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गोष्ठी में वन संपदा को आग से बचाने के लिए जन सहभागिता जरूरी: एसएम जोशी
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लैंसडौन। भूमि संरक्षण वन प्रभाग की ओर से आयोजित वनाग्नि गोष्ठी में वन संपदा के संरक्षण के लिए सामूहिक जनसहभागिता की जरूरत पर जोर दिया गया। इस मौके पर वनों को आग से बचाने के लिए मिल-जुलकर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया गया।
भूमि संरक्षण वन प्रभाग के कार्यालय परिसर में आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि निदेशक जायका परियोजना उत्तराखंड देहरादून एसएम जोशी ने कहा कि वनाग्नि को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। प्रभागीय वनाधिकारी इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि जनसहभागिता से वनाग्नि पर काबू पाना संभव है। उत्तराखंड वनाग्नि सुरक्षा संयोजक किशन चंद्र दानू एवं पार्टी ने वनाग्नि की रोकथाम व वनाग्नि की घटनाओं को नुक्कड़ नाटक व लोकगीतों के माध्यम से उजागर किया।
इस मौके पर उपप्रभागीय वनाधिकारी गिरीश चंद्र बेलवाल, वन पंचायत सरपंच अमोली कुतुबद्दीन, सरपंच कलवाड़ी सुभाष नेगी सहित कई वन क्षेत्र जयहरीखाल, मटियाली, चैलूसैंण, ताल गौहरी, भृगुखाल, रिखणीखाल व लैंसडौन के वनाक्षेत्राधिकारियों ने विचार रखे।
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भूमि संरक्षण वन प्रभाग के कार्यालय परिसर में आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि निदेशक जायका परियोजना उत्तराखंड देहरादून एसएम जोशी ने कहा कि वनाग्नि को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। प्रभागीय वनाधिकारी इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि जनसहभागिता से वनाग्नि पर काबू पाना संभव है। उत्तराखंड वनाग्नि सुरक्षा संयोजक किशन चंद्र दानू एवं पार्टी ने वनाग्नि की रोकथाम व वनाग्नि की घटनाओं को नुक्कड़ नाटक व लोकगीतों के माध्यम से उजागर किया।
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इस मौके पर उपप्रभागीय वनाधिकारी गिरीश चंद्र बेलवाल, वन पंचायत सरपंच अमोली कुतुबद्दीन, सरपंच कलवाड़ी सुभाष नेगी सहित कई वन क्षेत्र जयहरीखाल, मटियाली, चैलूसैंण, ताल गौहरी, भृगुखाल, रिखणीखाल व लैंसडौन के वनाक्षेत्राधिकारियों ने विचार रखे।
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