{"_id":"608ea6d08ebc3e8d39132b6c","slug":"passengers-kept-wandering-for-buses-due-to-strike-kotdwar-news-drn3778420170","type":"story","status":"publish","title_hn":"हड़ताल के कारण बसों के लिए भटकते रहे यात्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हड़ताल के कारण बसों के लिए भटकते रहे यात्री
विज्ञापन
यात्री किराया दोगुना करने की मांग को लेकर जीएमओयू समेत उत्तराखंड की सभी परिवहन कंपनियों के महासंघ की रविवार को हड़ताल रही। जीएमओयू की बसों की हड़ताल के कारण लोगों को गंतव्य तक जाने के लिए बसें नहीं मिलीं। पहाड़ में आवाजाही करने वाले लोगों को जीप टैक्सियों से गंतव्य तक जाना पड़ा। वहीं चक्का जाम के चलते जीएमओयू को करीब 35 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
जीएमओयू के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल ने बताया कि कोटद्वार मुख्यालय से 65, हरिद्वार डिपो से 100, ऋषिकेश डिपो से 13, पौड़ी डिपो से 20, श्रीनगर डिपो से 18, रुद्रप्रयाग डिपो से 28, कर्णप्रयाग डिपो से 15 और रामनगर डिपो से गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के लिए 28 रूटों पर बसों का संचालन किया जाता है। रविवार को हड़ताल के कारण सभी डिपो में बसों का संचालन नहीं हो पाया। हड़ताल से कंपनी को करीब 35-40 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 15 अप्रैल को जारी शासनादेश में 50 फीसदी यात्री क्षमता के साथ पब्लिक वाहन (बस, जीप टैक्सी, थ्रीव्हीलर, ई रिक्शा) का संचालन करने का शासनादेश जारी किया, लेकिन किराया दोगुना नहीं किया। जबकि पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण काल में जारी शासनादेश में 50 फीसदी यात्री क्षमता के साथ किराया दोगुना करने का शासनादेश जारी हुआ था। कहा कि पूर्व में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को ज्ञापन भेजकर यात्री किराया दोगुना करने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ने मांग पर विचार करने के बजाय किराया न बढ़ाने का फरमान जारी कर दिया है। कहा कि डीजल के दामों में वृद्धि के चलते 50 फीसदी सवारियों को लेकर बसों का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। जिससे वाहन स्वामियों, चालक/परिचालकों में रोष है।
विज्ञापन
जीएमओयू के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल ने बताया कि कोटद्वार मुख्यालय से 65, हरिद्वार डिपो से 100, ऋषिकेश डिपो से 13, पौड़ी डिपो से 20, श्रीनगर डिपो से 18, रुद्रप्रयाग डिपो से 28, कर्णप्रयाग डिपो से 15 और रामनगर डिपो से गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के लिए 28 रूटों पर बसों का संचालन किया जाता है। रविवार को हड़ताल के कारण सभी डिपो में बसों का संचालन नहीं हो पाया। हड़ताल से कंपनी को करीब 35-40 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 15 अप्रैल को जारी शासनादेश में 50 फीसदी यात्री क्षमता के साथ पब्लिक वाहन (बस, जीप टैक्सी, थ्रीव्हीलर, ई रिक्शा) का संचालन करने का शासनादेश जारी किया, लेकिन किराया दोगुना नहीं किया। जबकि पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण काल में जारी शासनादेश में 50 फीसदी यात्री क्षमता के साथ किराया दोगुना करने का शासनादेश जारी हुआ था। कहा कि पूर्व में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को ज्ञापन भेजकर यात्री किराया दोगुना करने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ने मांग पर विचार करने के बजाय किराया न बढ़ाने का फरमान जारी कर दिया है। कहा कि डीजल के दामों में वृद्धि के चलते 50 फीसदी सवारियों को लेकर बसों का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। जिससे वाहन स्वामियों, चालक/परिचालकों में रोष है।
विज्ञापन