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आजादी के सात दशक बाद भी सड़क सुविधा से महरूम लोग
Updated Thu, 21 Jun 2018 10:28 PM IST
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कोटद्वार। द्वारीखाल ब्लाक के चार गांव के लिए सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को आज भी रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए छह-आठ किमी का पैदल सफर तय कर सिलोगी बाजार और मोटर मार्ग तक पहुंचते हैं। स्कूली बच्चे भी प्रतिदिन इतनी ही दूरी तय कर सिलोगी पहुंचते हैं।
वर्ष 2007 में ब्लाक के जल्ली, कड़थि, घनसाली, खरखोना गांव को सड़क से जोड़ने के लिए सिलोगी- घनसाली मोटर मार्ग को स्वीकृति प्रदान करते हुए 296 लाख की धनराशि आवंटित की, लेकिन वन अधिनियम का पेंच फंसने के कारण मार्ग निर्माण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। स्वीकृत सड़क का करीब 1.53 हेक्टेयर भूमि वन क्षेत्र की है, जिससे सड़क नहीं बन पा रही है।
ग्राम कड़थि निवासी हेमवंत सिलस्वाल, राजेंद्र जखमोला ने बताया कि सड़क नहीं होने की वजह से बीमार को ग्रामीण कुर्सी, डोली, कंधे या खच्चर पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाते हैं। उधर, लोनिवि लैंसडौन के अधिशासी अभियंता अरुण कुमार बहुखंडी ने कहा कि वन अधिनियमों की बाध्यता के चलते सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद मार्ग का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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वर्ष 2007 में ब्लाक के जल्ली, कड़थि, घनसाली, खरखोना गांव को सड़क से जोड़ने के लिए सिलोगी- घनसाली मोटर मार्ग को स्वीकृति प्रदान करते हुए 296 लाख की धनराशि आवंटित की, लेकिन वन अधिनियम का पेंच फंसने के कारण मार्ग निर्माण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। स्वीकृत सड़क का करीब 1.53 हेक्टेयर भूमि वन क्षेत्र की है, जिससे सड़क नहीं बन पा रही है।
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ग्राम कड़थि निवासी हेमवंत सिलस्वाल, राजेंद्र जखमोला ने बताया कि सड़क नहीं होने की वजह से बीमार को ग्रामीण कुर्सी, डोली, कंधे या खच्चर पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाते हैं। उधर, लोनिवि लैंसडौन के अधिशासी अभियंता अरुण कुमार बहुखंडी ने कहा कि वन अधिनियमों की बाध्यता के चलते सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद मार्ग का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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