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Kotdwar News: वोटर लिस्ट से शिब्बूनगर वार्ड में 563 मतदाताओं के नाम गायब
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कोटद्वार। नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत वार्ड नंबर-23 शिब्बूनगर में पंचायत घर और रतनपुर रोड के बीच में रह रहे करीब 563 से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची ने गायब होने के कारण कई मतदाता अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग नहीं कर पाए। इस मामले में शिब्बूनगर निवासी धीरेंद्र प्रकाश कोटनाला ने मुख्य चुनाव आयुक्त निर्वाचन आयोग भारत सरकार समेत अन्य दोनों चुनाव आयुक्त व राज्य निर्वाचन आयुक्त उत्तराखंड से ईमेल पर लिखित शिकायत कर वार्ड में दोबारा चुनाव कराने और चुनाव होने तक चुनाव परिणाम पर रोक लगाने की मांग की है।
उन्होंने निवार्चन आयोग को ईमेल से भेजी शिकायत में कहा कि उनकी उम्र 60 साल है और वह जन्म से यहीं रहते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भी मतदाता सूची में उनका नाम था और वह हर बार अपने मताधिकार का प्रयोग करते आ रहे हैं। कहा कि इस बार 23 जनवरी को मेयर और पार्षद के लिए जो मतदान हुआ है। उसमें उनके क्षेत्र के 563 लोगों के नाम काट दिये गए हैं। कहा कि जो काफी बड़ी संख्या है और इससे चुनाव परिणाम बदल सकता है। उन्होंने कहा कि यह मतदाताओं के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। शिकायती पत्र में उन्होंने मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने, पार्षद पद के लिए वार्ड में दोबारा चुनाव कराने और चुनाव होने तक चुनाव परिणाम पर रोक लगाने की मांग की है। इसी तरह की शिकायत पदमपुर मोटाढाक समेत अन्य कई वार्डों से आई है, जिसमें एक साथ बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गायब हैं।
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उन्होंने निवार्चन आयोग को ईमेल से भेजी शिकायत में कहा कि उनकी उम्र 60 साल है और वह जन्म से यहीं रहते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भी मतदाता सूची में उनका नाम था और वह हर बार अपने मताधिकार का प्रयोग करते आ रहे हैं। कहा कि इस बार 23 जनवरी को मेयर और पार्षद के लिए जो मतदान हुआ है। उसमें उनके क्षेत्र के 563 लोगों के नाम काट दिये गए हैं। कहा कि जो काफी बड़ी संख्या है और इससे चुनाव परिणाम बदल सकता है। उन्होंने कहा कि यह मतदाताओं के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। शिकायती पत्र में उन्होंने मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने, पार्षद पद के लिए वार्ड में दोबारा चुनाव कराने और चुनाव होने तक चुनाव परिणाम पर रोक लगाने की मांग की है। इसी तरह की शिकायत पदमपुर मोटाढाक समेत अन्य कई वार्डों से आई है, जिसमें एक साथ बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गायब हैं।
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