी प्रधानाचार्य चंद्रमोहन नेगी को मुख्य भवन में विद्यालय संचालित करने के निर्देश दिए थे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। प्रभारी प्रधानाचार्य चंद्रमोहन सिंह नेगी ने बताया कि उच्चाधिकारियों के अनुमोदन के बाद ही विद्यालय को मूल भवन में शिफ्ट किया जाएगा।
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कार्यदायी संस्था एचएस कांट्रेक्ट नई दिल्ली के साइड इंजीनियर अनिल यादव ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल में विद्यालय को आवासीय विद्यालय बनाने की घोषणा हुई थी। हंस फाउंडेशन और सरकार के बीच एमओयू साइन हुआ था। कार्यदायी संस्था की ओर से करीब 80 फीसदी काम हो चुका है। लाइट टेस्टिंग, ड्रेनेज आदि कार्य कराए जाने अवशेष हैं। शासन से बजट आवंटित न होने के कारण पिछले डेढ़ साल से निर्माण कार्य रुका है। .
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जीआईसी को मूल भवन में शिफ्ट करने की मांग को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों का जयहरीखाल बाजार में चल रहा अनशन बृहस्पतिवार को 40वें दिन भी जारी रहा। इसमें समिति के अध्यक्ष राजीव धस्माना, पदम राज, रणजीत सिंह रौतेला, बसंत सुंद्रियाल, विकास बड़थ्वाल, प्रवीन कुकशाल, विनय कुकशाल, शिवचरण सिंह रावत और रूप चंद शामिल रहे।