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चारे के अभाव में अटकी गोशाला, सड़कों पर गोवंश
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कोटद्वार के काशीरामपुर तल्ला में नगर निगम की नवनिर्मित गोशाला।
- फोटो : KOTDWAR
नगर निगम प्रशासन की ओर से काशीरामपुर तल्ला में उद्घाटन होने के दो सप्ताह बाद भी नवनिर्मित गोशाला का ठीक ढंग से संचालन नहीं हो पा रहा है। गोशाला का संचालन ठीक ढंग से न होने के कारण लावारिस गोवंश अब भी सड़कों पर घूम रहे हैं और समस्या जस की तस बनी हुई है।
नगर निगम प्रशासन की ओर से लावारिस गोवंश के लिए वर्ष 2019 में काशीरामपुर तल्ला में 2.5 बीघा भूमि चयनित कर 17.5 लाख रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया गया। नगर निगम को उम्मीद थी कि गोशाला के संचालन के लिए शासन से धनराशि मिलेगी, लेकिन शासन की ओर से धनराशि नहीं मिलने से गोशाला के संचालन पर संकट मंडराने लगे हैं। धनाभाव के चलते नगर निगम ने गोशाला का संचालन सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया। कई दिनों तक सामाजिक संस्थाओं में भी गोशाला के संचालन को लेकर खींचतान चलती रही, लेकिन अंत में नगर निगम प्रशासन की ओर से आकृति सामाजिक संस्था को गोशाला के संचालन की अनुमति प्रदान कर दी गई। 28 जनवरी को गोशाला का उद्घाटन भी समारोह पूर्व हो चुका है, लेकिन दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद भी गोशाला का संचालन ठीक ढंग नहीं हो पा रहा है। जिससे सड़कों पर घूम रहे लावारिस गोवंश की समस्या से लोगों को निजात नहीं मिल पाई है। गोखले मार्ग पर तो शाम ढलते ही लावारिस गोवंश एकत्र हो जाता है, जिससे सब्जी खरीदने के लिए पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
गोशाला संचालन की जिम्मेदारी संभाले आकृति सामाजिक संस्था की अध्यक्ष सुषमा जखमोला का कहना है कि गोशाला में 24 गोवंश रखने की व्यवस्था है। साथ ही चारे के लिए छोटा सा स्टोर है। गोशाला के संचालन के लिए व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं। जल्द ही सड़कों में घूम रहे लावारिस गोवंश को रेस्क्यू कर गोधाम में लाया जाएगा। बताया कि वर्तमान में पांच गाय गोधाम में रखी गई हैं।
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नगर निगम प्रशासन की ओर से लावारिस गोवंश के लिए वर्ष 2019 में काशीरामपुर तल्ला में 2.5 बीघा भूमि चयनित कर 17.5 लाख रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया गया। नगर निगम को उम्मीद थी कि गोशाला के संचालन के लिए शासन से धनराशि मिलेगी, लेकिन शासन की ओर से धनराशि नहीं मिलने से गोशाला के संचालन पर संकट मंडराने लगे हैं। धनाभाव के चलते नगर निगम ने गोशाला का संचालन सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया। कई दिनों तक सामाजिक संस्थाओं में भी गोशाला के संचालन को लेकर खींचतान चलती रही, लेकिन अंत में नगर निगम प्रशासन की ओर से आकृति सामाजिक संस्था को गोशाला के संचालन की अनुमति प्रदान कर दी गई। 28 जनवरी को गोशाला का उद्घाटन भी समारोह पूर्व हो चुका है, लेकिन दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद भी गोशाला का संचालन ठीक ढंग नहीं हो पा रहा है। जिससे सड़कों पर घूम रहे लावारिस गोवंश की समस्या से लोगों को निजात नहीं मिल पाई है। गोखले मार्ग पर तो शाम ढलते ही लावारिस गोवंश एकत्र हो जाता है, जिससे सब्जी खरीदने के लिए पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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गोशाला संचालन की जिम्मेदारी संभाले आकृति सामाजिक संस्था की अध्यक्ष सुषमा जखमोला का कहना है कि गोशाला में 24 गोवंश रखने की व्यवस्था है। साथ ही चारे के लिए छोटा सा स्टोर है। गोशाला के संचालन के लिए व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं। जल्द ही सड़कों में घूम रहे लावारिस गोवंश को रेस्क्यू कर गोधाम में लाया जाएगा। बताया कि वर्तमान में पांच गाय गोधाम में रखी गई हैं।
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