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आर्मी भर्ती के दौरान दबोचे गए यूपी के आठ मुन्ना भाई, एक भागा-ᅫ ̄ᅳU₩ᅫ↑
Updated Sun, 08 Apr 2018 10:43 PM IST
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कोटद्वार। यहां सेना की भर्ती में रविवार को भर्ती अधिकारियों ने उत्तरप्रदेश के आठ युवकों को फर्जी दस्तावेजों के साथ धर दबोचा। एक युवक भागने में कामयाब रहा। पकड़े गए युवकों ने पूछताछ में बताया कि दलाल ने उन्हें फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए थे और भर्ती होने के बाद उन्हें दलाल को तीन लाख रुपये देने थे।
कौड़िया स्थित विक्टोरिया क्रास गबर सिंह कैंप में चल रही सेना की भर्ती में रविवार को ऑन लाइन प्रवेश पत्र के बार कोड की जांच की जा रही थी। तभी स्कैनिंग में एक युवक की फोटो में अंतर दिखाई देने से भर्ती अधिकारी दंग रह गए। बार कोड में किसी दूसरे युवक की फोटो थी जबकि प्रवेश पत्र में भर्ती होने पहुंचे युवक की फोटो लगी हुई थी। युवक से पूछताछ की गई तो उसकी निशानदेही पर पांच अन्य युवक भी ऐसे पकड़े गए जो फर्जी दस्तावेजों के साथ भर्ती में पहुंचे थे। इनके अलावा दो युवक पहाड़ी हावभाव नहीं होने पर धर दबोचे गए। इनमें से दो मुन्ना भाई दौड़ में भी पास हो चुके थे। सेना के अधिकारियों की कड़ी पूछताछ के बाद आठ युवाओं ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जबकि नौवां युवक भागने में कामयाब रहा।
सेना भर्ती निदेशक कर्नल आरएस चट्ठा ने बताया कि युवाओं के पास मिले दस्तावेजों को पहली बार देखने मेें ही मूल निवास प्रमाणपत्र, प्रधान द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र और आधार कार्ड फर्जी पाए गए हैं। सख्ती के साथ पूछताछ करने पर युवकों ने स्वीकार किया कि उन्हें दलाल ने भर्ती होने का झांसा दिया था। उन्होंने दलाल को शुरुआत में पांच हजार रुपये दिए थे, जिसके एवज में उन्हें चमोली जिले के फर्जी कागजात उपलब्ध कराए गए थे। भर्ती होने के बाद दलाल को उन्हें तीन लाख रुपये देने थे। पूछताछ में युवकों ने अपने नाम सुनील कुमार पुत्र देवकी प्रसाद, भोले सिंह पुत्र सुखपाल सिंह, नरेंद्र कुमार पुत्र ओमपाल सिंह, दीपांशु शर्मा पुत्र नरेश चंद्र शर्मा, पंकज कुमार पुत्र हरपाल सिंह, गौरभ शर्मा पुत्र भगवान शर्मा (सभी बुलंदशहर निवासी) व नितिन भाटी पुत्र सत्यपाल सिंह और कुशलपाल सिंह पुत्र छतर सिंह (निवासी गौतम बुद्ध नगर) बताया। कर्नल चट्ठा ने बताया कि युवकों के सभी दस्तावेज उत्तराखंड और यूपी भर्ती जोन को भेज दिए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है।
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कौड़िया स्थित विक्टोरिया क्रास गबर सिंह कैंप में चल रही सेना की भर्ती में रविवार को ऑन लाइन प्रवेश पत्र के बार कोड की जांच की जा रही थी। तभी स्कैनिंग में एक युवक की फोटो में अंतर दिखाई देने से भर्ती अधिकारी दंग रह गए। बार कोड में किसी दूसरे युवक की फोटो थी जबकि प्रवेश पत्र में भर्ती होने पहुंचे युवक की फोटो लगी हुई थी। युवक से पूछताछ की गई तो उसकी निशानदेही पर पांच अन्य युवक भी ऐसे पकड़े गए जो फर्जी दस्तावेजों के साथ भर्ती में पहुंचे थे। इनके अलावा दो युवक पहाड़ी हावभाव नहीं होने पर धर दबोचे गए। इनमें से दो मुन्ना भाई दौड़ में भी पास हो चुके थे। सेना के अधिकारियों की कड़ी पूछताछ के बाद आठ युवाओं ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जबकि नौवां युवक भागने में कामयाब रहा।
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सेना भर्ती निदेशक कर्नल आरएस चट्ठा ने बताया कि युवाओं के पास मिले दस्तावेजों को पहली बार देखने मेें ही मूल निवास प्रमाणपत्र, प्रधान द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र और आधार कार्ड फर्जी पाए गए हैं। सख्ती के साथ पूछताछ करने पर युवकों ने स्वीकार किया कि उन्हें दलाल ने भर्ती होने का झांसा दिया था। उन्होंने दलाल को शुरुआत में पांच हजार रुपये दिए थे, जिसके एवज में उन्हें चमोली जिले के फर्जी कागजात उपलब्ध कराए गए थे। भर्ती होने के बाद दलाल को उन्हें तीन लाख रुपये देने थे। पूछताछ में युवकों ने अपने नाम सुनील कुमार पुत्र देवकी प्रसाद, भोले सिंह पुत्र सुखपाल सिंह, नरेंद्र कुमार पुत्र ओमपाल सिंह, दीपांशु शर्मा पुत्र नरेश चंद्र शर्मा, पंकज कुमार पुत्र हरपाल सिंह, गौरभ शर्मा पुत्र भगवान शर्मा (सभी बुलंदशहर निवासी) व नितिन भाटी पुत्र सत्यपाल सिंह और कुशलपाल सिंह पुत्र छतर सिंह (निवासी गौतम बुद्ध नगर) बताया। कर्नल चट्ठा ने बताया कि युवकों के सभी दस्तावेज उत्तराखंड और यूपी भर्ती जोन को भेज दिए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है।
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