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कण्वाश्रम मेें झील निर्माण से बदल जाएगी तस्वीर
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटद्वार।
Updated Sat, 04 Jun 2016 09:57 PM IST
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कोटद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता में बोलते स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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महर्षि कण्व की तपस्थली और चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम में मालन नदी पर झील निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य सरकार के वन भूमि हस्तांतरण पर मुहर लगा दी है। कण्वाश्रम में 3.074 हेक्टेयर वन भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। जल्द ही यहां पर झील निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार से करीब 16 किमी दूर मालन नदी के तट पर स्थित कण्वाश्रम में झील निर्माण समेत पर्यटन परियोजना के मार्ग का निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। क्षेत्रीय विधायक और स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि केंद्र सरकार से झील निर्माण के लिए प्रस्तावित की गई वन भूमि पर्यटन विभाग को विधिवत हस्तांतरित कर दी गई है। जल्द ही यहां पर परियोजना निर्माण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। वर्ष 2015 में स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी की पहल पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यहां पर झील निर्माण समेत पर्यटन परियोजना निर्माण की घोषणा की थी। इसके लिए टोकन मनी के रुप में एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। अब तक उपेक्षित पड़े कण्वाश्रम मेें झील निर्माण से यहां की तस्वीर बदल जाएगी।
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पंद्रह करोड़ रुपये की आएगी लागत
झील निर्माण में करीब पंद्रह करोड़ रुपये की लागत आएगी। जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल ने बताया कि भूमि हस्तांतरण के आदेश प्राप्त हो गए हैं। जल्द ही वन, राजस्व, पर्यटन और उत्तराखंड विकास परिषद के अधिकारियों का संयुक्त निरीक्षण कराया जाएगा। सिंचाई विभाग से झील निर्माण की डीपीआर बनवाई जा रही है। झील बनने से कण्वाश्रम में पर्यटन को बढ़ावा तो मिलेगा ही, इसे नई पहचान भी मिलेगी। 3.074 हेक्टेयर भूमि में से करीब एक हेक्टेयर भूमि में झील बनेगी, बाकी जगह में कैंटीन, हट, पार्किंग आदि की व्यवस्था होगी।
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