फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   Prsutaon treatment in the name of 'recovery'

प्रसूताओं के उपचार के नाम पर ‘वसूली’

Tue, 31 May 2016 07:07 PM IST
अमर उजाला/श्रीनगर।
अमर उजाला/श्रीनगर। Updated Tue, 31 May 2016 07:07 PM IST
विज्ञापन

राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध बेस अस्पताल में प्रसूताओं  से इलाज के नाम पर पैसे लेने की शिकायतें मिल रही है। पैसे नहीं देने पर संबंधित चिकित्सक उनकी मरहम पट्टी को भी तैयार नहीं हो रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में जच्चा-बच्चा का सारा खर्चा सरकार वहन करती है।

विज्ञापन


अस्पताल में अपनी एक रिश्तेदार के साथ आए शगुन कुमार ने बताया कि उनकी भाई की पत्नी का एक हफ्ते पहले आपरेशन से बच्चा हुआ है। उसका आपरेशन करने वाली चिकित्सक ने उसे एक पर्ची थमाते हुए एक दवा विक्रेता को 1800 रुपये भुगतान करने की बात कही। जब चिकित्सक से कारण पूछा गया, तो उसने बताया कि आपरेशन के लिए वहां से दवाइयां मंगवाई गई हैं।
विज्ञापन


जननी-शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) के अंतर्गत डिलीवरी पूरी तरह से फ्री होती है। दवाइयां  खत्म होने पर प्रबंधन अन्य जगह से व्यवस्था करता है। सामाजिक कार्यकर्ता विभोर बहुगुणा का कहना है कि चिकित्सक गरीब जनता को लूट रहे हैं। यदि दवाइयां इतनी जरूरी थी तो तीमारदार को बताया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोट-
मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है। यदि पीड़ित लिखित शिकायत करें, तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। डिलीवरी में एक भी रुपया नहीं लिया जाता है। परिजनों से कोई दवाइयां नहीं मंगवाई जाती हैं। - डा. सुरेश जैन, चिकित्सा अधीक्षक बेस अस्पताल


स्त्री रोग विभागाध्यक्ष देंगी रिपोर्ट
श्रीनगर। दोपहर बाद प्रसूता के पति राजेश टम्टा ने चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डा. सुरेश जैन को लिखित शिकायत दे दी। इस पर एमएस ने संबंधित चिकित्सक को भी बुलाया। पीड़ित ने बताया कि दवा विक्रेता को बिना रुपये दिए चिकित्सक उसको रिलीव नहीं कर रही है। जब उसे पता ही नहीं है कि कोई दवा बाहर से मंगवाई गई, तो वह कैसे पेमेंट कर दे। बाहर से दवा मंगवाई गई, तो उनको अवगत कराया जाना चाहिए था। चिकित्सक ने किसी ऐसी घटना से इंकार किया। उनका कहना था कि उन्होंने कोई भुगतान की बात नहीं की। एमएस ने स्त्री रोग विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर प्रकरण की जांच करने को कहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed