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पुलिंडा बैरियर से वन कर्मी नदारद, हाथी के खतरे वाले बोर्ड भी नहीं लगे
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लैंसडौन वन प्रभाग का पुलिंडा बैरियर।
- फोटो : KOTDWAR
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वन विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण खतरे से अनजान लोग रामणी मार्ग पर हाथी के खतरे के बीच सफर कर रहे हैं। लोगों को पुलिंडा मार्ग पर जाने से रोकने वाले वन विभाग के पुलिंडा बैरियर पर वन कर्मी नदारद हैं। हाथी के खतरे से आगाह करने वाले सूचना के बोर्ड अभी तक नहीं लगाए गए हैं, जिसके कारण हाथी-मानव संघर्ष का खतरा बना हुआ है।
लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा के लिए पूर्व में पुलिंडा रोड पर बैरियर बनाया गया था। बैरियर पर तैनात वन कर्मी लोगों को अनावश्यक रूप से जंगल की ओर जाने से रोकते थे, जिसके कारण हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं नहीं होती थीं। वर्तमान में करीब दो वर्षों से बैरियर से वनकर्मी नदारद हैं। विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली का आलम यह है कि 25 अप्रैल को हाथी की ओर से एक पुलिस कर्मी को मौत के घाट उतारने के दो दिन के बाद भी बैरियर पर लोगों को रोकने के लिए वन कर्मियों की तैनाती नहीं की गई है। विभाग ने तत्काल खतरे को देखते हुए सूचना बोर्ड लगाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक पुलिंडा रोड पर सूचना बोर्ड नहीं दिखाई दे रहे हैं, जिसके कारण खतरे से अनजान लोग दो पहिया वाहनों से हाथी के खतरे के बीच आवाजाही कर रहे हैं।
कर्मचारियों की कमी के कारण पूर्व में पुलिंडा बैरियर से कर्मचारियों को हटा दिया गया था। लोगों की सुरक्षा के लिए सुबह और शाम को बैरियर पर कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। शीघ्र ही हाथी से खतरा की सूचना के बोर्ड भी लगा दिए जाएंगे। - प्रदीप उनियाल, रेंज अधिकारी लैंसडौन वन प्रभाग।
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लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा के लिए पूर्व में पुलिंडा रोड पर बैरियर बनाया गया था। बैरियर पर तैनात वन कर्मी लोगों को अनावश्यक रूप से जंगल की ओर जाने से रोकते थे, जिसके कारण हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं नहीं होती थीं। वर्तमान में करीब दो वर्षों से बैरियर से वनकर्मी नदारद हैं। विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली का आलम यह है कि 25 अप्रैल को हाथी की ओर से एक पुलिस कर्मी को मौत के घाट उतारने के दो दिन के बाद भी बैरियर पर लोगों को रोकने के लिए वन कर्मियों की तैनाती नहीं की गई है। विभाग ने तत्काल खतरे को देखते हुए सूचना बोर्ड लगाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक पुलिंडा रोड पर सूचना बोर्ड नहीं दिखाई दे रहे हैं, जिसके कारण खतरे से अनजान लोग दो पहिया वाहनों से हाथी के खतरे के बीच आवाजाही कर रहे हैं।
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कर्मचारियों की कमी के कारण पूर्व में पुलिंडा बैरियर से कर्मचारियों को हटा दिया गया था। लोगों की सुरक्षा के लिए सुबह और शाम को बैरियर पर कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। शीघ्र ही हाथी से खतरा की सूचना के बोर्ड भी लगा दिए जाएंगे। - प्रदीप उनियाल, रेंज अधिकारी लैंसडौन वन प्रभाग।
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