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Kotdwar News: ऊर्जा निगम की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे उपभोक्ता
Tue, 25 Aug 2026 05:18 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 25 Aug 2026 05:18 PM IST
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कोटद्वार। ऊर्जा निगम की लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। निगम की ओर से निर्धारित समय पर बिल उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण कई उपभोक्ताओं को करीब चार माह बाद एक साथ बिजली के बिल थमा दिए गए। चार माह की खपत एक साथ जुड़ने से कई उपभोक्ताओं की यूनिट 800 से 900 तक पहुंच गई है जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
ऊर्जा निगम की ओर से सामान्य तौर पर हर दो माह में घरेलू बिजली का बिल उपलब्ध कराया जाता है। नियमानुसार 65 दिन के भीतर बिजली का बिल उपभोक्ता से वसूल किए जाने का प्रावधान है। वहीं स्मार्ट मीटर के मामले में 31 दिन बाद बिल उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में इस बार 65 दिन के बजाय करीब 120 दिन बाद बिल दिए गए। उपभोक्ताओं विनय कुमार, संतोष, सतीश चंद्र आदि का कहना है कि समय पर बिल मिलते तो बिजली की खपत अलग-अलग बिलों में बंट जाती और उन्हें कम स्लैब का लाभ मिलता। चार माह की खपत एक साथ जुड़ने से 500 यूनिट तक की खपत भी उच्च स्लैब में पहुंच रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में 20 फीसदी बिलिंग अभी भी लंबित
ऊर्जा निगम की अधिशासी अभियंता नंदिता अग्रवाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिलिंग की समस्या आ रही है। इसी कारण बिलिंग एजेंसी बदली गई है लेकिन नई एजेंसी भी समय पर बिलिंग नहीं कर पा रही है। वर्तमान में करीब 80 फीसदी उपभोक्ताओं के ही बिल बन पा रहे हैं। एजेंसी के साथ बैठक कर समय पर बिलिंग के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिल निर्धारित स्लैब के अनुसार ही बन रहे हैं और सोशल मीडिया पर बिलिंग को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
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ऊर्जा निगम की ओर से सामान्य तौर पर हर दो माह में घरेलू बिजली का बिल उपलब्ध कराया जाता है। नियमानुसार 65 दिन के भीतर बिजली का बिल उपभोक्ता से वसूल किए जाने का प्रावधान है। वहीं स्मार्ट मीटर के मामले में 31 दिन बाद बिल उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में इस बार 65 दिन के बजाय करीब 120 दिन बाद बिल दिए गए। उपभोक्ताओं विनय कुमार, संतोष, सतीश चंद्र आदि का कहना है कि समय पर बिल मिलते तो बिजली की खपत अलग-अलग बिलों में बंट जाती और उन्हें कम स्लैब का लाभ मिलता। चार माह की खपत एक साथ जुड़ने से 500 यूनिट तक की खपत भी उच्च स्लैब में पहुंच रही है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में 20 फीसदी बिलिंग अभी भी लंबित
ऊर्जा निगम की अधिशासी अभियंता नंदिता अग्रवाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिलिंग की समस्या आ रही है। इसी कारण बिलिंग एजेंसी बदली गई है लेकिन नई एजेंसी भी समय पर बिलिंग नहीं कर पा रही है। वर्तमान में करीब 80 फीसदी उपभोक्ताओं के ही बिल बन पा रहे हैं। एजेंसी के साथ बैठक कर समय पर बिलिंग के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिल निर्धारित स्लैब के अनुसार ही बन रहे हैं और सोशल मीडिया पर बिलिंग को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
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