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कोटद्वार भाबर में बिछेगी सीवर लाइन
Updated Fri, 05 Oct 2018 10:56 PM IST
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कोटद्वार। नगर निगम बनने के बाद फिर से कोटद्वार में सीवर लाइन बिछाने की कवायद शुरू हो गई है। इस बार नगर निगम में शामिल भाबर के 73 गांव भी शामिल किए जा रहे हैं। जल निगम की ओर से नगर निगम क्षेत्र में सीवरेज सिस्टम विकसित करने के लिए प्रारंभिक प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द ही मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा।
कोटद्वार नगर में 1968 में बिछी सीवर लाइन जीर्णशीर्ण हालत में पहुंच चुकी है। करीब 42 साल पहले बिछी यह लाइन कोटद्वार शहर को भी पूरी तरह से कवर नहीं कर पा रही थी। यह लाइन आए दिन ओवरफ्लो होकर परेशानी का सबब भी बनी हुई है। नगर निगम बनने के बाद कोटद्वार में एक बार फिर सीवरेज सिस्टम के पुनर्गठन की कवायद शुरू हो गई है। इस बार सीवरेज सिस्टम का प्रस्ताव कोटद्वार शहर के साथ ही नगर निगम में शामिल हुए भाबर के 73 गांवों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
तीन बार पहले भी भेजे गए प्रस्ताव, नहीं मिली मंजूरी
पिछले दस वर्षों में कोटद्वार शहर ही नहीं, आसपास के क्षेत्र में भी आबादी का घनत्व तेजी से बढ़ा है। आबादी बढ़ने के साथ ही सीवरेज सिस्टम की दिक्कतें भी बढ़ी हैं। चुनाव के दौरान हर बार सीवर लाइन के पुनर्गठन की बातें उठती रहीं, आश्वासन भी मिलते रहे, लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। वर्ष 2004-05 में सबसे पहले कोटद्वार शहर के लिए सीवर लाइन का पुनर्गठन प्रस्ताव तैयार किया गया। इसकी अनुमानित लागत 3289.28 लाख रुपये थी। इसके बाद वर्ष 2010 में जल निगम ने एक बार फिर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट और सीवर लाइन के लिए करीब प्राक्कलन तैयार कर गंगा रिवर बेसिन के तहत केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया। गंगा तट से जुड़ा शहर न होने के कारण तब इसे स्वीकृति नहीं मिल सकी। वर्ष 2012 में तीसरी बार फिर प्रस्ताव बनाकर भेजा गया, जिसकी लागत बढ़कर करीब 8779.40 लाख रुपये हो गई, लेकिन इसे भी शासन से मंजूरी नहीं मिल सकी।
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नगर निगम बनने के बाद कोटद्वार भाबर में सीवरेज की व्यवस्था के लिए प्राथमिक प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है। इसे मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।
-सरिता गुप्ता, ईई उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास निगम कोटद्वार।
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कोटद्वार नगर में 1968 में बिछी सीवर लाइन जीर्णशीर्ण हालत में पहुंच चुकी है। करीब 42 साल पहले बिछी यह लाइन कोटद्वार शहर को भी पूरी तरह से कवर नहीं कर पा रही थी। यह लाइन आए दिन ओवरफ्लो होकर परेशानी का सबब भी बनी हुई है। नगर निगम बनने के बाद कोटद्वार में एक बार फिर सीवरेज सिस्टम के पुनर्गठन की कवायद शुरू हो गई है। इस बार सीवरेज सिस्टम का प्रस्ताव कोटद्वार शहर के साथ ही नगर निगम में शामिल हुए भाबर के 73 गांवों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
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तीन बार पहले भी भेजे गए प्रस्ताव, नहीं मिली मंजूरी
पिछले दस वर्षों में कोटद्वार शहर ही नहीं, आसपास के क्षेत्र में भी आबादी का घनत्व तेजी से बढ़ा है। आबादी बढ़ने के साथ ही सीवरेज सिस्टम की दिक्कतें भी बढ़ी हैं। चुनाव के दौरान हर बार सीवर लाइन के पुनर्गठन की बातें उठती रहीं, आश्वासन भी मिलते रहे, लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। वर्ष 2004-05 में सबसे पहले कोटद्वार शहर के लिए सीवर लाइन का पुनर्गठन प्रस्ताव तैयार किया गया। इसकी अनुमानित लागत 3289.28 लाख रुपये थी। इसके बाद वर्ष 2010 में जल निगम ने एक बार फिर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट और सीवर लाइन के लिए करीब प्राक्कलन तैयार कर गंगा रिवर बेसिन के तहत केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया। गंगा तट से जुड़ा शहर न होने के कारण तब इसे स्वीकृति नहीं मिल सकी। वर्ष 2012 में तीसरी बार फिर प्रस्ताव बनाकर भेजा गया, जिसकी लागत बढ़कर करीब 8779.40 लाख रुपये हो गई, लेकिन इसे भी शासन से मंजूरी नहीं मिल सकी।
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नगर निगम बनने के बाद कोटद्वार भाबर में सीवरेज की व्यवस्था के लिए प्राथमिक प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है। इसे मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।
-सरिता गुप्ता, ईई उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास निगम कोटद्वार।