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Kotdwar News: दो किमी दूर से पानी ढोने को मजबूर अमकटला के तीन गांवों के लोग
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कोटद्वार। जयहरीखाल ब्लाॅक के अमकटला ग्राम पंचायत के तीन गांवों के 20 परिवारों को रोजमर्रा की जरूरत के पानी के लिए 2 किमी दूर प्राकृतिक स्रोत से पानी जुटाना पड़ रहा है और व्यवस्था में सुधार के लिए 30 किलोमीटर दूर जल संस्थान कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने 10 महीने पहले पेयजल पाइप लाइन में सुधार के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने ग्राम सभा अमकटला के अंतिम छोर के गांवों तक पानी पहुंचाने की मांग भी दोहराई।विकासखंड जयहरीखाल की ग्राम सभा अमकटला में दिसंबर 2023 एवं जनवरी 2024 के बीच पेयजल पाइप लाइन का पुनर्गठन कार्य किया गया था। तब से आज तक ग्राम सभा के अंतिम छोर के गांवों लांगबाड़ी, सीरोबाड़ी, ढौंगैर आदि में आज तक पानी नहीं पहुंचा है। पानी से जुड़े रोजमर्रा के कामकाम करने के लिए ग्रामीणों को अपने काम छोड़कर पहले पानी जुटाने के लिए दो किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। आखिरकार ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा और मंगलवार को कई ग्रामीण कोटद्वार में जल संस्थान कार्यालय पहुंचकर अधिशासी अभियंता अभिषेक वर्मा से मिले।
ग्रामीणों ने एक्सईएन को बताया कि उन्होंने अमकटला के स्थान पर इल्मोड़ा में टैंक बनाने की मांग की थी, लेकिन जेई ने नलों की कमी बताकर टैंक अमकटला में बनाया। अब वहां के कई ग्रामीण टैंक का दुरुपयोग कर पानी से अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं और पुनर्गठन के 10 महीने बाद आज भी अंतिम छोर के ग्रामीण पानी से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना था कि पुनर्गठन से पहले पेयजल उपलब्ध हो जाता था। ग्रामीणों ने पेयजल पुनर्गठन योजना में मिलीभगत कर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जांच कर कार्रवाई करने और अंतिम छोर के ग्रामीणों को पानी मुहैया कराने की मांग की। एक्सईएन से मिले ग्रामीणों में बसंती, रजनी, सुनीता, गंगोत्री, नंदा, सोनी, नीलम, मंजू, पुष्कर सिंह आदि शामिल रहे।
जीवन ही नहीं सामाजिक प्रतिष्ठा भी हो रही प्रभावित
ग्रामीण पुष्कर सिंह बताते हैं वे घर पर हों या काम पर हर समय पानी पर ही चर्चा होती रहती है। गृहिणी सोनी बताती हैं कि घर में पानी का अभाव है और वह घर पर बीमार ससुर और बुजुर्ग सास को अकेला छोड़कर पानी मांगने कोटद्वार आई हैं। समाजसेवी बसंती देवी बताती हैं कि पानी की किल्लत की वजह से मेहमानों ने घर पर आना बंद कर दिया है।
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ग्रामीणों की समस्या और आरोप को गंभीरता से लिया गया है। कनिष्ठ अभियंता करण कठैत से स्पष्टीकरण मांगते हुए अग्रिम आदेशों तक अक्तूबर माह के वेतन पर रोक लगा दी गई है। -अभिषेक वर्मा, एक्सईएन, जल संस्थान कोटद्वार
ग्रामीणों ने एक्सईएन को बताया कि उन्होंने अमकटला के स्थान पर इल्मोड़ा में टैंक बनाने की मांग की थी, लेकिन जेई ने नलों की कमी बताकर टैंक अमकटला में बनाया। अब वहां के कई ग्रामीण टैंक का दुरुपयोग कर पानी से अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं और पुनर्गठन के 10 महीने बाद आज भी अंतिम छोर के ग्रामीण पानी से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना था कि पुनर्गठन से पहले पेयजल उपलब्ध हो जाता था। ग्रामीणों ने पेयजल पुनर्गठन योजना में मिलीभगत कर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जांच कर कार्रवाई करने और अंतिम छोर के ग्रामीणों को पानी मुहैया कराने की मांग की। एक्सईएन से मिले ग्रामीणों में बसंती, रजनी, सुनीता, गंगोत्री, नंदा, सोनी, नीलम, मंजू, पुष्कर सिंह आदि शामिल रहे।
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जीवन ही नहीं सामाजिक प्रतिष्ठा भी हो रही प्रभावित
ग्रामीण पुष्कर सिंह बताते हैं वे घर पर हों या काम पर हर समय पानी पर ही चर्चा होती रहती है। गृहिणी सोनी बताती हैं कि घर में पानी का अभाव है और वह घर पर बीमार ससुर और बुजुर्ग सास को अकेला छोड़कर पानी मांगने कोटद्वार आई हैं। समाजसेवी बसंती देवी बताती हैं कि पानी की किल्लत की वजह से मेहमानों ने घर पर आना बंद कर दिया है।
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ग्रामीणों की समस्या और आरोप को गंभीरता से लिया गया है। कनिष्ठ अभियंता करण कठैत से स्पष्टीकरण मांगते हुए अग्रिम आदेशों तक अक्तूबर माह के वेतन पर रोक लगा दी गई है। -अभिषेक वर्मा, एक्सईएन, जल संस्थान कोटद्वार