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बैंक कर्मियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ भरी हुंकार, प्रदर्शन

Sat, 01 Feb 2020 10:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2020 10:24 PM IST
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Bank personnel protest against the center, protest
कोटद्वार में हड़ताल के दूसरे दिन पीएनबी के समक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते राष्ट्रीयक - फोटो : KOTDWAR
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैैंक यूनियन (यूएफबीयू) के आह्वान पर राष्ट्रीयकृत बैंकों की जारी रही। हड़ताल का व्यापक असर रहा। सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों ने शनिवार को पंजाब नेशनल बैंक के समक्ष प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। यूएफबीयू ने केंद्र सरकार को मजदूर और जनविरोधी बताते हुए नारेबाजी की। ऐलान किया कि सरकार नहीं चेती तो आगामी 11 मार्च को तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी। इसके बाद कार्रवाई नहीं हुई तो 1 अप्रैल से बैंक कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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शनिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी बदरीनाथ मार्ग स्थित पंजाब नेशनल बैंक के समक्ष एकत्र हुए, यहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मियों को मजबूरी में हड़ताल की राह पकड़नी पड़ रही है। आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नवंबर 2017 से लंबित वेतन पुनरीक्षण समझौते को जानबूझकर लागू नहीं कर रही है।
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प्रदर्शन करने वालों में यूएफबीयू के नगर संयोजक डीपीएस बिष्ट, उत्तरांचल बैंक इंपलाइज यूनियन के जिला सचिव वीरेंद्र सिंह रावत, ट्रेड यूनियन समन्वय समिति के अध्यक्ष जेपी बहुखंडी, शालिनी खर्कवाल, तपस्या, सरस्वती देवी, एनएस बिष्ट, रमेश नेगी, विकास रावत, अनिल सिंघल, सुनील रावत, प्रेमसिंह रावत, सिद्धार्थ सबिता, कुलदीप गुसाईं, सतीश केष्टवाल, डीएस भंडारी, दीपक मोहन भंडारी आदि मौजूद रहे।
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50 करोड़ का कारोबार प्रभावित, ग्राहक रहे परेशान
राष्ट्रीयकृत बैंकों की हड़ताल के चलते नगर में लगातार दूसरे दिन सभी बैंकों में करीब 50 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। बैंकों की हड़ताल के चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्राहकों को बैंक से बैरंग लौटना पड़ा।

ये हैं बैंक कर्मियों की मांगे
बैंक कर्मियों की प्रमुख मांगों में बैंक कर्मियों के पे-स्लिप में 20 फीसदी की वृद्धि , नए कर्मचारियों के लिए एनपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना बहाली, बैंक कर्मियों को देय विशेष भत्तों को मूल वेतन में समायोजित, वेतन के साथ ही पेंशन का रिवीजन, पारिवारिक पेंशन को 15 से बढ़ाकर 30 फीसदी , भोजन अवकाश और कार्य समय सभी बैंकों में एक समान निर्धारित करने, संविदा पर रखे गए कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देनेेेे, बैंकों का विलयीकरण करने के बजाय विस्तारीकरण करने, बैंकों का निजीकरण न करने, बैंकों की जमा योजनाओं पर ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी करने, बैंक खाताधारकों पर अनावश्यक सेवा शुल्क न लगाने, एनपीए की वसूली के लिए ठोस कानून बनाने, बैंकों में पर्याप्त स्टॉफ नियुक्त करना शामिल है।
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