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कठबद्दी मेेले में उमड़ी कौथिगेरों की भीड़

Mon, 01 May 2017 10:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पौड़ी।
ब्यूरो/अमर उजाला, पौड़ी। Updated Mon, 01 May 2017 10:26 PM IST
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Rowdy crowd of cottages
Kabaddi fairs - फोटो : amar ujala bureau

खिर्सू ब्लाक के ग्वाड़ गांव में आयोजित कठबद्दी मेले में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से कौथिगेरों की भीड़ उमड़ी। कठबद्दी को खिसकाने के रोमांच के साथ यह मेला संपन्न हुआ। खिर्सू ब्लॉक में लगने वाले कठबद्दी मेले से एक दिन पहले ग्रामीण बुरांस की लकड़ी को तराशकर उसको मानव का आकार देते हैं।

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मेले के दिन पूजा के बाद उसे गांव के ऊपर करीब 300 मीटर की ऊंचाई से रस्सी के सहारे पंचायती चौक तक खिसकाया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र को बुरी नजर से बचाने व खुशहाली के लिए यह मेला होता है।
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खिर्सू ब्लाक में कठबद्दी मेला हर वर्ष बैसाख माह के तीसरे सोमवार को आयोजित होता है। यह मेला एक साल कोठगी और दूसरे साल ग्वाड़ गांव में होता है। इस बार यह मेला ग्वाड़ गांव में आयोजित हुआ। मेले के तहत रविवार रात को शुरू हुआ मंडाण सोमवार सूर्योदय तक जारी रहा।
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सुबह लोगों ने घंडियाल देवता की पूजा की उसके कठबद्दी की पूजा के साथ दूल्हे की तरह नहलाने के बाद गांव में भ्रमण कराया। करीब 11 बजे इसे गांव के ऊपर ले जाया गया जहां रस्सी के जरिये गांव के पंचायत चौक तक खिसकाया गया। मेले में कठबद्दी के रोमांच को देखने के लिए कई गांवों से ग्रामीण पहुंचे थे। इस मौके पर मेला समिति के अध्यक्ष सचदेव सिंह, चतर सिंह नेगी, जयपाल सिंह नेगी, जगदीश, मुकेश रावत, विजय लाल, हरि सिंह, राजेंद्र सिंह, सते सिंह, गोविंद सिंह, सुरेंद्र सिंह व संपत्त सिंह भी मौजूद रहे।

मेले को लेकर यह है मान्यता
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य लक्ष्मण सिंह बिष्ट व खिर्सू के सतेंद्र नेगी ने कहा कि यह परंपरा काफी पुरानी है। पहले मनोरंजन के लिए यह मेला आयोजित किया जाता था। पहले बद्दी (गीत गाने वाले) को रस्सी के सहारे खिसकाया जाता था।


यदि वह रस्सी के अंत तक पहुंच जाता था, तो उसे धन दिया जाता था। अब बद्दी की जगह बुरांस की लकड़ी को तरासकर उसे मानव आकर दिया जाता है और उसे ेरस्सी के सहारे खिसकाया जाता है।

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