{"_id":"6abd09e48b5e324f370a73fa","slug":"efforts-to-relocate-taidiya-village-have-resumed-kotdwar-news-c-49-1-sdrn1009-126976-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kotdwar News: तैड़िया गांव के विस्थापन की फिर शुरू हुई कवायद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kotdwar News: तैड़िया गांव के विस्थापन की फिर शुरू हुई कवायद
Wed, 30 Sep 2026 06:38 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Wed, 30 Sep 2026 06:38 PM IST
विज्ञापन
जमीन के बदले जमीन और हरिद्वार या देहरादून में पुनर्वास की मांग
कोटद्वार। कार्बेट नेशनल पार्क के कोर जोन में स्थित रिखणीखाल ब्लॉक के ग्राम पंचायत कांडा के सीमावर्ती तैड़िया गांव के विस्थापन और पुनर्वास की कवायद एक बार फिर शुरू हो गई है। वन विभाग के निर्देश पर ग्रामीणों ने सशर्त प्रस्ताव सौंपते हुए अब निर्णय वन विभाग और शासन पर छोड़ दिया है।
तैड़िया गांव में सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं अब तक नहीं पहुंची है। ग्रामीणों को कांडानाला से करीब पांच किलोमीटर घने जंगल के रास्ते गांव तक पहुंचना पड़ता है। वन्यजीवों के खतरे के बीच ग्रामीण लंबे समय से विस्थापन की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, तैड़ियाखाल वन चौकी से तैड़िया ख्यूणीख्यात वन चौकी तक वन मोटर मार्ग के लिए सर्वे भी हुआ था लेकिन सड़क नहीं बन सकी।
17 सितंबर को गांव पहुंचे कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग लैंसडौन के डीएफओ तरुण एस ने ग्रामीणों से विस्थापन का प्रस्ताव देने को कहा था। इसके बाद ग्रामीणों ने बैठक कर प्रस्ताव वन विभाग को सौंप दिया। तैड़िया विस्थापन एवं पुनर्वास संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. अंबिका प्रसाद ध्यानी और ग्राम प्रधान बिनीता ध्यानी ने बताया कि प्रस्ताव में प्रति परिवार जमीन के बदले जमीन, भवन निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, सुगम रास्ता, बिजली-पानी, समतल खेत और राजस्व गांव घोषित करने की मांग रखी गई है।
विज्ञापन
तीन दशक से चल रही विस्थापन की मांग
तैड़िया गांव के विस्थापन की मांग करीब तीन दशक पुरानी है। वर्ष 1992 में गांव को धारा-झिरना की तर्ज पर वन्यजीवों के लिए क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। 1998 में पार्क अधिकारियों ने गांव में बैठक कर विस्थापन पर चर्चा की लेकिन तब मामला आगे नहीं बढ़ा। वर्ष 2000 में ग्राम विस्थापन सभा गठित की गई। 2000-07 के बीच अधिकारियों ने कई स्तर पर कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को रामनगर-काशीपुर क्षेत्र में जमीन भी दिखाई। 2008-10 के बीच विभिन्न स्थानों का निरीक्षण हुआ। 2011-16 के बीच भी शासन स्तर पर फाइल आगे बढ़ी और सचिवालय में प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई लेकिन विस्थापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।
विज्ञापन
कोटद्वार। कार्बेट नेशनल पार्क के कोर जोन में स्थित रिखणीखाल ब्लॉक के ग्राम पंचायत कांडा के सीमावर्ती तैड़िया गांव के विस्थापन और पुनर्वास की कवायद एक बार फिर शुरू हो गई है। वन विभाग के निर्देश पर ग्रामीणों ने सशर्त प्रस्ताव सौंपते हुए अब निर्णय वन विभाग और शासन पर छोड़ दिया है।
तैड़िया गांव में सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं अब तक नहीं पहुंची है। ग्रामीणों को कांडानाला से करीब पांच किलोमीटर घने जंगल के रास्ते गांव तक पहुंचना पड़ता है। वन्यजीवों के खतरे के बीच ग्रामीण लंबे समय से विस्थापन की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, तैड़ियाखाल वन चौकी से तैड़िया ख्यूणीख्यात वन चौकी तक वन मोटर मार्ग के लिए सर्वे भी हुआ था लेकिन सड़क नहीं बन सकी।
विज्ञापन
17 सितंबर को गांव पहुंचे कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग लैंसडौन के डीएफओ तरुण एस ने ग्रामीणों से विस्थापन का प्रस्ताव देने को कहा था। इसके बाद ग्रामीणों ने बैठक कर प्रस्ताव वन विभाग को सौंप दिया। तैड़िया विस्थापन एवं पुनर्वास संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. अंबिका प्रसाद ध्यानी और ग्राम प्रधान बिनीता ध्यानी ने बताया कि प्रस्ताव में प्रति परिवार जमीन के बदले जमीन, भवन निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, सुगम रास्ता, बिजली-पानी, समतल खेत और राजस्व गांव घोषित करने की मांग रखी गई है।
विज्ञापन
तीन दशक से चल रही विस्थापन की मांग
तैड़िया गांव के विस्थापन की मांग करीब तीन दशक पुरानी है। वर्ष 1992 में गांव को धारा-झिरना की तर्ज पर वन्यजीवों के लिए क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। 1998 में पार्क अधिकारियों ने गांव में बैठक कर विस्थापन पर चर्चा की लेकिन तब मामला आगे नहीं बढ़ा। वर्ष 2000 में ग्राम विस्थापन सभा गठित की गई। 2000-07 के बीच अधिकारियों ने कई स्तर पर कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को रामनगर-काशीपुर क्षेत्र में जमीन भी दिखाई। 2008-10 के बीच विभिन्न स्थानों का निरीक्षण हुआ। 2011-16 के बीच भी शासन स्तर पर फाइल आगे बढ़ी और सचिवालय में प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई लेकिन विस्थापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।