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Kotdwar News: बजट के अभाव में वन मोटर मार्ग खस्ताहाल, नौड़ी के पर्यटन पर लगा ब्रेक

Wed, 21 Oct 2026 06:49 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार Updated Wed, 21 Oct 2026 06:49 PM IST
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Forest motor road in poor condition due to lack of funds; tourism in Naudi comes to a halt
1889 में बना वन विश्राम गृह और चंद्रशेखर आजाद की क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ा है क्षेत्र का इतिहास
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दुगड्डा (कोटद्वार)। लैंसडौन वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज का नौड़ी वन क्षेत्र ऐतिहासिक महत्व और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इसके बावजूद बजट के अभाव में वन मोटर मार्गों का रखरखाव और वन चौकियों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। इससे कभी देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से उपेक्षित है। बरसात में क्षतिग्रस्त हुए मार्गों की मरम्मत नहीं होने से पर्यटकों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।
मोड़ाखाल से नौड़ी होते हुए ढिमकी तक करीब 14 किलोमीटर लंबा वन मोटर मार्ग दुगड्डा रेंज को कोटड़ी रेंज से जोड़ता है। इस मार्ग पर 14 से 15 नाले पड़ते हैं, जिनके कारण बरसात में सड़क की स्थिति खराब हो जाती है। पूर्व में 58 लाख रुपये की लागत से मार्ग की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन पिछले तीन साल से इसके लिए बजट नहीं मिल पाया है। मोड़ाखाल से नौड़ी बंगला की दूरी तीन किलोमीटर, ओग्यूं की पांच किलोमीटर और ओग्यूं तिराहे से बसईखांद की दूरी छह किलोमीटर है। मोड़ाखाल से ढिमकी तक करीब 14 किलोमीटर का सफर तय कर कोटड़ी रेंज के कोल्हूचौड़ क्षेत्र की सीमा शुरू हो जाती है।
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450 से अधिक पक्षी प्रजातियों का बसेरा
नौड़ी में वर्ष 1889 में बना वन विश्राम गृह है, जहां पर्यटकों के ठहरने के लिए दो सूट उपलब्ध हैं। यहां हाथी, बाघ, गुलदार, काला भालू, सांभर, चीतल, घुरल और काकड़ समेत कई वन्यजीव पाए जाते हैं। क्षेत्र में 450 से अधिक पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी इसकी जैव विविधता को खास बनाती है। शीतकाल में साइबेरिया से आने वाले पक्षी कोल्हूचौड़ से नौड़ी तक दिखाई देते हैं। बसईखांद, ओग्यूं, गारापानी, कुसुमघाटी, पतेलीचौड़ और ढिमकी यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।
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चंद्रशेखर आजाद ने दिया था प्रशिक्षण
नौड़ी का ऐतिहासिक महत्व भी है। बताया जाता है कि जुलाई 1930 में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद ने नाथूपुर गांव के निकट अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ पहुंचकर नौड़ी में एक सप्ताह तक युवाओं को शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण दिया था। मोड़ाखाल में प्रवेश द्वार का नामकरण भी उनके नाम पर किया गया है।
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मोड़ाखाल से नौड़ी, बसईखांद और ढिमकी तक वन मोटर मार्गों की मरम्मत का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होने पर मरम्मत कराई जाएगी।
- रमेशचंद्र सिंह नेगी, रेंजर दुगड्डा।
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