{"_id":"5a9d78174f1c1baa1b8bac07","slug":"71520269335-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जान जोखिम में डालकर एनएच 534 पर सफर कर रहे मुसाफिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जान जोखिम में डालकर एनएच 534 पर सफर कर रहे मुसाफिर
Updated Mon, 05 Mar 2018 10:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुगड्डा। एनएच-534 पर कई स्थानों पर पहाड़िया धंसने से डेंजर जोन बन गए हैं। इन डेंजर जोनों पर मुसाफिर जान जोखिम में डालकर वाहनों में सफर कर रहे हैं, लेकिन विभाग इसको ठीक कराने के लिए लापरवाह बना हुआ है।
विधानसभा यमकेश्वर के आमसौड़ क्षेत्र में विगत दो दशक से पहाड़ी धंसने से राष्ट्रीय राजमार्ग-534 का करीब दो सौ मीटर का हिस्सा तंग है, जो वाहनों की आवाजाही के लिए असुविधाजनक बना है। एक दशक से राजमार्ग का नदी से सटा हुआ भाग सुरक्षा दीवार धंसने से दुर्घटना को न्यौता दे रहा है। सिंगल वाहन का डेंजर जोन से गुजरना भी खतरनाक बना हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक भारी, हल्के वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। सामरिक दृष्टि से भी उक्त मार्ग महत्वपूर्ण है। लैंसडौन में गढ़वाल राइफल सेंटर का मुख्यालय व प्रशिक्षण केंद्र होने के कारण सैनिक वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 119 रुड़की डिवीजन के अंतर्गत 2001 में मोटर मार्ग का सुधारीकरण कार्य का शुभारंभ किया गया था। कुछ समय बाद उक्त राष्ट्रीय राजमार्ग को 534 का दर्जा देकर धुमाकोट को स्थानांतरित किया गया। एनएच-534 धुमाकोट के अवर अभियंता अरविंद जोशी ने बताया कि वर्ष 2016 में आमसौड़ के निकट खोह नदी में मार्ग की सुरक्षा दीवार के लिए 3.25 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है। खोह नदी में सुरक्षा दीवार की बुनियाद खोदने के लिए जेसीबी ले जाने की वन विभाग से अनुमति मांगी गई थी, जो कि विभाग ने नहीं दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण संवेदनशील स्थलों में मरम्मत कार्यो के लिए प्रयासरत है।
विज्ञापन
फोटो
विज्ञापन
विधानसभा यमकेश्वर के आमसौड़ क्षेत्र में विगत दो दशक से पहाड़ी धंसने से राष्ट्रीय राजमार्ग-534 का करीब दो सौ मीटर का हिस्सा तंग है, जो वाहनों की आवाजाही के लिए असुविधाजनक बना है। एक दशक से राजमार्ग का नदी से सटा हुआ भाग सुरक्षा दीवार धंसने से दुर्घटना को न्यौता दे रहा है। सिंगल वाहन का डेंजर जोन से गुजरना भी खतरनाक बना हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक भारी, हल्के वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। सामरिक दृष्टि से भी उक्त मार्ग महत्वपूर्ण है। लैंसडौन में गढ़वाल राइफल सेंटर का मुख्यालय व प्रशिक्षण केंद्र होने के कारण सैनिक वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
विज्ञापन
राष्ट्रीय राजमार्ग 119 रुड़की डिवीजन के अंतर्गत 2001 में मोटर मार्ग का सुधारीकरण कार्य का शुभारंभ किया गया था। कुछ समय बाद उक्त राष्ट्रीय राजमार्ग को 534 का दर्जा देकर धुमाकोट को स्थानांतरित किया गया। एनएच-534 धुमाकोट के अवर अभियंता अरविंद जोशी ने बताया कि वर्ष 2016 में आमसौड़ के निकट खोह नदी में मार्ग की सुरक्षा दीवार के लिए 3.25 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है। खोह नदी में सुरक्षा दीवार की बुनियाद खोदने के लिए जेसीबी ले जाने की वन विभाग से अनुमति मांगी गई थी, जो कि विभाग ने नहीं दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण संवेदनशील स्थलों में मरम्मत कार्यो के लिए प्रयासरत है।
विज्ञापन
फोटो