{"_id":"5e4185168ebc3ee602360402","slug":"people-will-soon-get-rid-of-unclaimed-animals-kotdwar-news-drn3356939121","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहरवासियों को आवारा पशुओं के आतंक से क्षेत्र की जनता को मिलेगी निजात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहरवासियों को आवारा पशुओं के आतंक से क्षेत्र की जनता को मिलेगी निजात
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहरवासियों को जल्द ही लावारिस पशुओं से निजात मिल जाएगी। शासन ने गोधाम के निर्माण के लिए 74 लाख की धनराशि स्वीकृति प्रदान की है। शासन ने प्रथम चरण में नगर निगम को 29 लाख की धनराशि उपलब्ध करा दी है। जिसमें 100 लावारिस गोवंश को रखने की व्यवस्था होगी।
उत्तराखंड में दस साल पहले गोवंश संरक्षण अधिनियम लागू हुआ था। अधिनियम लागू होने के बाद जहां एक ओर अनुपयोगी पशुओं की खरीद-फरोख्त बंद हो चुकी है, वहीं चारे के अभाव में पशुपालकों ने गोवंश को सड़कों पर छोड़ना शुरू कर दिया। लावारिस पशुओं की तादात बढ़ने से जहां सड़कों पर ट्रैफिक बाधित हो रहा है, वहीं आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। क्षेत्र के काश्तकार भी लावारिस गोवंश से परेशान हैं। क्षेत्र की जनता और सामाजिक संगठनों की ओर से शहर से लेकर नगर निगम में क्षेत्र के गांवों तक लावारिस पशुओं से निजात दिलाने की मांग शासन प्रशासन से की जा रही है, लेकिन नगर निगम बनने के दो साल बाद भी गोधाम नहीं होने के कारण पालतू पशु दिन और रात सड़कों पर ही डेरा जमाए हुए हैं। पूर्व में लावारिस पशुओं को रखने के लिए जहां जिला पंचायत की ओर से देवी मंदिर सुखरो, कालाबड़, हल्दूखाता, गाड़ीघाट में कांजी हाउस बनाया गया था। ये सभी कांजी हाउस देखरेख के अभाव और शासन की उपेक्षा के चलते बंद हो गए। लावारिस पशुओं को देखते नगर निगम प्रशासन की ओर से अगस्त 2018 में काशीरामपुर तल्ला में 2.5 बीघा भूमि चयनित कर गोधाम के निर्माण के लिए 80 लाख की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी गई थी।
शासन की ओर से कांजी हाउस के निर्माण के लिए 74 लाख की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है। प्रथम चरण में 29 लाख की धनराशि शासन ने अवमुक्त कर दी है। कांजी हाउस के निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अखिलेश खंडूड़ी, जेई नगर निगम
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड में दस साल पहले गोवंश संरक्षण अधिनियम लागू हुआ था। अधिनियम लागू होने के बाद जहां एक ओर अनुपयोगी पशुओं की खरीद-फरोख्त बंद हो चुकी है, वहीं चारे के अभाव में पशुपालकों ने गोवंश को सड़कों पर छोड़ना शुरू कर दिया। लावारिस पशुओं की तादात बढ़ने से जहां सड़कों पर ट्रैफिक बाधित हो रहा है, वहीं आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। क्षेत्र के काश्तकार भी लावारिस गोवंश से परेशान हैं। क्षेत्र की जनता और सामाजिक संगठनों की ओर से शहर से लेकर नगर निगम में क्षेत्र के गांवों तक लावारिस पशुओं से निजात दिलाने की मांग शासन प्रशासन से की जा रही है, लेकिन नगर निगम बनने के दो साल बाद भी गोधाम नहीं होने के कारण पालतू पशु दिन और रात सड़कों पर ही डेरा जमाए हुए हैं। पूर्व में लावारिस पशुओं को रखने के लिए जहां जिला पंचायत की ओर से देवी मंदिर सुखरो, कालाबड़, हल्दूखाता, गाड़ीघाट में कांजी हाउस बनाया गया था। ये सभी कांजी हाउस देखरेख के अभाव और शासन की उपेक्षा के चलते बंद हो गए। लावारिस पशुओं को देखते नगर निगम प्रशासन की ओर से अगस्त 2018 में काशीरामपुर तल्ला में 2.5 बीघा भूमि चयनित कर गोधाम के निर्माण के लिए 80 लाख की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी गई थी।
विज्ञापन
शासन की ओर से कांजी हाउस के निर्माण के लिए 74 लाख की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है। प्रथम चरण में 29 लाख की धनराशि शासन ने अवमुक्त कर दी है। कांजी हाउस के निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अखिलेश खंडूड़ी, जेई नगर निगम
विज्ञापन