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Kotdwar News: वीरान पड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के आवास होने लगे जर्जर
Wed, 06 May 2026 06:45 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Wed, 06 May 2026 06:45 PM IST
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सुविधाओं का टोटा, ब्लॉक मुख्यालय पर बने आवासों में नहीं रहते अधिकारी और कर्मचारी
दुगड्डा (कोटद्वार)। विकासखंड दुगड्डा मुख्यालय पर बने अधिकारियों-कर्मचारियों के बंद पड़े आवास देखभाल के अभाव में जर्जर हो चुके हैं। दरअसल सुविधाओं के अभाव में अधिकारी और कर्मचारी इन आवासों में नहीं रुकते हैं।
विकासखंड दुगड्डा की स्थापना 1962 में नगर पालिका क्षेत्र के बहेड़ी (वर्तमान में कमला नेहरू वार्ड) में हुई थी। ब्लाॅक मुख्यालय के निकट अतिक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए सेना ने अपनी भूमि की सुरक्षा के लिए पक्की घेरबाड़ कर दी थी जिससे ब्लॉक में संचालित होने वाले पंचायत चुनाव के नामांकन, गणना व अन्य गतिविधियां प्रभावित होने लगीं।
1997 में तत्कालीन जिलाधिकारी पीके सारंगी के निर्देश पर साझासैंण की करीब 32 नाली कृषि भूमि चयनित की गई थी। भूमि को क्रय कर 2005-06 में नए ब्लॉक मुख्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। इसमें बीडीओ आवास बनाने के साथ ही कर्मचारियों के लिए भी आवासीय भवनों का निर्माण कराया गया था। उनका प्रतिवर्ष रखरखाव तक नहीं किया गया। अब भवन जर्जर होने के कारण दरकने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
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ब्लाॅक के एबीडीओ राकेश ध्यानी ने बताया कि जंगल के बीच स्थित ब्लाॅक मुख्यालय में मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं होने से परेशानी होती है। बिजली के अभाव में अधिकांश कार्य ठप हो जाते हैं। वन्यजीवों का खतरा बना रहता है। सोलर फेंसिंग की आवश्यकता और मोबाइल टावर की स्थापना जरूरी है।
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दुगड्डा (कोटद्वार)। विकासखंड दुगड्डा मुख्यालय पर बने अधिकारियों-कर्मचारियों के बंद पड़े आवास देखभाल के अभाव में जर्जर हो चुके हैं। दरअसल सुविधाओं के अभाव में अधिकारी और कर्मचारी इन आवासों में नहीं रुकते हैं।
विकासखंड दुगड्डा की स्थापना 1962 में नगर पालिका क्षेत्र के बहेड़ी (वर्तमान में कमला नेहरू वार्ड) में हुई थी। ब्लाॅक मुख्यालय के निकट अतिक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए सेना ने अपनी भूमि की सुरक्षा के लिए पक्की घेरबाड़ कर दी थी जिससे ब्लॉक में संचालित होने वाले पंचायत चुनाव के नामांकन, गणना व अन्य गतिविधियां प्रभावित होने लगीं।
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1997 में तत्कालीन जिलाधिकारी पीके सारंगी के निर्देश पर साझासैंण की करीब 32 नाली कृषि भूमि चयनित की गई थी। भूमि को क्रय कर 2005-06 में नए ब्लॉक मुख्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। इसमें बीडीओ आवास बनाने के साथ ही कर्मचारियों के लिए भी आवासीय भवनों का निर्माण कराया गया था। उनका प्रतिवर्ष रखरखाव तक नहीं किया गया। अब भवन जर्जर होने के कारण दरकने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
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ब्लाॅक के एबीडीओ राकेश ध्यानी ने बताया कि जंगल के बीच स्थित ब्लाॅक मुख्यालय में मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं होने से परेशानी होती है। बिजली के अभाव में अधिकांश कार्य ठप हो जाते हैं। वन्यजीवों का खतरा बना रहता है। सोलर फेंसिंग की आवश्यकता और मोबाइल टावर की स्थापना जरूरी है।