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Kotdwar News: हाथियों ने रौंदी धान की फसल, कनस्तर बजाकर खदेड़े जंगल
Tue, 25 Aug 2026 06:58 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 25 Aug 2026 06:58 PM IST
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कोटद्वार। भाबर क्षेत्र के वार्ड नंबर-37 पश्चिमी झंडीचौड़ में सोमवार रात दो हाथियों ने खेतों में घुसकर काश्तकारों की खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। रातभर हाथियों ने खेतों में उत्पात मचाया। ग्रामीणों ने काफी देर बाद कनस्तर बजाकर और शोर मचाकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा। तब तक कई बीघा धान की फसल क्षतिग्रस्त हो चुकी थी।
वार्ड नंबर-37 के पार्षद सुखपाल शाह ने बताया कि सोमवार रात करीब 12 बजे दो हाथी कृषक संतोष सिंह और दीपा देवी के खेत में घुस गए। हाथियों ने उनके खेत में खड़ी करीब चार बीघा धान की फसल रौंद डाली। जंगल से सटे क्षेत्र के किसान लंबे समय से जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं।
हाथी धान और गेहूं समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही किसानों की जान के लिए भी खतरा बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि भाबर क्षेत्र के अधिकांश परिवार कृषि पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में तत्कालीन मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के प्रयास से क्षेत्र में सोलर फेंसिंग लगाई गई थी जिससे हाथियों की आबादी क्षेत्र में आवाजाही काफी हद तक रुक गई थी।
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रखरखाव के अभाव में सोलर फेंसिंग क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद से ग्रामीण लगातार हाथी सुरक्षा दीवार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और वर्ष 2022 में विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खंडूड़ी को भी सुरक्षा दीवार का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। पार्षद ने वन विभाग से रात्रि गश्त बढ़ाने और प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की है।
उधर, रेंजर विपिन चंद्र जोशी ने कहा कि झंडीचौड़ में हाथियों द्वारा धान की फसल रौंदने की सूचना मिली है। मौका मुआयना कर मुआवजे के लिए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त भी बढ़ा दी गई है।
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वार्ड नंबर-37 के पार्षद सुखपाल शाह ने बताया कि सोमवार रात करीब 12 बजे दो हाथी कृषक संतोष सिंह और दीपा देवी के खेत में घुस गए। हाथियों ने उनके खेत में खड़ी करीब चार बीघा धान की फसल रौंद डाली। जंगल से सटे क्षेत्र के किसान लंबे समय से जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं।
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हाथी धान और गेहूं समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही किसानों की जान के लिए भी खतरा बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि भाबर क्षेत्र के अधिकांश परिवार कृषि पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में तत्कालीन मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के प्रयास से क्षेत्र में सोलर फेंसिंग लगाई गई थी जिससे हाथियों की आबादी क्षेत्र में आवाजाही काफी हद तक रुक गई थी।
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रखरखाव के अभाव में सोलर फेंसिंग क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद से ग्रामीण लगातार हाथी सुरक्षा दीवार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और वर्ष 2022 में विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खंडूड़ी को भी सुरक्षा दीवार का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। पार्षद ने वन विभाग से रात्रि गश्त बढ़ाने और प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की है।
उधर, रेंजर विपिन चंद्र जोशी ने कहा कि झंडीचौड़ में हाथियों द्वारा धान की फसल रौंदने की सूचना मिली है। मौका मुआयना कर मुआवजे के लिए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त भी बढ़ा दी गई है।