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डीएफओ की बहाली से कर्मचारी खुश
ब्यूरो/अमर उजाला कोटद्वार
Updated Tue, 24 Jan 2017 10:32 PM IST
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कोटद्वार। कोल्हूचौड़ प्रकरण में निलंबित हुए लैंसडौन के प्रभागीय वनाधिकारी मयंक शेखर झा की बहाली से वन अधिकारियों और कर्मचारियों में खुशी है। मंगलवार शाम को जैसे ही शासन की ओर से डीएफओ की बहाली के आदेश मिले, लैंसडौन के वन कर्मियों और अधिकारियों ने इसे सत्य की जीत करार दिया। डीएफओ के निलंबन के बाद से वन अधिकारी और कर्मचारियों के आठ संगठन कार्य बहिष्कार कर आंदोलन में चले गए थे।
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गत 31 दिसंबर को लैंसडौन वन प्रभाग के कोल्हूचौड़ गेस्ट हाउस में ठहरे देश के जाने माने उद्योगपति समीर थापर-जयंत नंदा समेत 16 लोगों को पौड़ी पुलिस ने एक स्पेशल सर्च आपरेशन में गिरफ्तार किया था। उन पर रिजर्व फारेस्ट में वन कानूनों का उल्लंघन, आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के तहत आरोप लगे थे। उनके खिलाफ कोटद्वार थाने में मुकदमा दर्ज है। पुलिस के सर्च आपरेशन के बाद शासन ने अपने दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता का मामला पाते हुए प्रथम दृष्टया डीएफओ मयंक शेखर झा को निलंबित कर उन्हें प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय देहरादून से संबद्ध कर दिया था।
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कोल्हूचौड़ प्रकरण में डीएफओ के निलंबन को गलत बताते हुए वन अधिकारी और कर्मचारियों के आठ संगठन डीएफओ के पक्ष में आ गए। वन अधिकारी कर्मचारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष आरपी पंत व रेंजर एसपी कंडवाल ने बताया कि डीएफओ की बहाली को वन कर्मचारी संगठनों ने अपने संघर्ष की जीत बताया है। उन्होंने बताया कि शासन की ओर से 24 जनवरी को हुआ बहाली आदेश देर शाम को यहां प्राप्त हो गया है।
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कोल्हूचौड़ प्रकरण पर एक नजर
31 दिसंबर, 2016 की रात पौड़ी जिला पुलिस की ओर से कोल्हूचौड़ गेस्ट हाउस में सर्च आपरेशन, 16 लोग गिरफ्तार।
01 जनवरी को पुलिस ने समीर थापर-जयंत नंदा समेत सोलह लोगों को कोर्ट में पेश किया, न्यायिक अभिरक्षा में पौड़ी जेल भेजे।
02 जनवरी को विभागीय जांच के लिए सीएफ और सीसीएफ शिवालिक वृत्त कोटद्वार पहुंचे, देर शाम डीएफओ सस्पेंड।
03 जनवरी से डीएफओ के निलंबन के खिलाफ वन अधिकारी, कर्मचारी संगठनों का कार्य बहिष्कार आंदोलन शुरू।