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Kotdwar News: साबित नहीं हो सका फर्जी आरसी से आरोपियों को जमानत दिलाने का आरोप
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कोटद्वार। मोटरसाइकिल की फर्जी आरसी तैयार कर विभिन्न मुकदमों में आरोपियों को जमानत दिलाने के आरोप में दाखिल फौजदारी निगरानी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) कोटद्वार रजनी शुक्ला की अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने निचली अदालत के 25 अक्तूबर 2025 के आदेश को सही ठहराते हुए निगरानी निरस्त करने के आदेश दिए हैं।
मामले में लकड़ी पड़ाव निवासी अशरफ ने आरोप लगाया था कि आरोपी आसिफ के पास मोटरसाइकिल सुपर स्प्लेंडर संख्या यूके-15 बी-4385 है। आरोप था कि इस वाहन की आरसी की सात से दस फर्जी प्रतियां तैयार कर विभिन्न मुकदमों में आरोपियों की जमानत के लिए इस्तेमाल की गईं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि उसके खिलाफ चल रहे मुकदमों में इसी आरसी का इस्तेमाल कर उसे जमानत दिलाई गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे मामले की जानकारी होने के बाद उसने 24 अक्तूबर 2024 को कोटद्वार थाने और डाक के माध्यम से कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया। पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी, एसएसपी व एआरटीओ को भी शिकायत भेजी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। मामला निचली अदालत में पहुंचा, जहां 25 अक्तूबर 2025 को प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया गया।
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इसके खिलाफ अशरफ ने एडीजे कोर्ट में फौजदारी निगरानी दाखिल की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वाहन की आरसी के फर्जी इस्तेमाल को साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।
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मामले में लकड़ी पड़ाव निवासी अशरफ ने आरोप लगाया था कि आरोपी आसिफ के पास मोटरसाइकिल सुपर स्प्लेंडर संख्या यूके-15 बी-4385 है। आरोप था कि इस वाहन की आरसी की सात से दस फर्जी प्रतियां तैयार कर विभिन्न मुकदमों में आरोपियों की जमानत के लिए इस्तेमाल की गईं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि उसके खिलाफ चल रहे मुकदमों में इसी आरसी का इस्तेमाल कर उसे जमानत दिलाई गई।
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शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे मामले की जानकारी होने के बाद उसने 24 अक्तूबर 2024 को कोटद्वार थाने और डाक के माध्यम से कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया। पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी, एसएसपी व एआरटीओ को भी शिकायत भेजी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। मामला निचली अदालत में पहुंचा, जहां 25 अक्तूबर 2025 को प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया गया।
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इसके खिलाफ अशरफ ने एडीजे कोर्ट में फौजदारी निगरानी दाखिल की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वाहन की आरसी के फर्जी इस्तेमाल को साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।