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पीजी करने वाले छात्र मेडिकल कालेजों में देंगे सेवाएं
ब्यूरो/अमर उजाला श्रीनगर
Updated Mon, 29 Aug 2016 11:01 PM IST
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प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों से परास्नातक (एमएस, एमडी या डिप्लोमा) करने वाले छात्र-छात्राएं अब एक साल तक मेडिकल कालेज में सीनियर रेजीडेंट (एसआर) चिकित्सक के रुप में सेवाएं देेंगे। शासन के इस निर्णय से मेडिकल कालेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर होगी। साथ ही नवप्रशिक्षित चिकित्सकों को वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ काम करने का अनुभव मिलेगा।
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वर्तमान में उत्तराखंड में हल्द्वानी मेडिकल कालेज, श्रीनगर मेडिकल कालेज और दून मेडिकल कालेज संचालित हो रहे हैं। दून कालेज में इस साल से एमबीबीएस में प्रवेश होने हैं, जबकि श्रीनगर मेडिकल कालेज मेें सिर्फ एमबीबीएस (एमडी फीजियोलॉजी) की कक्षाएं चल रही हैं।
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हल्द्वानी मेडिकल कालेज में पीजी की 39 सीटें हैं, लिहाजा शासन की निगाहें हल्द्वानी से पासआउट पीजी छात्रों पर टिकी हुई हैं। खास बात यह है कि सरकार मामूली फीस पर छात्रों को पीजी कोर्स करवा रही है। छात्रों को प्रतिवर्ष 60 हजार रुपये फीस देनी होती है।
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इसके एवज में उनसे बांड भरवा लिया जाता है कि वह दो साल तक उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक के रुप में कम से कम दो साल सेवाएं देंगे। रियायती दर पर पीजी न करने वाले छात्रों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये फीस देनी होती है। मेडिकल कालेजों मेें एसआर की कमी देखते शासन बांड में संशोधन करने जा रहा है।
मुख्य सचिव ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि हल्द्वानी मेडिकल कालेज से उत्तीर्ण पीजी छात्रों को एक साल तक प्रदेश के तीनों मेडिकल कालेजों में तैनात किया जाए। इससे कालेज में एसआर की कमी दूर होगी।
- प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कालेज श्रीनगर