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एनएच पर लगा जाम, भीड़ नियंत्रित करने में पुलिस के छूटे पसीने
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कोटद्वार के प्रसिद्ध सिद्धबली मंदिर के बाहर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : KOTDWAR
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नए साल के पहले दिन श्री सिद्धबली बाबा के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा, जिसके कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा रहा। मंदिर से लेकर एनएच तक सिद्धबाबा के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की लाइन लगी रही। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था सुचारु करने में पुलिस कर्मियों को पसीना बहाना पड़ा।
शनिवार सुबह से ही कोटद्वार में सिद्धबली आने वाले वाहनों का दबाव रहा। सुबह आठ बजे से ही कोटद्वार, भाबर, सनेह, पर्वतीय क्षेेत्रों के अलावा नजीबाबाद, कीरतपुर, बिजनौर, धामपुर, हापुड़, गुरुग्राम, नोएडा, दिल्ली, हरियाणा के शहरों से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। स्थिति यह रही कि दस बजे तक सिद्धबली मंदिर की पार्किंग, एनएच के पास वन विभाग की पार्किंग और नव दुर्गा मंदिर की पार्किंग फुल हो गई। इसके बाद लोगों ने अपने चार पहिया वाहनों को सिद्धबली पुल, ग्रास्टनगंज रोड और एनएच पर खड़ा करना शुरू कर दिया। एनएच पर वाहनों के खड़ा होते ही जाम लग गया। आलम यह रहा कि सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक वाहन रेंग-रेंगकर चलते रहे। पुलिस कर्मियों को व्यवस्था बनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के जवान तैनात किए गए थे। उन्होंने लोगों को दो लाइन में लगाकर एक-एक कर सिद्धबली बाबा के दर्शन कराए। मंदिर समिति ने भी अपने वेद पाठियों और अन्य कर्मियों को मंदिर से बाहर ही लोगों को सिद्धबाबा का तिलक करने की व्यवस्था की थी। इस दौरान मंदिर से लेकर पुल तक लोगों की लाइन लगी रही। लोगों ने नंगे पांव घंटों लाइन में लगकर श्री सिद्धबली बाबा के दर्शन कर साल के पहले दिन सुख, शांति और समृद्धि की मन्नत मांगी।
जमकर उड़ी कोरोना नियमों की धज्जियां, कोई देखने वाला नहीं
नए साल के पहले दिन सिद्धबली बाबा के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने कोरोना नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। मंदिर समिति की ओर से बार-बार दूरी बनाने और मास्क पहनने करने का एनाउंसमेंट करने के बाद भी लोग एक दूसरे से चिपके रहे। मंदिर के बाहर अधिकतर लोग बिना मास्क के देखे गए, जिसके कारण कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंज बिहारी देवरानी ने बताया कि शनिवार को करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु मंदिर में पहुंचे। बिना मास्क के आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर समिति की ओर से मास्क दिए गए। सुबह छह बजे से देर शाम की आरती तक मंदिर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा रहा।
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शनिवार सुबह से ही कोटद्वार में सिद्धबली आने वाले वाहनों का दबाव रहा। सुबह आठ बजे से ही कोटद्वार, भाबर, सनेह, पर्वतीय क्षेेत्रों के अलावा नजीबाबाद, कीरतपुर, बिजनौर, धामपुर, हापुड़, गुरुग्राम, नोएडा, दिल्ली, हरियाणा के शहरों से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। स्थिति यह रही कि दस बजे तक सिद्धबली मंदिर की पार्किंग, एनएच के पास वन विभाग की पार्किंग और नव दुर्गा मंदिर की पार्किंग फुल हो गई। इसके बाद लोगों ने अपने चार पहिया वाहनों को सिद्धबली पुल, ग्रास्टनगंज रोड और एनएच पर खड़ा करना शुरू कर दिया। एनएच पर वाहनों के खड़ा होते ही जाम लग गया। आलम यह रहा कि सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक वाहन रेंग-रेंगकर चलते रहे। पुलिस कर्मियों को व्यवस्था बनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के जवान तैनात किए गए थे। उन्होंने लोगों को दो लाइन में लगाकर एक-एक कर सिद्धबली बाबा के दर्शन कराए। मंदिर समिति ने भी अपने वेद पाठियों और अन्य कर्मियों को मंदिर से बाहर ही लोगों को सिद्धबाबा का तिलक करने की व्यवस्था की थी। इस दौरान मंदिर से लेकर पुल तक लोगों की लाइन लगी रही। लोगों ने नंगे पांव घंटों लाइन में लगकर श्री सिद्धबली बाबा के दर्शन कर साल के पहले दिन सुख, शांति और समृद्धि की मन्नत मांगी।
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जमकर उड़ी कोरोना नियमों की धज्जियां, कोई देखने वाला नहीं
नए साल के पहले दिन सिद्धबली बाबा के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने कोरोना नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। मंदिर समिति की ओर से बार-बार दूरी बनाने और मास्क पहनने करने का एनाउंसमेंट करने के बाद भी लोग एक दूसरे से चिपके रहे। मंदिर के बाहर अधिकतर लोग बिना मास्क के देखे गए, जिसके कारण कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंज बिहारी देवरानी ने बताया कि शनिवार को करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु मंदिर में पहुंचे। बिना मास्क के आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर समिति की ओर से मास्क दिए गए। सुबह छह बजे से देर शाम की आरती तक मंदिर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा रहा।
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