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...आखिर कब होगा जिले का सपना साकार
Updated Sat, 03 Feb 2018 10:36 PM IST
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कोटद्वार। जनता पिछले 18 साल से जिले की मांग को लेकर मुखर है। जिले के आंदोलन की कमान पिछले एक दशक से कोटद्वार के वकीलों ने संभाली है। बार एसोसिएशन से जुड़े वकील प्रत्येक सप्ताह शनिवार को कचहरी परिसर में धरना एवं प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजते आ रहे हैं, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है।
कोटद्वार गढ़वाल का प्रवेश द्वार है। शहर की आबादी एक लाख 35 हजार पहुंच चुकी है। आबादी और शहर का दायरा बढ़ने से सरकार ने कोटद्वार नगर पालिका को नगर निगम तो बना दिया है, लेकिन 18 साल पुरानी जिलेे की मांग आज तक पूरी नहीं हुई। बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के लिहाज से कोटद्वार क्षेत्र गढ़वाल के दूसरे पर्वतीय शहरों की तुलना में काफी संपन्न है। बावजूद इसके सरकार स्थानीय लोगों की मांग की अनदेखी करती आ रही है। चुनाव के वक्त पार्टी और प्रत्याशी कोटद्वार जिला बनाने के मुद्दे पर वोट मांगते हैं। बार एसोसिएशन अध्यक्ष अजय कुमार पंत बताते हैं कि एक दशक से बार एसोसिएशन से जुड़े वकील इस आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। हर शनिवार को कचहरी परिसर में एकत्र होते हैं। सांकेतिक रूप से धरना एवं प्रदर्शन कर क्षेत्रीय जनता की मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाते हैं। बावजूद सरकार मौन है। उनका कहना है कि जिला नहीं बनने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस आंदोलन में स्थानीय लोगों के अलावा नागरिक मंच एवं वरिष्ठ नागरिक संगठन के पदाधिकारी भी भागीदारी करते हैं।
कोट-फोटो
भौगोलिक एवं आबादी के लिहाज से कोटद्वार को जिला बनाना चाहिए। जिला बनने से स्थानीय लोगों की काफी परेशानियां दूर हो जाएंगी। वन मंत्री हरक सिंह रावत ने भी स्थानीय जनता की भावनाओं के साथ छल किया। चुनाव से पहले कोटद्वार को जिला बनाने का वादा कर वोट मांगे और चुनाव जीतने के बाद भूल गए। हरक सिंह रावत को जब-जब उनका चुनावी वादा याद दिलाया सिर्फ आश्वासन मिला है। -अजय कुमार पंत, अध्यक्ष कोटद्वार बार एसोसिएशन
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110 किमी लगानी पड़ती है दौड़
कोटद्वार से जिला मुख्यालय पौड़ी 110 किमी दूर है। पौड़ी जाने के लिए पहाड़ी दुर्गम रास्ता है। सार्वजनिक परिवहन की भी सुविधाओं का अभाव है। जिला मुख्यालय से पहले कोटद्वार के लोग राजधानी देहरादून पहुंच जाते हैं। जिला मुख्यालय से संबंधित कामकाज के लिए कोटद्वार के लोगों को पैसा और समय की बर्बादी करनी पड़ती है। कई बार अधिकारी मुख्यालय में नहीं मिलते हैं। जिस कारण परेशानी बढ़ जाती है।
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कोटद्वार गढ़वाल का प्रवेश द्वार है। शहर की आबादी एक लाख 35 हजार पहुंच चुकी है। आबादी और शहर का दायरा बढ़ने से सरकार ने कोटद्वार नगर पालिका को नगर निगम तो बना दिया है, लेकिन 18 साल पुरानी जिलेे की मांग आज तक पूरी नहीं हुई। बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के लिहाज से कोटद्वार क्षेत्र गढ़वाल के दूसरे पर्वतीय शहरों की तुलना में काफी संपन्न है। बावजूद इसके सरकार स्थानीय लोगों की मांग की अनदेखी करती आ रही है। चुनाव के वक्त पार्टी और प्रत्याशी कोटद्वार जिला बनाने के मुद्दे पर वोट मांगते हैं। बार एसोसिएशन अध्यक्ष अजय कुमार पंत बताते हैं कि एक दशक से बार एसोसिएशन से जुड़े वकील इस आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। हर शनिवार को कचहरी परिसर में एकत्र होते हैं। सांकेतिक रूप से धरना एवं प्रदर्शन कर क्षेत्रीय जनता की मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाते हैं। बावजूद सरकार मौन है। उनका कहना है कि जिला नहीं बनने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस आंदोलन में स्थानीय लोगों के अलावा नागरिक मंच एवं वरिष्ठ नागरिक संगठन के पदाधिकारी भी भागीदारी करते हैं।
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भौगोलिक एवं आबादी के लिहाज से कोटद्वार को जिला बनाना चाहिए। जिला बनने से स्थानीय लोगों की काफी परेशानियां दूर हो जाएंगी। वन मंत्री हरक सिंह रावत ने भी स्थानीय जनता की भावनाओं के साथ छल किया। चुनाव से पहले कोटद्वार को जिला बनाने का वादा कर वोट मांगे और चुनाव जीतने के बाद भूल गए। हरक सिंह रावत को जब-जब उनका चुनावी वादा याद दिलाया सिर्फ आश्वासन मिला है। -अजय कुमार पंत, अध्यक्ष कोटद्वार बार एसोसिएशन
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110 किमी लगानी पड़ती है दौड़
कोटद्वार से जिला मुख्यालय पौड़ी 110 किमी दूर है। पौड़ी जाने के लिए पहाड़ी दुर्गम रास्ता है। सार्वजनिक परिवहन की भी सुविधाओं का अभाव है। जिला मुख्यालय से पहले कोटद्वार के लोग राजधानी देहरादून पहुंच जाते हैं। जिला मुख्यालय से संबंधित कामकाज के लिए कोटद्वार के लोगों को पैसा और समय की बर्बादी करनी पड़ती है। कई बार अधिकारी मुख्यालय में नहीं मिलते हैं। जिस कारण परेशानी बढ़ जाती है।