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डिजिटल युग में नेटवर्क के लिए पेड़ों पर लटका रहे मोबाइल
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दुगड्डा ब्लॉक के बड़ोलगांव में सिग्नल के लिए पेड़ पर लटकाया गया मोबाइल फोन।
- फोटो : KOTDWAR
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डिजिटल युग में भी दुगड्डा ब्लॉक के पौखाल क्षेत्र में मालन घाटी में बसे एक दर्जन गांवों के लोगों को संचार सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र में प्राइवेट संचार कंपनियों की सेवाएं भी काम नहीं कर रही है। स्थानीय लोगों ने इलाके में बीएसएनएल का मोबाइल टावर स्थापित करने की मांग की है।
मालन नदी के उद्गम स्थल में बसे दुगड्डा ब्लॉक के बड़ोलगांव, मलन्या, मांडई, बिजनूर, डलखिल, सौड़, जयखेत, लुटासी, लदोखी, जुड्डा, अमोला, महेड़ा समेत करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीण संचार की सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्र में बीएसएनएल के महाबगढ़ स्थित टावर के ही सिग्नल आते हैं। उनके गांव मालन नदी की घाटी में होने के कारण यहां मोबाइल के सिग्नल बहुत ही कम आते हैं, जिसके चलते वे अपने परिचितों और रिश्तेदारों का हाल जानने के लिए मोबाइल को पेड़ों पर लटका देते हैं। क्षेत्र में एक प्राइवेट संचार कंपनी ने ऑप्टीकल फाइबर केबिल बिछाने का कार्य शुरू किया था, जिससे बेहतर संचार सेवाएं मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन कंपनी ने जुड्डा स्थित नर्सरी तक ही केबल बिछाई और चलती बनी। क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों के सिग्नल तो आते ही नहीं हैं। नेटवर्क नहीं होने के कारण लोग सोशल मीडिया से भी नहीं जुड़ पा रहे हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और भारत संचार विभाग से क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाने की मांग की है।
बीएसएनएल के एसडीओ अरविंद धूलिया ग्रामीणों की शिकायत से सहमत नहीं है। उनका दावा है कि महाबगढ़ बीएसएनएल टावर की 2-जी सेवाएं क्षेत्र के हर गांव तक पहुंच रही है। महाबगढ़ के अलावा अन्य स्थान पर मोबाइल टावर लगाना प्रस्तावित नहीं है।
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मालन नदी के उद्गम स्थल में बसे दुगड्डा ब्लॉक के बड़ोलगांव, मलन्या, मांडई, बिजनूर, डलखिल, सौड़, जयखेत, लुटासी, लदोखी, जुड्डा, अमोला, महेड़ा समेत करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीण संचार की सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्र में बीएसएनएल के महाबगढ़ स्थित टावर के ही सिग्नल आते हैं। उनके गांव मालन नदी की घाटी में होने के कारण यहां मोबाइल के सिग्नल बहुत ही कम आते हैं, जिसके चलते वे अपने परिचितों और रिश्तेदारों का हाल जानने के लिए मोबाइल को पेड़ों पर लटका देते हैं। क्षेत्र में एक प्राइवेट संचार कंपनी ने ऑप्टीकल फाइबर केबिल बिछाने का कार्य शुरू किया था, जिससे बेहतर संचार सेवाएं मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन कंपनी ने जुड्डा स्थित नर्सरी तक ही केबल बिछाई और चलती बनी। क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों के सिग्नल तो आते ही नहीं हैं। नेटवर्क नहीं होने के कारण लोग सोशल मीडिया से भी नहीं जुड़ पा रहे हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और भारत संचार विभाग से क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाने की मांग की है।
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बीएसएनएल के एसडीओ अरविंद धूलिया ग्रामीणों की शिकायत से सहमत नहीं है। उनका दावा है कि महाबगढ़ बीएसएनएल टावर की 2-जी सेवाएं क्षेत्र के हर गांव तक पहुंच रही है। महाबगढ़ के अलावा अन्य स्थान पर मोबाइल टावर लगाना प्रस्तावित नहीं है।
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