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बजट खपाने को गदेरे में बन रही एक और सुरक्षा दीवार
Updated Tue, 27 Mar 2018 10:47 PM IST
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किशनपुर/कोटद्वार। भाबर की हल्दूखाता पट्टी के कई गांवों के बीच से गुजर रहा तेलीस्रोत गदेरा आगामी बरसात में एक बार फिर से तबाही का कारण बनेगा। जो गलतियां पिछली बार सिंचाई विभाग ने की थीं, वही गलती इस बार लोक निर्माण विभाग का दुगड्डा खंड यहां दोहरा रहा है। विभाग यहां सिंचाई विभाग के तारजालों को उखाड़कर गदेरे में जबरन एक और सुरक्षा दीवार बनाने में जुटा है। इससे जहां एक ओर गदेरा संकरा हो गया है, वहीं गदेरे में खुदाई का मलबा एक और आपदा को आमंत्रण दे रहा है। इससे निचले गांवों के लोगों को गत वर्ष 3/4 अगस्त को आई आपदा का डर सता रहा है।
कण्वाश्रम और उदयरामपुर के जंगलों से निकला तेेलीस्रोत गदेरा तेलीबाड़ा, मगनपुर, रामदयालपुर, झंडीचौड़ उत्तरी, शीतलपुर गांवों के बीच से गुजरता है। हर साल यह गदेरा बरसात में उफनाकर बहता है और आसपास के गांवों की खेती को नुकसान पहुंचाता है। बाढ़ सुरक्षा के लिए गत वर्ष सिंचाई खंड की ओर से इस गदेरे में करीब 3.62 करोड़ से अधिक लागत की सुरक्षा दीवारें और तारजाल बिछाए गए थे। उन्हें गत वर्ष की आपदा ने नुकसान पहुंचाया। पिछली बार सिंचाई विभाग ने सुरक्षा दीवार बनाकर मलबा गदेरे में ही छोड़ दिया था, जो बरसात में आपदा का एक बड़ा कारण बना। अतिक्रमण के कारण पहले से ही संकरे हो चुके इस गदेरे में लोनिवि विभाग सड़क सुरक्षा के नाम पर सुरक्षा दीवार के साथ एक और सुरक्षा दीवार का निर्माण करवा रहा है। इसके लिए उसने सिंचाई विभाग के तारजाल भी उखाड़ दिए हैं। सूचना मिलते पर सिंचाई विभाग की ओर से लोनिवि को पत्र भी भेजा गया, लेकिन लोनिवि बजट खपाने पर आमादा है।
रामदयालपुर निवासी दाताराम केष्टवाल, गिरीश चंद्र गौड़, वीरेंद्र गौड़, केशर सिंह नेगी, सुमन गौड़, नंदन सिंह मेहरा, विशंबर सिंह का कहना है कि पिछली बार की आपदा में तेलीस्रोत गदेरे का रुख उनके गांव की ओर हो गया। इससे बड़े पैमाने पर खेत, खलिहान और भवनों को नुकसान हुआ। उन्होंने गदेरे की चौड़ाई बढ़ाने, अतिक्रमण के साथ ही मलबा हटाने की मांग की है।
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उधर, सिंचाई विभाग के ईई सुधीर मोहन ने बताया कि लोनिवि को उक्त कार्य रोकने के लिए पूर्व में पत्र भेजा जा चुका है, जिसमें संयुक्त निरीक्षण करने का आग्रह किया गया है।
तेलीस्रोत गदेरे में लोनिवि की ओर से करवाए जा रहे कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने के आदेश सहायक अभियंता को दिए गए हैं। ठेकेदार को गदेरे में पड़े खुदाई के मलबे को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
-निर्भय सिंह, ईई लोनिवि दुगड्डा।
-फोटो
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कण्वाश्रम और उदयरामपुर के जंगलों से निकला तेेलीस्रोत गदेरा तेलीबाड़ा, मगनपुर, रामदयालपुर, झंडीचौड़ उत्तरी, शीतलपुर गांवों के बीच से गुजरता है। हर साल यह गदेरा बरसात में उफनाकर बहता है और आसपास के गांवों की खेती को नुकसान पहुंचाता है। बाढ़ सुरक्षा के लिए गत वर्ष सिंचाई खंड की ओर से इस गदेरे में करीब 3.62 करोड़ से अधिक लागत की सुरक्षा दीवारें और तारजाल बिछाए गए थे। उन्हें गत वर्ष की आपदा ने नुकसान पहुंचाया। पिछली बार सिंचाई विभाग ने सुरक्षा दीवार बनाकर मलबा गदेरे में ही छोड़ दिया था, जो बरसात में आपदा का एक बड़ा कारण बना। अतिक्रमण के कारण पहले से ही संकरे हो चुके इस गदेरे में लोनिवि विभाग सड़क सुरक्षा के नाम पर सुरक्षा दीवार के साथ एक और सुरक्षा दीवार का निर्माण करवा रहा है। इसके लिए उसने सिंचाई विभाग के तारजाल भी उखाड़ दिए हैं। सूचना मिलते पर सिंचाई विभाग की ओर से लोनिवि को पत्र भी भेजा गया, लेकिन लोनिवि बजट खपाने पर आमादा है।
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रामदयालपुर निवासी दाताराम केष्टवाल, गिरीश चंद्र गौड़, वीरेंद्र गौड़, केशर सिंह नेगी, सुमन गौड़, नंदन सिंह मेहरा, विशंबर सिंह का कहना है कि पिछली बार की आपदा में तेलीस्रोत गदेरे का रुख उनके गांव की ओर हो गया। इससे बड़े पैमाने पर खेत, खलिहान और भवनों को नुकसान हुआ। उन्होंने गदेरे की चौड़ाई बढ़ाने, अतिक्रमण के साथ ही मलबा हटाने की मांग की है।
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उधर, सिंचाई विभाग के ईई सुधीर मोहन ने बताया कि लोनिवि को उक्त कार्य रोकने के लिए पूर्व में पत्र भेजा जा चुका है, जिसमें संयुक्त निरीक्षण करने का आग्रह किया गया है।
तेलीस्रोत गदेरे में लोनिवि की ओर से करवाए जा रहे कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने के आदेश सहायक अभियंता को दिए गए हैं। ठेकेदार को गदेरे में पड़े खुदाई के मलबे को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
-निर्भय सिंह, ईई लोनिवि दुगड्डा।
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