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Kotdwar News: समितियों में पशु आहार खत्म, बाजार में दाम आसमान पर
Tue, 06 Jan 2026 06:51 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 06 Jan 2026 06:51 PM IST
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पशु पालकों को झेलनी पड़ रही दोहरी मार, सर्दियों में हरे चारे की रहती है कमी
चारा नहीं मिलने से पशुओं ने दूध भी देना कम किया
पुरोला। क्षेत्र की सहकारी समितियों में सरकार की ओर से पशु पालकों को पशुओं के लिए संतुलित आहार लंबे समय से नहीं मिलने के कारण वे परेशान हैं। सर्दियों में हरे चारे की पहले ही कमी रहती है। ऐसे में समितियों में पशु आहार की अनुपलब्धता ने पशु पालकों की मुश्किलें और बढ़ा दी है जिससे पशुपालक चिंतित हैं।
स्थानीय पशु पालक कवींद्र असवाल, रमेश असवाल, उपेंद्र रावत, लखन चौहान, ओमप्रकाश गैरोला ने बताया कि सर्दियों के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में हरा चारा लगभग समाप्त हो जाता है। साथ ही पशुपालन पूरी तरह से सूखे चारे और सरकारी समितियों से मिलने वाले पशु आहार पर निर्भर रहता है लेकिन वर्तमान में सहकारी समितियों में पशु आहार उपलब्ध न होने से पशुओं के भरण-पोषण में दिक्कत हो रही है। इससे वे दूध भी कम दे रहे हैं।
कई छोटे एवं सीमांत पशुपालक बाजार से महंगे दामों पर पशु दाना खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इससे उन्हें अपने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना कठिन हो गया है। कुछ पशुपालकों ने तो पशुओं की संख्या कम करने की मजबूरी भी जताई है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है।
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ग्रामीणों ने प्रशासन व पशुपालन विभाग से मांग की है कि शीघ्र ही सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में सरकारी पशु आहार उपलब्ध कराया जाए। वहीं, देवढुंग सहकारी समिति के सचिव गुरु प्रसाद नौडियाल ने बताया कि वर्तमान में पशु आहार की कमी समिति स्तर पर नहीं बल्कि आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ी है। हमारे पास पशु आहार प्लांट से ही नहीं आ रहे हैं जिससे समिति में पशु आहार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जैसे ही प्लांट से आपूर्ति शुरू होगी। पशु पालकों को तत्काल पशु आहार उपलब्ध करा दिया जाएगा।
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चारा नहीं मिलने से पशुओं ने दूध भी देना कम किया
पुरोला। क्षेत्र की सहकारी समितियों में सरकार की ओर से पशु पालकों को पशुओं के लिए संतुलित आहार लंबे समय से नहीं मिलने के कारण वे परेशान हैं। सर्दियों में हरे चारे की पहले ही कमी रहती है। ऐसे में समितियों में पशु आहार की अनुपलब्धता ने पशु पालकों की मुश्किलें और बढ़ा दी है जिससे पशुपालक चिंतित हैं।
स्थानीय पशु पालक कवींद्र असवाल, रमेश असवाल, उपेंद्र रावत, लखन चौहान, ओमप्रकाश गैरोला ने बताया कि सर्दियों के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में हरा चारा लगभग समाप्त हो जाता है। साथ ही पशुपालन पूरी तरह से सूखे चारे और सरकारी समितियों से मिलने वाले पशु आहार पर निर्भर रहता है लेकिन वर्तमान में सहकारी समितियों में पशु आहार उपलब्ध न होने से पशुओं के भरण-पोषण में दिक्कत हो रही है। इससे वे दूध भी कम दे रहे हैं।
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कई छोटे एवं सीमांत पशुपालक बाजार से महंगे दामों पर पशु दाना खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इससे उन्हें अपने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना कठिन हो गया है। कुछ पशुपालकों ने तो पशुओं की संख्या कम करने की मजबूरी भी जताई है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है।
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ग्रामीणों ने प्रशासन व पशुपालन विभाग से मांग की है कि शीघ्र ही सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में सरकारी पशु आहार उपलब्ध कराया जाए। वहीं, देवढुंग सहकारी समिति के सचिव गुरु प्रसाद नौडियाल ने बताया कि वर्तमान में पशु आहार की कमी समिति स्तर पर नहीं बल्कि आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ी है। हमारे पास पशु आहार प्लांट से ही नहीं आ रहे हैं जिससे समिति में पशु आहार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जैसे ही प्लांट से आपूर्ति शुरू होगी। पशु पालकों को तत्काल पशु आहार उपलब्ध करा दिया जाएगा।