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उतराखंड की लोकभाषाओं को बचाने को आगे आए प्रदेश सरकार
Updated Wed, 21 Feb 2018 10:48 PM IST
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कोटद्वार। धाद लोकभाषा एकांश संस्था के पदाधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर उत्तराखंड की लोकभाषाओं को बचाने की मांग की है। उन्होंने उत्तराखंड की लोकभाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
बुधवार को कोटद्वार तहसील में धाद लोकभाषा एकांश संस्था के संस्थापक लोकेश नवानी के नेतृत्व में सभी पदाधिकारी एकत्रित हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा कि प्रदेेश सरकार को उत्तराखंड की भाषायी विरासत को बचाने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। कहा कि उत्तराखंड राज्य देश का विविध लोकभाषाओं वाला क्षेत्र है। यहां अनेक प्रकार की भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन से यहां की लोकभाषाएं विलुप्त होने की कगार पर हैं। प्रदेश सरकार को इन लोकभाषाओं के संरक्षण के लिए आगे आना होगा। कहा कि चुनाव प्रसार में प्रधानमंत्री ने जनता को गढ़वाली भाषा में संबोधित किया था। उन्होंने प्रदेश सरकार से उत्तराखंड की लोकभाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने, भारतीय भाषाओं में अध्ययन एवं शोध करने के लिए राष्ट्रीय लोकभाषा अकादमी की स्थापना करने, विलुप्त होती लोकभाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए एक दिन लोकभाषा दिवस घोषित करने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने में धाद लोकभाषा एकांश केंद्रीय अध्यक्ष मधुसूदन थपलियाल, केंद्रीय सचिव शांति प्रकाश जिज्ञासु, बीना कंडारी, जगमोहन सिंह बिष्ट, राकेश मोहन ध्यानी, प्रेमलता सजवाण, सोहन मैंदोला, नंदा डबराल, उषा शर्मा, लक्ष्मी रावत, राजेश खली, अंबिका प्रसाद ध्यानी, ऋद्धि भट्ट, जगदंबा प्रसाद कोटनाला पंकज ध्यानी आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को कोटद्वार तहसील में धाद लोकभाषा एकांश संस्था के संस्थापक लोकेश नवानी के नेतृत्व में सभी पदाधिकारी एकत्रित हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा कि प्रदेेश सरकार को उत्तराखंड की भाषायी विरासत को बचाने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। कहा कि उत्तराखंड राज्य देश का विविध लोकभाषाओं वाला क्षेत्र है। यहां अनेक प्रकार की भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन से यहां की लोकभाषाएं विलुप्त होने की कगार पर हैं। प्रदेश सरकार को इन लोकभाषाओं के संरक्षण के लिए आगे आना होगा। कहा कि चुनाव प्रसार में प्रधानमंत्री ने जनता को गढ़वाली भाषा में संबोधित किया था। उन्होंने प्रदेश सरकार से उत्तराखंड की लोकभाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने, भारतीय भाषाओं में अध्ययन एवं शोध करने के लिए राष्ट्रीय लोकभाषा अकादमी की स्थापना करने, विलुप्त होती लोकभाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए एक दिन लोकभाषा दिवस घोषित करने की मांग की है।
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ज्ञापन सौंपने में धाद लोकभाषा एकांश केंद्रीय अध्यक्ष मधुसूदन थपलियाल, केंद्रीय सचिव शांति प्रकाश जिज्ञासु, बीना कंडारी, जगमोहन सिंह बिष्ट, राकेश मोहन ध्यानी, प्रेमलता सजवाण, सोहन मैंदोला, नंदा डबराल, उषा शर्मा, लक्ष्मी रावत, राजेश खली, अंबिका प्रसाद ध्यानी, ऋद्धि भट्ट, जगदंबा प्रसाद कोटनाला पंकज ध्यानी आदि मौजूद रहे।
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