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सरूड़ा की ऐतिहासिक धरोहर विद्या भवन को संरक्षण की दरकार
Updated Tue, 11 Dec 2018 10:07 PM IST
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दुगड्डा (कोटद्वार)। उत्तराखंड के इतिहासवेत्ता डा. शिवप्रसाद डबराल चारण और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हरिराम मिश्र चंचल की कर्मस्थली दुगड्डा के सरूड़ा गांव स्थित ऐतिहासिक धरोहर उत्तराखंड विद्या भवन संरक्षण के अभाव में खंडहर में तब्दील हो गया है। एक जमाने में साहित्यकार डा. शिवप्रसाद डबराल ने इसी भवन में रहकर 50 वर्षों तक इतिहास और साहित्य की साधना की थी। आज उसी विद्या भवन के संरक्षण को लेकर शासन-प्रशासन उदासीन बना हुआ है।
ऐतिहासिक स्थली दुगड्डा नगर क्षेत्र का गौरवशाली इतिहास रहा है। ब्रिटिशकाल में गढ़वाल के व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विख्यात दुगड्डा नगर में क्रांतिकारी गतिविधियां भी संचालित होती थीं। नगर क्षेत्र से सटे ग्राम पंचायत सरूड़ा सकाली के सरूड़ा गांव में स्थित ऐतिहासिक विद्या भवन का निर्माण दो शताब्दी पूर्व 1793 में पंडित गीताराम मिश्र ने किया था। दुगड्डा नगर के संस्थापक व गढ़वाल में जागृति के अग्रदूत पंडित धनीराम मिश्र का जन्म इसी विद्या भवन में हुआ था। उनके पुत्र गढ़देश पत्रिका के संपादक कृपाराम मिश्र ‘मनहर’ हिमालय की ललकार पत्रिका के संपादक हरिराम मिश्र ‘चंचल’ कवि व शिक्षाविद जगतराम मिश्र का जन्म भी इसी विद्या भवन में हुआ था। मिश्र परिवार ने आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करता था। क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए कई योजनाएं दुगड्डा में बनाई थीं।
शिक्षाविद् और प्रसिद्ध इतिहासकार डा. शिवप्रसाद डबराल 1948 में डीएवी इंटर कालेज (वर्तमान में जीआईसी दुगड्डा) के प्रधानाचार्य नियुक्त हुए। 1951 में उन्होंने विद्यापीठ को खरीद लिया और यहीं 50 वर्ष तक साहित्य और इतिहास की साधना की। उन्होंने विद्या भवन में कई साहित्यिक ग्रंथों की रचना करने के साथ ही ऐतिहासिक, पुरातात्विक पांडुलिपियों और ग्रंथों की खोज की। यहां उन्होंने एक पुस्तकालय की स्थापना भी की थी। ग्राम प्रधान सरूड़ा सावित्री देवी, पूर्व शिक्षाविद् राम अवतार गर्ग, नीरस राजस्थानी व दिगंबर सिंह आदि का कहना है कि सरूड़ा गांव पूर्व से ऐतिहासिक रहा है।
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प्रख्यात इतिहासकार डा. शिवप्रसाद डबराल की कर्मभूमि सरूड़ा गांव स्थित विद्या भवन अमूल्य धरोहर है। उसका संरक्षण किया जाएगा। इसके लिए संस्कृति विभाग की टीम को सरूड़ा गांव भेजा जाएगा।
-सुशील कुमार, जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल
-फोटो
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ऐतिहासिक स्थली दुगड्डा नगर क्षेत्र का गौरवशाली इतिहास रहा है। ब्रिटिशकाल में गढ़वाल के व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विख्यात दुगड्डा नगर में क्रांतिकारी गतिविधियां भी संचालित होती थीं। नगर क्षेत्र से सटे ग्राम पंचायत सरूड़ा सकाली के सरूड़ा गांव में स्थित ऐतिहासिक विद्या भवन का निर्माण दो शताब्दी पूर्व 1793 में पंडित गीताराम मिश्र ने किया था। दुगड्डा नगर के संस्थापक व गढ़वाल में जागृति के अग्रदूत पंडित धनीराम मिश्र का जन्म इसी विद्या भवन में हुआ था। उनके पुत्र गढ़देश पत्रिका के संपादक कृपाराम मिश्र ‘मनहर’ हिमालय की ललकार पत्रिका के संपादक हरिराम मिश्र ‘चंचल’ कवि व शिक्षाविद जगतराम मिश्र का जन्म भी इसी विद्या भवन में हुआ था। मिश्र परिवार ने आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करता था। क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए कई योजनाएं दुगड्डा में बनाई थीं।
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शिक्षाविद् और प्रसिद्ध इतिहासकार डा. शिवप्रसाद डबराल 1948 में डीएवी इंटर कालेज (वर्तमान में जीआईसी दुगड्डा) के प्रधानाचार्य नियुक्त हुए। 1951 में उन्होंने विद्यापीठ को खरीद लिया और यहीं 50 वर्ष तक साहित्य और इतिहास की साधना की। उन्होंने विद्या भवन में कई साहित्यिक ग्रंथों की रचना करने के साथ ही ऐतिहासिक, पुरातात्विक पांडुलिपियों और ग्रंथों की खोज की। यहां उन्होंने एक पुस्तकालय की स्थापना भी की थी। ग्राम प्रधान सरूड़ा सावित्री देवी, पूर्व शिक्षाविद् राम अवतार गर्ग, नीरस राजस्थानी व दिगंबर सिंह आदि का कहना है कि सरूड़ा गांव पूर्व से ऐतिहासिक रहा है।
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प्रख्यात इतिहासकार डा. शिवप्रसाद डबराल की कर्मभूमि सरूड़ा गांव स्थित विद्या भवन अमूल्य धरोहर है। उसका संरक्षण किया जाएगा। इसके लिए संस्कृति विभाग की टीम को सरूड़ा गांव भेजा जाएगा।
-सुशील कुमार, जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल
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