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नहरें और गूलें क्षतिग्रस्त, कैसे करें धान की रोपाई
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कोटद्वार। बरसात का मौसम शुरू होते ही तल्ला सिताबपुर, बालासौड़, हरसिंगपुर, शिब्बूनगर व बलभद्रपुर के किसानों को धान की रोपाई की चिंता सताने लगी है। दरअसल क्षेत्र की सिंचाई गूलें जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने के साथ ही मलबे से पटी हुई हैं, लेकिन सिंचाई विभाग ने अभी तक न तो मलबे की सफाई कराई है और न ही क्षतिग्रस्त सिंचाई नहरों की मरम्मत ही कराई है। काश्तकारों ने अविलंब सिंचाई गूलों की मरम्मत और सफाई कराने की मांग उठाई है।
बालासौड़ निवासी किसान नेता पातीराम ध्यानी, सामाजिक कार्यकर्ता हरीश घिल्डियाल, विजय ध्यानी, स्वयं दत्त भट्ट व राजाराम अणथ्वाल का कहना है कि बरसात शुरू होने के साथ ही खरीफ की फसल की बुवाई शुरू हो गई है। खेतों में धान की पौध तैयार खड़ी है, लेकिन सिंचाई गूलें क्षतिग्रस्त होने और मलबे से पटी होने के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों के सामने धान की रोपाई का संकट पैदा हो गया है। कहा कि रही सही कसर क्षेत्र में चल रही ट्रैक्टर ट्रालियों ने पूरी कर दी है। ट्रैक्टर-ट्रालियों ने क्षेत्र की ज्यादातर गूलें क्षतिग्रस्त कर दी हैं। जिससे पानी खेतों में पहुंचने के बजाय सड़कों में बह रहा है। कहा कि ग्राम पंचायतों के दौरान सिंचाई गूलों की मरम्मत समय पर हो जाती थी, लेकिन नगर निगम बनने के बाद से सिंचाई गूलों की मरम्मत नहीं हो रही है।
सिंचाई गूलों और नहरों को आपदा से नुकसान पहुंचा है। उन्हें अस्थायी रूप से चलाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थायी निर्माण बजट स्वीकृत होने के बाद किया जाएगा।
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-सुबोध मैठाणी, ईई सिंचाई खंड दुगड्डा
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बालासौड़ निवासी किसान नेता पातीराम ध्यानी, सामाजिक कार्यकर्ता हरीश घिल्डियाल, विजय ध्यानी, स्वयं दत्त भट्ट व राजाराम अणथ्वाल का कहना है कि बरसात शुरू होने के साथ ही खरीफ की फसल की बुवाई शुरू हो गई है। खेतों में धान की पौध तैयार खड़ी है, लेकिन सिंचाई गूलें क्षतिग्रस्त होने और मलबे से पटी होने के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों के सामने धान की रोपाई का संकट पैदा हो गया है। कहा कि रही सही कसर क्षेत्र में चल रही ट्रैक्टर ट्रालियों ने पूरी कर दी है। ट्रैक्टर-ट्रालियों ने क्षेत्र की ज्यादातर गूलें क्षतिग्रस्त कर दी हैं। जिससे पानी खेतों में पहुंचने के बजाय सड़कों में बह रहा है। कहा कि ग्राम पंचायतों के दौरान सिंचाई गूलों की मरम्मत समय पर हो जाती थी, लेकिन नगर निगम बनने के बाद से सिंचाई गूलों की मरम्मत नहीं हो रही है।
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सिंचाई गूलों और नहरों को आपदा से नुकसान पहुंचा है। उन्हें अस्थायी रूप से चलाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थायी निर्माण बजट स्वीकृत होने के बाद किया जाएगा।
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-सुबोध मैठाणी, ईई सिंचाई खंड दुगड्डा