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पंख टूटे ही सही पर उड़ने की अभिलाषा मुझे भी..
कोटद्वार
Updated Sun, 03 Jan 2016 10:24 PM IST
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लोक संपदा संस्था की ओर से विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए आयोजित कार्यशाला में शिक्षकों से विकलांग बच्चों की देखभाल, उनकी आवश्यकताएं और प्रतिभा को उभारने में कैसे सहयोग किया जाए इस पर चर्चा की गई।
रविवार को व्यापार मंडल सभागार में आयोजित कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन शशि कांडपाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की मेडिकल आवश्यकताओं का समझकर उनसे व्यवहार करना चाहिए। कहा कि अक्सर ऐसे बच्चों के अभिभावक मानसिक रूप से काफी हतोत्साहित हो जाते हैं। ऐसे अभिभावकों को शिक्षकों की ओर से उनकी देखभाल की सलाह देनी चाहिए जिससे ऐसे बच्चों के अंदर दबी हुई प्रतिभाओं को बाहर निकाला जा सके। इससे इन बच्चों का भविष्य तो सुधरेगा ही साथ ही ये समाज के विकास में भी अपना योगदान दे सकते हैं। शिक्षकों से विशेष अनुरोध करते हुए कहा कि शिक्षक को समाज में आदर्श स्थान प्राप्त होता है, इसलिए उनको असामान्य छात्रों की जरूरतों को समझ कर उनके साथ संवेदनशील रवैय्या अपनाना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागी समाज से अपील की कि असामान्य बच्चों को दया की नहीं संवेदनशीलता की जरूरत है। इस अवसर पर शिक्षकों के अलावा संस्था अध्यक्ष कमल जोशी मौजूद थे।
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रविवार को व्यापार मंडल सभागार में आयोजित कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन शशि कांडपाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की मेडिकल आवश्यकताओं का समझकर उनसे व्यवहार करना चाहिए। कहा कि अक्सर ऐसे बच्चों के अभिभावक मानसिक रूप से काफी हतोत्साहित हो जाते हैं। ऐसे अभिभावकों को शिक्षकों की ओर से उनकी देखभाल की सलाह देनी चाहिए जिससे ऐसे बच्चों के अंदर दबी हुई प्रतिभाओं को बाहर निकाला जा सके। इससे इन बच्चों का भविष्य तो सुधरेगा ही साथ ही ये समाज के विकास में भी अपना योगदान दे सकते हैं। शिक्षकों से विशेष अनुरोध करते हुए कहा कि शिक्षक को समाज में आदर्श स्थान प्राप्त होता है, इसलिए उनको असामान्य छात्रों की जरूरतों को समझ कर उनके साथ संवेदनशील रवैय्या अपनाना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागी समाज से अपील की कि असामान्य बच्चों को दया की नहीं संवेदनशीलता की जरूरत है। इस अवसर पर शिक्षकों के अलावा संस्था अध्यक्ष कमल जोशी मौजूद थे।
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